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अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू, तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने लोगों से तांबे की पत्तियां दान करने को कहा

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 August 2020, 14:06 IST

आज श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की दिल्ली में बैठक हुई. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी कि ''मन्दिर निर्माण में लगने वाले पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे की पत्तियों का उपयोग किया जाएगा. निर्माण हेतु 18 इंच लम्बी, 3mm गहरी, 30 mm चौड़ी 10,000 पत्तियों की आवश्यकता होगी. तीर्थ क्षेत्र श्रीरामभक्तों का आह्वान करता है कि तांबे की पत्तियां दान करें. इन तांबे की पत्तियों पर दानकर्ता अपने परिवार, क्षेत्र अथवा मंदिरों का नाम गुदवा सकते हैं. इस प्रकार से ये तांबे की पत्तियां न केवल देश की एकात्मता का अभूतपूर्व उदाहरण बनेंगी, अपितु मन्दिर निर्माण में सम्पूर्ण राष्ट्र के योगदान का प्रमाण भी देंगी.

 

जानकारी दी गई है कि ''श्री राम जन्मभूमि मन्दिर के निर्माण हेतु कार्य प्रारंभ हो गया है. CBRI रुड़की और IIT मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कम्पनी L&T के अभियंता भूमि की मृदा के परीक्षण के कार्य में लगे हुए है. अयोध्या में भव्य राममंदिर के निर्माण का भूमि पूजन पीएम मोदी ने किया था.


मन्दिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है.'' तीर्थ क्षेत्र ने जानकारी दी ''श्री रामजन्मभूमि मन्दिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि वह सहस्त्रों वर्षों तक न केवल खड़ा रहे, अपितु भूकम्प, झंझावात अथवा अन्य किसी प्रकार की आपदा में भी उसे किसी प्रकार की क्षति न हो. मन्दिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नही किया जाएगा''.

एक रिपोर्ट के अनुसार राम मंदिर निर्माण का काम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने लार्सन एंड टूब्रो कंपनी को काम सौंपा है. कहा जा रहा था कि निर्माण के डेढ़ साल के अंदर मंदिर का पहला तल का निर्माण पूरा हो जाएगा और लोग राम लला के दर्शन कर पाएंगे. खबरों के अनुसार, प्रथम तल के निर्माण के बाद, उसके अगले दो सालों के अंदर मंदिर के दोनों तलों का निर्माण किया जाएगा.

राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या के कारसेवक पुरम में बनाई गई कार्यशाला में जो पत्थर तराश के रखे गए हैं उनके अलावा देशभर में जिन जिन जगहों पर शिला पूजन हुआ है, उन सभी शिलाओं का इस्तेमाल भी राम मंदिर के निर्माण में किया जाएगा. इतना ही नहीं लाखों की संख्या में उन ईटों का भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिनकों देश के अलग अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं ने लाए थे.

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First published: 20 August 2020, 13:58 IST
 
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