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जाट आंदोलन की आंच से तप रही कांग्रेस का छवि सुधार अभियान

राजीव खन्ना | Updated on: 10 March 2016, 23:05 IST
QUICK PILL
  • जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर हरियाणा में अलग-थलग पड़ चुकी कांग्रेस पार्टी की रणनीति अब जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने पर है.
  • पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हुडा ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान कई विरोध प्रदर्शन और आंदोलन हुए लेकिन कभी भी दंगे नहीं हुए.

जाट आंदोलन के बाद के घटनाक्रम की वजह से अलग-थलग पड़ी कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा में अपनी स्थिति सुधारने की कवायद शुरू कर दी है.

पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुडा और कांग्रेस पार्टी प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर जमीनी स्तर पर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार के खिलाफ अभी भी कांग्रेस पार्टी ही मोर्चा खोलने में सक्षम है. कांग्रेस की कोशिश यह बताने की है कि वह मौजूदा बीजेपी सरकार की प्रशासनिक और राजनीतिक विफलता की पोल खोल सकती है.

जाटों के आरक्षण को लेकिर किए गए आंदोलन के बाद हुडा निशाने पर हैं. हुडा को जाटों के नेता के तौर पर देखा जाता है और उनकी ही सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य की आरक्षण नीति में बदलाव हुआ था.

तत्कालीन यूपीए सरकार ने अपने आखिरी दिनों में जाटों को ओबीसी की सूची में शामिल किए जाने की अधिसूचना जारी कर दी थी. हालांकि तब सरकार ने इस मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा जाति आयोग की सिफारिशों को नजरअंदाज करते हुए जाटों को आरक्षण देने का फैसला किया था.

शांति की अपील को लेकर हुडा के दिल्ली में धरने पर बैठे जाने से भी कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है

सरकार ने यह फैसला आम चुनाव में जाने से ठीक पहले आया था. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस फैसले को खारिज कर दिया.

इसके पहले सरकार ने विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणी में जाटों, जाटों सिखों, बिश्नोई, रोर और त्यागियों को आरक्षण दिए जाने का फैसला किया था जिस पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोेर्ट ने इस मामले में हरियाणा पिछड़ा जाति आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया था.

हरियाणा पहले से ही एससी कोटे के तहत 20 फीसदी और बैकवॉर्ड कोटे के तहत 27 फीसदी आरक्षण देता रहा है. इसके तहत सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान है. विशेष श्रेणी के तहत पांच जातियों को 10 फीसदी और आर्थिक रूप से अति पिछड़ी जातियों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने के बाद कुल आरक्षण 67 फीसदी हो जाता. 

हुडा और कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा

जाट आंदोलन के दौरान गैर जाट जातियों की संपत्तियों को निशाना बनाए जाने के बाद उनके निशाने पर हुडा और कांग्रेस हैं. शांति की अपील को लेकर हुडा के दिल्ली में धरने पर बैठे जाने से भी कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है.

इसके बाद हुडा के सहयोगी विरेंदर सिंह की कथित ऑडियो क्लिप आने के बाद कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. विरेंदर सिंह ने हालांकि अपने खिलाफ हिंसा भड़काए जाने के आरोपों से इनकार करते हुए क्लिप को पुराना बताते हुए कहा कि इसमें छेड़छाड़ की गई है. कांग्रेस ने सिंह को नोटिस जारी कर रखा है.

विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी को जाट आरक्षण के बाद हुए ध्रुवीकरण का फायदा हुआ है

कांग्रेस नेतृत्व को जनता के आक्रोश का भी सामना करना पड़ रहा है. सूत्रों ने बताया कि पार्टी वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी को हरियाणा बुलाए जाने की योजना को फिलहाल थोड़े समय के लिए टाल दिया गया है.

विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी को जाट आरक्षण के बाद हुए धु्रवीकरण का फायदा हुआ है. वहीं जाटों की पार्टी समझे जाने वाले कांग्रेस और इनेलोद की स्थिति खराब हुई है. विश्लेषकों के मुताबिक बीजेपी के कुरूक्षेत्र से सांसद राज कुमार सैनी लगातार जाटों के खिलाफ बयानबाजी की और स्थिति ाराब होने के दौरान प्रशासन पंगु हो गया.

कांग्रेस के एक धड़े को लगता है कि संसद में भी पार्टी हरियाणा के मुद्दे को सही ढंग से नहीं उठा पाई और इससे राज्य में पार्टी की मुश्किलें और बढ़ी हैं.

जांच आयोग की मांग

पार्टी ने अब जाट आंदोलन और उस दौरान हुई हिंसा की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की है. हुडा ने कहा, 'केवल न्यायिक जांच आयोग से ही यह बात साफ हो सकती है कि हिंसा के पीछे किसका हाथ था. आखिरकार कैसे एक शांतिपूर्वक चल रहा आंदोलन हिंसक हो गया. बीजेपी विधायकों और मंत्रियों की भूमिका की जांच कराए जाने की जरूरत है.'

वीरेंदर सिंह की गिरफ्तारी की संभावना को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सिंह ने अग्रिम जमानत अर्जी दी है और वह कानून का हर संभव सहयोग करेंगे.

हिंसा भड़काने में कांग्रेसी नेताओं की भूमिका को लेकर पूछे जाने पर पर हुड्डा ने कहा, 'वह पहले से ही अग्निपरीक्षा के दौर से गुजर रहे हैं.' उन्होंने कहा, 'मैं दस सालों तक सरकार में रहा. मेरे कार्यकाल के दौरान भी विरोध प्रदर्शन और आंदोलन हुए लेकिन कभी भी दंगा नहीं होने दिया गया.'

हुड्डा ने कहा कि उनकी पार्टी समाज के ध्रुवीकरण की कोशिशों का मुंहतोड़ जवाब देगी. पहले कांग्रेस पार्टी ने तंवर के तहत प्रस्ताव पारित कर यह साफ कर दिया कि मनोहर लाल खट्टर बीजेपी के नेताओं के भड़काऊ भाषण के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहे हैं. 

प्रस्ताव में कहा गया है कि बीजेपी नेताओं ने हिंसा भड़काकर अपनी विफलताओं की तरफ से ध्यान भटकाने की कोशिश की. पार्टी ने ऐसे नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने की मांग की है.

पार्टी ने कहा कि बीजेपी की सरकार नैतिक रूप से इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे. पार्टी की योजना बजट सत्र के दौरान इस मामले को उठाने की है. कांग्रेस नेतृत्व राज्य भर के कार्यकर्ताओं को इस मामले में गोलबंद कर रही है.

First published: 10 March 2016, 23:05 IST
 
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