Home » इंडिया » Sonia Gandhi, Rahul Gandhi, wakes up to protests. Couldn't it have taken the lead?
 

सोनिया उतरीं सड़क पर

चारू कार्तिकेय | Updated on: 4 November 2015, 17:50 IST
QUICK PILL
  • असहिष्‍णुता का मुद्दा उठाते हुए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में 100 से ज्यादा कांग्रेसी नेताओं ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया.
  • राष्ट्रपति को दिए ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा है कि जानबूझकर सत्ता प्रतिष्ठान के कुछ वर्गों द्वारा हमारे देश में भय, असहिष्‍णुता और अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है.

लेखक उदय प्रकाश के साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटाने के बाद पिछले दो महीने में कई महत्वपूर्ण लेखकों, कलाकारों और वैज्ञानिकों ने सरकार द्वारा दिए गए अपने अवॉर्ड लौटाए हैं. कांग्रेस पार्टी ने देश के बुद्धिजीवियों और संस्कृतिकर्मियों के समर्थन में तीन नवंबर को विरोध प्रदर्शन किया.

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में 100 से ज्यादा कांग्रेसी नेताओं ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया.

यह भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ संयुक्त विपक्ष का सोनिया के नेतृत्व में इसी साल निकाले गए मार्च से अलग था.  इसमें सिर्फ कांग्रेसी नेता शामिल थे.

नेताओं ने राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा. पार्टी ने कहा, ''सत्ता प्रतिष्ठान के एक हिस्से द्वारा देश भर में फैलाए जा रहे भय, असहिष्‍णुता और असुरक्षा के माहौल से पार्टी चिंतित है.''

मेमोरेंडम में आगे कहा गया है, ''हाल की घटनाओं पर प्रधानमंत्री की चुप्पी और उन पर कोई कार्रवाई ना होना इस बात का संकेत है कि इन घटनाों को उनकी सहमति शामिल है.'' ज्ञापन में राष्ट्रपति से निवेदन किया गया है कि वे अपने राजनीतिक और नैतिक अधिकारों का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री पर इस बात का दबाव डालें कि इस तरह की घटनाएं इस देश मं स्वीकार्य नहीं हैं.''

ज्ञापन

ज्ञापन में कहा गया है, ''सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के लिए एक सुनियोजित और डरावना अभियान चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य हमारे समाज को ध्रुवीकृत करना और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ना है.''

कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ''माहौल बिगाड़ने वाले, कट्टर और असहिष्णु ताकतों के खिलाफ कड़ाई और स्पष्टता से बोलने के लिए'' धन्यवाद दिया. पार्टी को इस बात से गहरी नाराजगी है कि प्रधानमंत्री इन ताकतों के खिलाफ कुछ नहीं बोल रहे हैं.

ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा,  ''हालात अच्छे नहीं हैं. उनका मंत्रिपरिषद लगातार ऐसे लोगों को आश्रय दे रहा है जो नफरत और विभाजन फैलाने का काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सहयोगियों के भड़काने वाले बयान और हरकतों से निगाह फेरे हुए हैं.''

ज्ञापन में आगे कहा गया है, ''विभिन्न वर्गों के प्रतिष्ठित लोगों ने देश में खराब हो रहे माहौल के खिलाफ अपनी आवाज उठाई. अफसोस की बात है कि उनके मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगी ने जानबूझकर इन प्रतिरोधों को गैरजरूरी और प्रभावहीन साबित करने की कोशिश की है.''

राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से मुखातिब हुई सोनिया गांधी ने जोर देकर कहा कि ये अकस्मात होने वाली छिटपुट घटनाएं नहीं हैं. यह एक सुनियोजित साजिश के तहत समाज को गोलबंद करने और अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए की जा रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस अपनी पूरी ताकत के साथ इनसे मुकाबला करेगी.

देरी से उठाया गया कदम?

यह मार्च ऐसे समय में हुआ है जब एक हफ्ते के अंदर कई नामी-गिरामी लोगों ने लेखकों, कलाकारों, फिल्मी हस्तियों, विद्वानों, इतिहासकारों और वैज्ञानिकों के विरोध के समर्थन में अपनी आवाज मुखर की है.

