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गोवा में भाजपा को बहुमत, कांग्रेस को यह दिन देखना भी जरूरी था

आकाश बिष्ट | Updated on: 18 March 2017, 9:33 IST

गोवा में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा विधानसभा में बहुमत हासिल करने के साथ ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का दावा झूठा साबित हो गया. उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर केवल दो दिन के लिए मुख्यमंत्री रहेंगे. विधानसभा चुनाव में मात्र 13 सीटें जीतने वाली भाजपा ने महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी), गोआ फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) से आए 3-3 विधायकों, तीन निर्दलीयों और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक मात्र विधायक का समर्थन हासिल कर जता दिया है कि फिलहाल कांग्रेस एक और कार्यकाल के लिए विपक्ष में बैठेगी.

कांग्रेस को उस वक्त करारा झटका लगा जब जीएफपी ने भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया जबकि चुनाव प्रचार के दौरान जीएफपी पूरी तरह भाजपा विरोधी पार्टी के तौर पर चुनाव लड़ी थी. जीएफपी नेता विजय सरदेसाई के अनुसार, कांग्रेस में कहीं एकजुटता नहीं दिखाई दे रही थी. पार्टी के बहुत से पूर्व मुख्यमंत्री राज्य में इस बार भी मुख्यमंत्री पद पर निगाहें गड़ाए हुए थे.

इसके अलावा कांग्रेस किसी फैसले पर पहुंचती दिखाई नहीं दे रही थी. इसी वजह से जीएफपी ने भाजपा को समर्थन दिया. उन्होंने कहा, ‘चुनाव परिणाम आने के 24 घंटे बाद भी कांग्रेस तय नहीं कर पा रही थी कि उनका मुख्यमंत्री कौन होगा और भाजपा ने तुरंत पर्रिकर को रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे कर राज्य का दायित्व संभालने के निर्देश दिए. कांग्रेस की निर्णय न ले पाने की कमजोरी के चलते वह सरकार बनाने से चूक गई.’

नाम न बताने की शर्त पर एक कांग्रेसी नेता ने बताया भाजपा नेता नितिन गडकरी ने प्रदेश की अन्य पार्टियों से समर्थन की अपील की जबकि कांग्रेस मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की लड़ाई में ही उलझी रही. इस वक्त कांग्रेस को सरकार बनाने को प्राथमिकता देनी चाहिए थी लेकिन कांग्रेस नेताओं ने जीएफपी को अहमियत नहीं दी. इसी के चलते पार्टी ने भाजपा के साथ होने में ही बेहतरी समझी.

कांग्रेस नेताओं ने सरकार न बना पाने का ठीकरा दिग्विजय सिंह के सिर फोड़ दिया और कार्रवाई की मांग की

इस बीच, सरदेसाई ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस भावी सरकार के सारे महत्वपूर्ण पदों पर पहले ही बुकिंग करने में लगी हुई थी और उसमें संभावित सहयोगियों को कोई महत्वपूर्ण पद मिलने की गुंजाइश नहीं छोड़ी. सरदेसाई कहते हैं, ‘ऐसे में मेरे जैसे नए राजनेताओं के लिए कांग्रेस जैसी कमजोर पार्टी में जाना मुनासिब नहीं था जो निर्णय लेने में ही अक्षम हो. हम कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व ही गठबंधन करना चाहते थे लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष लुइजिन्हो फलेरियो और एआईसीसी सचिव गिरीश चोडनकर ने ऐसा होने नहीं दिया. मैंने चुनाव से पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह से भी बात की थी लेकिन वे सभी इस दिशा में प्रतिबद्ध नहीं दिखे. अगर हम गठबंधन के तौर पर चुनाव लड़े होते तो आज गोआ में हमारी ही सरकार होती.'

कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यही है कि इसके नेता अड़ियल हैं, उन्हें जमीनी स्थिति और बहती हवा का अंदाजा नहीं है. सरदेसाई के शब्दों में, 'फलेरो खुद को ऐसे पेश कर रह थे, जैसे कि वे दिग्विजय सिंह से भी बड़े नेता हों और यह भी कांग्रेस की विफलता का एक कारण कहा जा सकता है.'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के उलट सरदेसाई ने दिग्विजय सिंह को दोष नहीं दिया जबकि कांग्रेस नेताओं ने सरकार न बना पाने का ठीकरा दिग्विजय सिंह के सिर फोड़ दिया और वे उनकी बर्खास्तगी की मांग कर रहे थे. जब उनसे पूछा गया कि पर्रिकर के धुर विरोधी होने के बावजूद वे उन्हें समर्थन देने के लिए कैसे तैयार हो गए? इस पर सरदेसाई कहते हैं, 'पूर्व रक्षा मंत्री रहने के कारण उनके दिल्ली तक सम्पर्क हैं. इसलिए वे जरूरत पड़ने पर केंद्र की सहायता आसानी से ले सकेंगे.'

वो आगे बताते हैं, 'चूंकि हमारी पार्टी क्षेत्रीय दल है, इसलिए हमें अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य के लिए केंद्र की सहायता की जरूरत है. इसीलिए हमने भाजपा के साथ आना ज्यादा उचित समझा.'

अपनों पर भी नहीं नियंत्रण

चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरने के बाद कांग्रेस को अपनी ही पार्टी के एक विधायक विश्वजीत राणे ने तगड़ा झटका दिया. पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह राणे के पुत्र विश्वजीत ने सदन में बहुमत सिद्ध करने के लिए रहे मतदान में भाग नहीं लिया. इससे कांग्रेसी विधायकों की सदन में संख्या मात्र 16 रह गई. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. अब उनके भाजपा में शामिल होने की संभावनाएं हैं.

राणे कांग्रेस में विभाजन का कारण बन सकते हैं क्योंकि वे पार्टी के उन असंतुष्ट विधायकोें के गुट के नेता हैं जो पार्टी में अनिर्णय के हालात से नाखुश हैं. राणे के अलावा कांग्रेस विधायक एलेक्सियो रीनाल्डो लॉरेन्को, जेनिफर मॉनसेरेट, दयानंद स्पोट और फ्रांसिस सिल्वेरिया के भी भाजपा में शामिल होने की संभावना है.

इन तीनों ने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को ऐसे संकेत भी दिए हैं. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस प्रदेश में उपहास का पात्र बन चुकी है और सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद विपक्ष में बैठने को मजबूर है. मीडिया से बात करते हुए राणे ने कहा, 'उनका अपनी पार्टी से मोह भंग हो चुका है और वे पार्टी प्रबंधन के खिलाफ पहला कदम उठा रहे हैं.'

उन्होंने कहा, 'वे सत्तारी युवा मोर्चा के बैनर तले सत्तारी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे. राणे को सबसे ज्यादा यही बात अखर रही थी कि सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस प्रदेश में सरकार नहीं बना सकी. इस बीच, एनसीपी ने अपने विधायक चर्चिल अलेमाओ को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए?

First published: 18 March 2017, 9:33 IST
 
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