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जेएनयू के दूध से जली कांग्रेस अब कश्मीर का छाछ भी फूंक-फूंक कर पी रही है

आकाश बिष्ट | Updated on: 13 July 2016, 7:55 IST
QUICK PILL
  • जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) विवाद में हाथ जला चुकी कांग्रेस ने कश्मीर में जारी हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है. जेनएयू विवाद में कांग्रेस कथित तौर पर \'राष्ट्रद्रोहियों\' का समर्थन करती नजर आ रही थी.
  • फरवरी महीने में कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने उन छात्रों को अपना समर्थन दिया था जिन्होंने कथित तौर पर संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ प्रदर्शन किया था. कांग्रेस को उनका यह समर्थन भारी पड़ गया था.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) विवाद में हाथ जला चुकी कांग्रेस ने कश्मीर में जारी हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है. जेनएयू विवाद में कांग्रेस कथित 'राष्ट्रद्रोहियों' का समर्थन करती नजर आ रही थी.

एकजुट स्वर में कांग्रेस कहा कि आतंरिक सुरक्षा के मामले में समझौता करने की कोई जरूरत नहीं है. पार्टी ने कहा कि घोषित आतंकी को समर्थन देने का कोई मतलब नहीं है. 

फरवरी महीने में कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने उन छात्रों को अपना समर्थन दिया था जिन्होंने कथित तौर पर संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ प्रदर्शन किया था. कांग्रेस को उनका यह समर्थन भारी पड़ गया था. 

बीजेपी ने गांधी के इस समर्थन को यह कहते हुए भुनाने की कोशिश की कि वह राष्ट्रद्रोहियों का समर्थन कर रही है. यहां तक कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कई मौकों पर इस बात को माना कि राहुल गांधी को जेएनयू नहीं जाना चाहिए था.

हालांकि कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शन का मामला ऐसा नहीं है. अभी तक पुलिस और लोगों के बीच हुई झड़प में 30 लोगों की मौत हो चुकी है. जेएनयू के उलट कांग्रेस राज्य में जारी बिना मतलब के हिंसा का विरोध किया है. 

हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत हुई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आतंकी वानी का समर्थन करने वालों की निंदा करते हुए बयान जारी किए हैं.

मुश्किल राह

कश्मीर में जारी हिंसा के बीच केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी से बातचीत की. बातचीत के बाद जारी बयान में सोनिया गांधी ने कहा निर्दोष लोगों की मौत अफसोसजनक है और आतंकवाद के साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए.

बयान में कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी ने कहा, 'राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में समझौता नहीं होना चाहिए. आतंकवाद के साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए. हमारे नागरिकों की मौत और सुरक्षा बलों पर हमला अफसोसजनक है. पिछले दो दशक के दौरान राजनीतिक प्रक्रिया से जम्मू-कश्मीर में काफी फायदे हुए हैं. इन्हें गंवाया नहीं जा सकता. मैं घाटी के अपने भाइयों और बहनों से अपील करती हूं कि वह राजनीतिक दलों को टिकाऊ समाधान निकालने में मदद दें ताकि लोगों की आकांक्षाओं को शांतिपूर्वक और लोकतांत्रित तरीके से पूरा किया जा सके.'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद भी लोगों की मौत पर दुख जता चुके हैं. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पार्टी के रुख को दोहराते हुए कहा, 'घोषित आतंकी को समर्थन देने का सवाल ही पैदा नहीं होता है.'

राज्य में कानून और व्यवस्था की बिगड़ती हालत पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए आजाद ने कहा राज्य में हिंसा की वजह से काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता कानून और व्यवस्था की स्थिति बहाल करने की है ताकि किसी और को जान नहीं गंवानी पड़े.

हालांकि सोनिया गांधी और गुलाम नबी आजाद ने केंद्र सरकार की अब तक की कार्रवाई पर कुछ भी कहने से परहेज किया. लेकिन सिंघवी पाकिस्तान के साथ रिश्ते बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों की जमकर आलोचना की.

वानी को नवाज शरीफ के समर्थन पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंघवी ने कहा, 'दुख और निराशा बल्कि यह कलंक की तरह है कि हमारे प्रधानमंत्री और एनडीए की सरकार पूरी तरह से अपने प्रचार में डूबी हुई है. वह खुद की पीठ थपथपा रही है. सरकार कश्मीर से पाकिस्तान और चीन से ऑस्ट्रेलिया तक इवेंट मैनेजमेंट में जुटी हुई है लेकिन विदेश नीति के मामले में कोई ठोस उपलब्धि हासिल नहीं कर पा रही है. बल्कि विदेश नीति उल्टी दिशा में जा रही है.'

वानी को आतंकी बताते हुए सिंघवी ने कहा कि वैसे व्यक्ति को समर्थन देने का कोई मतलब नहीं बनता है जिसका आतंकी इतिहास रहा है.

उन्होंने कहा कि जो लोग वानी का समर्थन कर रहे हैं, उनके साथ सतर्कतापूर्वक सहानुभूति रखते हुए लेकिन सख्ती से निपटा जाना चाहिए. सरकार को समर्थन देने के बावजूद कांग्रेस ने मोदी सरकार की विफल कूटनीति पर भी हमला बोला. 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ वानी की मौत पर दुख जता चुके हैं. सिंघवी नेे कहा, 'आपको इस तरह की प्रतिक्रिया आपकी कूटनीति की वजह से मिलती है.'

First published: 13 July 2016, 7:55 IST
 
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