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नेहरू के 'फर्जी' पत्र पर कानूनी कार्रवाई करेगी कांग्रेस

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 23 January 2016, 16:04 IST

शनिवार को केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी लगभग 100 गुप्त फाइलों को सार्वजनिक किया है. इन फाइलों के जारी होने के साथ ही एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है.

एक निजी चैनल 'आज तक' ने दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ब्रिटेन के तत्कालीन पीएम क्लेमेंट एटली को लिखे पत्र में नेताजी को युद्ध अपराधी बताया था.

नेहरू ने इस चिट्ठी में कहा है, 'मुझे भरोसेमंद सूत्र से पता चला है कि सुभाष चंद्र बोस, जो आपके युद्ध अपराधी हैं, उन्हें स्टालिन ने रूस में घुसने की मंजूरी दे दी है. यह रूस का धोखा है, क्योंकि रूस, ब्रिटिश-अमेरिकी गठबंधन का मित्र देश है. उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था. इस पर आपको जो सही लगे वह कार्रवाई करें.'

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हालांकि चिट्ठी पर नेहरू का सिर्फ नाम लिखा है, उनका हस्ताक्षर नहीं है. चिट्ठी 27 दिसंबर 1945 को लिखी गई थी.

इस पत्र को कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद शर्मा ने नकार दिया है. उन्होंने पत्र को छापने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार आनंद शर्मा ने कहा है, 'कांग्रेस इस फर्जी पत्र का खुलासा करेगी और इस मामले में   कार्रवाई करेगी.'

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आनंद शर्मा ने कहा है कि पत्र एक फर्जी कागज है जिसका कुछ शरारती तत्व प्रचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सुभाष चंद्र बोस का सम्मान करती है लेकिन नेहरु के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाना शरारतपूर्ण है. कांग्रेस ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी और उन्हें दंड दिलवाएगी.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े दस्तावेजों को जारी किया. बोस की 119वीं जयंती पर पीएम मोदी ने उनसे जुड़ी 100 फाइलों की डिजिटल प्रतिलिपियां जारी की गईं.

कांग्रेस पार्टी नेहरू के नाम से पत्र जारी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें दंड दिलवाने का ऐलान किया है

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने नेताजी को समर्पित वेबसाइट http://netajipapers.gov.in/ का लोकार्पण भी किया. इस साइट पर सारे दस्तावेज अपलोड कर दिए गए हैं.

पिछले साल 14 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार वालों से मुलाकात कर उनसे जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की घोषणा की थी.

इससे पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल सरकार ने भी नेताजी से संबंधित 64 दस्तावेजों को सार्वजनिक किया था. इसके बाद से ही एनडीए सरकार पर इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का दबाव था.

नेताजी से जुड़े दस्तावेजों को बहुत पहले से सार्वजनिक करने की मांग चल रही थी. लेकिन कई तरह के राजनैतिक कारणों से इसे पूर्व में सार्वजनिक नहीं किया गया.

First published: 23 January 2016, 16:04 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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