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तीन तलाक पर मोदी सरकार को मिला कांग्रेस का साथ, मगर रखी ये मांग

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 December 2017, 17:47 IST

तीन तलाक पर मोदी सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में बिल पेश किया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ विधेयक पेश किया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक को रोकने के लिए लाए जा रहे विधेयक को उन्होंने वक्त की ज़रुरत बताया.

रविशंकर प्रसाद ने इस विधेयक को पास करने की सभी दलों से अपील की. इस बिल को लोकसभा में रखते हुए रविशंकर ने लोकसभा में कहा, "ये बिल प्रार्थना, रिति-रिवाज और धर्म का नहीं है बल्कि नारी न्‍याय और इंसाफ का है. सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया है. इसके बाद भी अगर ये पाप किया जा रहा है तो इस पर सदन खामोश रहेगा? अब ये सदन को तय करना है तीन तलाक कि ये पीड़ित महिलाओं का मौलिक अधिकार है या नहीं." 

उन्होंने कहा कि सु्प्रीम कोर्ट के इसे गैरकानूनी ठहराने के बाद अब एक बार में तीन तलाक के 100 मामले सामने आए हैं. हम शरीयत मे दखल नहीं दे रहे हैं.

मोदी सरकार को तीन तलाक के बिल पर कांग्रेस से समर्थन मिला है. लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम सब इस बिल के समर्थन में हैं. लेकिन इस बिल को लेकर हमारी कुछ आपत्तियां हैं. जिन्हें सही करने के लिए स्थाई समिति के पास भेजा जाना चाहिए. हम एक निश्चित समय में साथ बैठकर इसे दूर कर सकते हैं. 

मल्लिकार्जुन खड़गे के सवाल का जवाब देते हुए रविशंकर ने कांंग्रेस का इस बिल पर समर्थन करने के लिए धन्यवाद अदा किया. कानून मंत्री ने कहा, "खड़गे जी तीन तलाक बिल पर सरकार का समर्थन करने के लिए शुक्रिया. जो भी सुझाव आप हमें इस बिल को संबंध में देना चाहते हैं वो दें. अगर हमें वो सही लगे तो हम उसे कानून में सम्मिलित करेंगे."

इससे पहले लोकसभा के सांसद और AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक विधेयक पर कई सवाल उठाए हैं. उन्होने कहा कि ये बिल मौलिक अधिकारों का हनन करता है. इसके साथ ही इस बिल में कई कानूनी विसगतिंया हैं. उन्होंने कहा कि यदि तीन तलाक पर पुरुष को जेल भेजा जाता है तो गुजारे भत्‍ते का भुगतान कौन करेगा.

तीन तलाक पर ये हैं प्रावधान-

इस बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक लेने वाले शख्स को तीन साल की तक सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है. तीन तलाक लेने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस विधेयक में किया गया है.

ये बिल पीड़ित महिला को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़िता को कितना गुजारा भत्ता देना है, उसकी धनराशि मजिस्ट्रेट तय करेगा. इस बिल के तहत, एक बार में किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगा दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक देने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, "तीन तलाक मुस्लिमों में शादी खत्म करने का सबसे खराब तरीका है."

मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था, "ऐसे भी संगठन हैं जो कहते हैं कि तीन तलाक वैध है, लेकिन मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है और यह अनवांटेड है.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 5 सदस्यीय संविधान पीठ से कहा था, "अगर अदालत तुरंत तलाक (तीन तलाक) के तरीके को खारिज कर देती है, तो केंद्र सरकार मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक से जुड़ा एक नया कानून लाएगी.

First published: 28 December 2017, 17:47 IST
 
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