आरबीआई गर्वनर रघुराम राजन, इंफोसिस संस्थापक नारायण मूर्ति और बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान ने भी देश में बदले हुए सामाजिक माहौल को लेकर अपनी चिंता जतायी है. जबकि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस इसमें कहीं पीछे छूट गई नजर आ रही है.

निश्चित रूप से इस मार्च ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है, लेकिन इससे कांग्रेस को कितना फायदा होगा, यह कहना मुश्किल है.

जिस एक घटना का विशेष रूप से मेमोरेंडम में जिक्र किया गया वह थी हरियाणा में दलित बच्चों की जलाकर की गई हत्या. पर उसे हुए भी एक पखवारा बीत चुका है. यानी कांग्रेस की प्रतिक्रिया बहुत देर से आई.

कांग्रेस प्रवक्ता अजय कुमार ने कैच को बताया कि पार्टी लंबे समय से इन मुद्दों को उठा रही है लिहाजा यह देर से उठाया गया कदम नहीं है. उनका सारा जोर इस बात पर था कि सोनिया और राहुल ने सही समय पर सरकार को उसका संवैधानिक दायित्व को याद दिलाने की जरूरत महसूस की.

यह पूछने पर कि जो काम राजनीतिक विरोधियों को करना चाहिए उसे सिविल सोसाइटी ने पहले ही चुरा लिया है, कुमार ने कहा कि यहां कोई प्रतिद्वंदिता नहीं है. उनके मुताबिक अवॉर्ड वापसी कांग्रेस के मार्च की वजह नहीं था बल्कि इसके पीछे घटनाओं की लंबी श्रृंखला है. कांग्रेस लगातार देश में फैलाए जा रहे 'नफरत के अभियान' का मुकाबला कर रही थी.

राष्ट्रपति से किस तरह के कदम उठाने की उम्मीद पार्टी करती है? इस सवाल पर कुमार ने कहा कि यह राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर है. उन्होंने बताया कि अब तक अगले कदम की योजना नहीं बनी है लेकिन इस पर काम चल रहा है.

क्या यह सफल होगा?

मुद्दों और चितांओं पर समानता देखने के बाद यह बात साफ है कि कांग्रेस का मार्च सिविल सोसाइटी के विरोध से प्रेरित था. हालांकि, यह देखा जाना बाकी है कि यह मार्च सिविल सोसाइटी से प्रेरणा लेकर निकाला गया था या सिविल सोसाइटी द्वारा उठाए गए मुद्दे को एक कदम और आगे ले जाने की कोशिश थी.

राजीनिकशास्त्री प्रोफेसर अचिन विनायक के मुताबिक इस मार्च के सांकेतिक प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता.  उनके अनुसार समाज के भिन्न भिन्न हिस्सों उठी आवाज एक मौका बन गई जिसकी वजह से कांग्रेस इसमें शामिल हुई.

लगे हाथ वे यह भी जोड़ते हैं कि यह कोई ऐसा ऐतिहासिक मौका नहीं है जहां से कांग्रेस का पुनरुत्थान हो सके. सिविल सोसाइटी को समेशा सचेत रहना चाहिए ताकि उसकी विरोध करने की ताकत बनी रहे.

अगर कांग्रेस यहां से दबाव बढ़ाने का फैसला करती है तो संसद के शीतकालीन सत्र में यह मुद्दा गर्मा सकता है. मानसून सत्र के बाधित होने के कारण आने वाले सत्र में पहले से ही बहुत सारे काम बचे हुए हैं. पहले भी विपक्ष विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के द्वारा ललित मोदी की सहायता किए जाने और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके बेटे दुष्यंत पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संसद बाधित कर चुकी है. मानसून सत्र के बाद विपक्ष को और भी मुद्दे मिल गए हैं.

यह देखने वाली बात होगी कि मुख्य विपक्षी दल सरकार को सामाजिक सद्भाव और विकास के एजेंडे पर वापस जाने के लिए मजबूर कर पाती है या नहीं.

First published: 12 November 2015, 15:16 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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