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चंडीगढ़ हवाईअड्डा नामकरण विवाद: नाम शहीद भगत सिंह हो या फिर चंडीगढ़, मोहाली?

राजीव खन्ना | Updated on: 23 September 2016, 7:44 IST
QUICK PILL
  • पंजाब सरकार ने विज्ञापन के ज़रिए मामले को हाइजैक करते हुए इसका नाम \'मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट\' कर दिया है.
  • हरियाणा की खट्टर सरकार ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से एयरपोर्ट का नाम आरएसएस के नेता मंगल सेन के नाम पर करने की मांग कर दी थी.
  • पंजाब और हरियाणा विधान सभाओं ने क्रमशः 2009 और 2010 में हवाईअड्डे का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर करने का प्रस्ताव पारित किया हुआ है.

पुरानी कहावत है कि नाम में बहुत कुछ रखा है. अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के नाम को लेकर हरियाणा और पंजाब आमने-सामने आ गए हैं. हरियाणा और पंजाब के बीच राजनीतिक तनातनी का ताजा साक्ष्य चंडीगढ़ हवाई अड्डे का नामकरण है. पिछले सप्ताह शारजाह के लिए उड़ान शुरू हो जाने से यह हवाई अड्डा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ऑपरेशन में आ गया.

इस समय शिरोमणि अकाली दल के प्रकाश सिंह बादल की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने पूरे पेज का विज्ञापन देकर इस मामले को हाइजैक कर लिया है. विज्ञापन में उन्होंने इसे 'मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट' का नाम दिया है. उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इससे सहमत नहीं है.

हरियाणा में भाजपा की सरकार है. पंजाब सरकार द्वारा अपने विज्ञापनों में 'मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट' नाम लिखे जाने पर मुख्यमंत्री खट्टर ने भी आपत्ति जताई है. अब पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह पीछे हटने को तैयार नहीं हैं तो हरियाणा सरकार भी नाम के विरोध पर अड़ गई है. इसी साल मार्च में दोनों पक्ष इस अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे का प्रस्तावित नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर करने को सहमत हो गए थे। पांच माह में यह तनातनी और जोर पकड़ गई

पिछले साल 11 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एयरपोर्ट पर सिविल एयर टर्मिनल का उद्धघाटन किया था. खट्टर, जो पहले हवाईअड्डे का नाम भगत सिंह के नाम पर करने को सहमत हो गए थे, ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से एयरपोर्ट का नाम आरएसएस के नेता मंगल सेन के नाम पर करने की मांग कर दी. इस कदम से खफा बादल ने दिसम्बर 2015 में प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था और खट्टर के इस कदम को 'अरुचिकर' भी बताया था.

पहले दोनों राज्यों ने भगत सिंह के नाम पर प्रस्ताव पारित किया था

पिछले साल संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कथित रूप से संसद में कहा था कि हवाईअड्डे का नामकरण करने में इसलिए देरी हो रही है कि दोनों राज्य सरकारें किसी एक नाम पर सहमत नहीं हैं.

चारों तरफ से आलोचनाओं से घिरे खट्टर ने तब यह कह दिया था कि उनकी सरकार को एयरपोर्ट का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर करने में कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने यहां तक कह दिया था कि केन्द्र सरकार सुनिश्चित करे कि एयरपोर्ट के नाम में चंडीगढ़ शब्द बना रहे.

एयरपोर्ट का टर्मिनल पंजाब के मोहाली जिले में है और पंजाब सरकार द्वारा इसका नाम 'मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट' रखना इसी बात का संकेत है. पंजाब और हरियाणा विधान सभाओं ने क्रमशः 2009 और 2010 में हवाईअड्डे का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर करने का प्रस्ताव पारित किया हुआ है.

पंजाब चुनाव में फ़ायदा उठाने की कोशिश

इस समय बादल ने अपने विज्ञापन अभियान के जरिए लोगों की इस भावनाओं को भुनाने का प्रबंध कर लिया। 'मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट' नाम उनके लिए इसलिए भी माफिक था कि वे इसे उपलब्धियों की सूची में गिनाकर आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका लाभ लेते.

पहले से ही इस तरह के विज्ञापन दिए जा रहे हैं जिसमें एयरपोर्ट को विश्व का सबसे अच्छा एयरपोर्ट बताया जा रहा है और इसका श्रेय बादल और उनके उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल को दिया जा रहा है और बादल ने इसका प्रदर्शन भी कर दिया.  

मोहाली से यूएई की सीधी उड़ान को उन्होंने चिरस्मरणीय मंगल दिवस बताते हुए दावा किया कि चंडीगढ़ को हब कनैक्टिविटी के रूप में विकसित किया जाएगा जिससे विश्वभर में बसे पंजाबियों को बड़ी सुविधा होगी. उन्होंने यह भी कहा कि पंजाबियों के लिए यह बड़े गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब उत्तरी क्षेत्र में ऐसा पहला राज्य है जहां दो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे मोहाली और अमृतसर में हैं.

यह सब राज्य सरकार के अथक प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने यह भी कहा कि इस एयरपोर्ट के जरिए पंजाब में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा और पूरे विश्व के अग्रणी इंटरप्रेन्योर्स के लिए यह विनिवेश का केन्द्र होगा. 

सुखबीर बादल  राज्य के हवाई अड्डे से शारजाह के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की पहली इंटरनेशनल फ्लाइट से शारजाह गए हैं. उनके साथ सीआईआई के 18 और मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के 5 सदस्यों के अलावा मंत्रियों और अधिकारियों का दल भी गया है. पंजाब सरकार ने इस यात्रा को दुबई से कारोबारी रिश्ते मज़बूत करने के लिए उठाया गया कदम बताया है.

एयरपोर्ट का नया विवाद पंजाब के साथ-साथ पड़ोसी राज्य हरियाणा की राजनीति में भी ईंधन भरने का काम करेगा

इसकी कांग्रेस की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया हुई. कांग्रेस नेता रण सिंह मान ने अभय से इस मुद्दे पर मांफी मांगने को कहा. उन्होंने कहा कि इससे साबित होता है कि इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) हरियाणा के हितों को लेकर चिन्तित नहीं है.

चौटाला और बादल परिवारों की निकटता के बारे में हरियाणा के लोगों को मालुम है. लोग यह जानते हैं कि आईएनएलडी हमेशा अकालियों के साथ रही है, भले ही राज्य के हितों के खिलाफ कुछ होता रहे.

मान ने इस मुद्दे को हाइजेक करने के लिए बादल की भी निन्दा की है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस परियोजना के लिए बराबर का साझीदार होने के नाते हुड्डा सरकार के निर्णय का समर्थन करती है. इससे हरियाणा का चंडीगढ़ पर दावा मजबूत होता है. 

चंडीगढ़ के हस्तान्तरण के अनसुलझे मुद्दे की पृष्ठभूमि में पंजाब की राजनीति में यह हमेशा ही चर्चा का गरम विषय रहा है. एयरपोर्ट  का नया विवाद आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति के साथ-साथ पड़ोसी राज्य की राजनीति में और ईंधन भरने का काम करेगा.

First published: 23 September 2016, 7:44 IST
 
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