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अमरिंदर सिंह: विदेश यात्रा खत्म हो गई, लेकिन विवाद खत्म नहीं हो रहे

राजीव खन्ना | Updated on: 6 May 2016, 23:26 IST

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह के अमेरिका दौरे पर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे. ताजा मामला उनके कैलिफोर्निया पहुंचने पर 'खालिस्तान जिंदाबाद' का नारे लगाए जाने का है. नारा लगाने वाले कुछ सिख एनआरआई थे. राज्य के विपक्षी दलों ने इसे लेकर अमरिंदर को घेरना शुरू कर दिया है.

कांग्रेस का दावा है कि अमरिंदर की सभा सफल रही. हालांकि जब कुछ लोग नारे लगाने लगे तो उन्हें सुरक्षा घेरे में लेकर बाहर निकाला गया. एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें अमरिंदर की कार पर लोग बॉटल और कैन फेंकते दिख रहे हैं.

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अमरिंदर ने मीडिया में आई उन खबरों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि वहां उनपर जूता फेंका गया और धक्का-मुक्की भी हुई. अमरिंदर के अनुसार कथित वीडियो सिख फॉर जस्टिस(एसएफजे) नामक संगठन ने वितरित किया है. इसी संगठन ने उनपर जूते चलने की भी अफवाह फैलायी ताकि उनकी एनआरआई सिखों के संग सफल बैठक की खबर को दबाया जा सके.

अमरिंदर ने कनाडा में अनुमति न मिलने के कारण दो सभाओं को स्काइप से संबोधित किया

अमरिंदर ने कहा, "कार्यक्रम स्थल पर मौजूद चंद लोगों के खालिस्तान समर्थक नारों को मीडिया ने जो तवज्जो दी क्या वो हैरानी की बात नहीं है, जबकि तीन घंटे तक चली बैठक जिसमें करीब एक हजार लोग शामिल थे उसे नजरंदाज कर दिया गया?"

मीडिया में आई खबरों के अनुसार अमरिंदर जहां भी गए उनसे पिछले लोकसभा में दिए गए उनके बायन के बाबत सवाल पूछे गए. अमरिंदर ने आम चुनाव के दौरान कहा था कि लोगों को 1984 को भूल कर आगे बढ़ना चाहिए.

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कुछ लोगों ने उनके बयान को कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट दिए जाने के तौर पर देखा. टाइलर पर आरोप है कि उन्होंने सिख नरसंहार का नेतृत्व किया था.

अमरिंदर का विरोध होना कई राजनीतिक जानकारों को हैरान भी कर रहा है. क्योंकि उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार का मुखर विरोध किया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से काफी अच्छा संबंध होने के बावजूद उन्होंने लोकसभा और कांग्रेस पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था.

कुछ खबरों के अनुसार वो पहले भी ऐसी सभाओं को संबोधित कर चुके हैं जिनके पीछे खालिस्तानी झंडे लगे हुए थे.

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अमरिंदर को करीब एक हफ्ते पहले ही कनाडा में अपनी सभा रद्द करनी पड़ी थी. कनाडा के अधिकारियों ने अपनी ग्लोबल अफेयर्स पॉलिसी (जीएपी) का हवाला देते हुए उनकी सभा को रद्द कर दिया. इस नियम के अनुसार, कोई भी विदेशी सरकार या व्यक्ति कनाडा में चुनावी प्रचार नहीं कर सकते.

अमरिंदर ने विरोध स्वरूप कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडेव को एक खत लिखा. उन्होंने लिखा, "पिछले एक साल में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राजनीतिक नेताओं ने कनाडा में जनसभाएं की हैं. लेकिन किसी ने इस पर आपत्ति नहीं की."

अमरिंदर को विदेश में सभा नहीं करने के देने के खिलाफ सबसे पहले मैंने आवाज उठाई थीः प्रकाश सिंह बादल

बाद में अमरिंदर ने स्काइप के माध्यम से कनाडा के टोरंटों और वैंकुअर में पहले से प्रस्तावित सभाओं को संबोधित किया.

एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, "इससे वहां जाने का मकसद ही खत्म हो गया. अगर स्काइप से ही सभा को संबोधित करना था तो ये पटियाला या लुधियाना से भी किया जा सकता था."

अमरिंदर सिंह ने शिरोमणी अकाली दल (एसएडी) पर उनकी कनाडा और अमेरिका यात्रा में रोड़े अटकाने का आरोप लगाया. जिसके जवाब में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि "जब अमरिंदर कुछ कहें तो सच जानने के लिए उनकी बात को उलटा करके समझें."

बादल के अनुसार उन्होंने अमरिंदर को विदेश में सभा नहीं करने के देने के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाई थी.

बादल ने ये भी कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपने विचार रखने का अधिकार है और हर किसी को इसका सम्मान करना चाहिए.

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एसएफजे पर टिप्पणी करते हुए बादल ने कहा कि इस संस्था का नाम लोकतांत्रिक लगता है लेकिन वो हर उस आदमी का विरोध करते हैं जो वहां अपने विचार व्यक्त करना चाहता है, चाहे वो अमरिंदर हों या कोई दूसरा भारतीय नेता.

कनाडा यात्रा रद्द होने के बाद अमरिंदर ने लॉस एंजल्स में एक सभा में कहा, "ये दुर्भाग्यपूर्ण और निराधार है."

अमरिंदर ने अमेरिका कहा कि पंजाब में उनका पांच साल का कार्यकाल सबसे 'शांतिपूर्ण' रहा है और एसएफजे के लोग राष्ट्रविरोधियों के हाथों में खेल रहे हैं.

अमरिंदर ने कनाडा में इससे पहले आम आदमी पार्टी के नेताओं की सभा को लेकर भी एसएफजे की आलोचना की. एसएफजे ने आम आदमी पार्टी के कार्यक्रम तब आपत्ति जताई जब उसके अधिकांश नेता अपने सभाएं कर चुके थे.

First published: 6 May 2016, 23:26 IST
 
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