Home » इंडिया » controversy man VK Singh
 

वीकेएस यानी विवादों के सरताज

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:22 IST

पिछले दो दिनों से विदेश राज्य मंत्री और पूर्व आर्मी चीफ वीके सिंह सुर्खियों में हैं. पिछले चार सालों से वीके सिंह और विवादों का नाता गहरा होता जा रहा है.

गुरुवार को आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग ने वीके सिंह के खिलाफ संगीन आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में हलफनाफा दायर किया है. दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि वीके सिंह ने बाहरी कारणों के चलते रहस्यमयी तरीके से, दुर्भावनापूर्ण और मनमाने ढंग से सजा देने के लिए उनका प्रमोशन को रोकने की कोशिश की.

सुहाग के हलफनामे में कहा गया है कि 2012 में जनरल वीके सिंह ने आर्मी चीफ रहते हुए उन्हें प्रताड़ित किया ताकि वह आर्मी कमांडर न बन सकें. सुहाग का दावा है कि ये रक्षा मंत्रालय की जांच में भी साफ हो चुका है कि उन पर आरोप बेबुनियाद थे.

इससे पहले बुधवार को वीके सिंह की पत्नी भारती सिंह ने दिल्ली के एक शख्स के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए पुलिस में केस भी दर्ज करवाया है. सिंह का आरोप है कि वह व्यक्ति छेड़छाड़ कर तैयार की गई ऑडियो-वीडियो क्लिप के जरिये उनके पति को बदनाम करने के नाम पर उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है. ब्लैकमेल के जरिए उनसे दो करोड़ रुपये की जबरन वसूली करने का प्रयास कर रहा है.

ऐसा पहली बार नहीं जब वीके सिंह विवादों में घिरे हो. उनसे जुड़े विवादों पर एक नजर:

जन्मतिथि विवाद

2012 में  वीके सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके सेना के रिकॉर्ड में अपनी जन्मतिथि में सुधार करने की अपील की थी. आधिकारिक रिकार्ड के अनुसार वीके सिंह की जन्म तिथि 10 मई 1950 है जबकि सिंह का कहना था कि 10वीं के सर्टिफिकेट के अनुसार उनकी जन्मतिथि 10 मई 1951 है. 

उस समय कहा गया कि वीके सिंह 2013 तक सेना प्रमुख बने रहना चाहते थे. अगर सुप्रीम कोर्ट ने वीके सिंह की बात मान ली होती तो वे मई, 2012 की जगह साल 2013 में रिटायर होते. हालांकि फरवरी, 2012 में सिंह ने  अपनी याचिका को वापस ले ली. 

'राज्यसभा में चूहे-बिल्ली का खेल खेलते हैं सांसद'

वी के सिंह ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर एक बयान दिया था. सिंह ने अपने स्टेटस में लिखा, 'राज्यसभा में उपस्थित होना मेरे लिए एक आश्चर्य का अनुभव था. मेरा हमेशा से विश्वास था हमारे देश के उच्च सदन में ज्ञान, अनुभव, विवेक का समागम होता होगा और देश के प्रतिनिधि भारत के जटिल मुद्दों पर तर्क वितर्क कर समाधान ढूंढते होंगे. 

छुद्रता से दूर राजनीति से परे, राज्यसभा में राष्ट्रहित के सर्वोपरि होने की अपेक्षा की थी मैंने. परंतु मेरा यह विश्वास बुरी तरह से आहत हुआ. राज्यसभा के सदस्यों को चूहे बिल्ली की तरफ लड़ते देखा.'आगे उन्होंने लिखा कि, 'यह मेरे विश्वास के परे था कि वहां राज्यसभा में कुछ सदस्य उन्हीं चीजों की तरह व्यवहार कर रहे थे जिनसे हमें बचपन में बचने की सलाह दी जाती थी. ये सदस्य ऐसे ही हैं या राजनीति ने इन्हें ऐसा बना दिया है, इसका अनुमान आप ही लगा सकते हैं.'

'कुत्ते को पत्थर मार दिया तो क्या उसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी'

हरियाणा में दलित बच्चों को जलाकर मारे जाने की घटना के बाद कानून और व्यवस्था की विफलता के मामले को लेकर बीजेपी की सरकार निशाने पर थी. ऐसे में वी के सिंह ने एक आपत्तिजनक बयान देकर तूफान पैदा कर दिया. 

सिंह ने कहा, 'हर चीज के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं हो सकती. कहीं किसी ने कुत्ते को पत्थर मार दिया तो क्या उसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी.' उन्होंने यह बयान हरियाणा के सनपेड़ गांव में दो दलित बच्चों की हत्या को लेकर सरकार की विफलता के बारे में सवाल पूछे जाने पर दिया था. 

सिंह के इस असंवेदनशील बयान पर विपक्ष ने उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग करते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की किए जाने की मांग कर डाली. दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की थी.

'मुफ्त की शराब पीने आते हैं साहित्यकार'

10 सितंबर को दसवां विश्व हिंदी साहित्य सम्मेलन शुरू होने से पहले वीके सिंह ने एक और विवादास्पद बयान देकर बखेड़ा खड़ा कर दिया. विदेश राज्य मंत्री ने कहा, 'कुछ हिंदी साहित्यकार हिंदी सम्मेलन में सिर्फ शराब पीने के लिए आते थे.'हमेशा की तरह विवाद बढ़ता देख सिंह ने यह कहने में देर नहीं लगाई कि मीडिया ने उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है.उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि साहित्यकार अपनी किताबों पर लेखों को लेकर नशे में झगड़ते हैं. हिंदी सम्मेलन का आयोजन विदेश मंत्रालय ही करता है.

'प्रेस्टीट्यूट से क्या उम्मीद कर सकते हैं'

पश्चिम एशियाई देश यमन में गृह युद्ध भड़कने के बाद सरकार ने सिंह को वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने के मिशन का प्रभारी बनाया. सेना के अनुभवों की वजह से सिंह को यह जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने इसे बखूबी निभाया भी लेकिन अपनी आदत से मजबूर सिंह ऐसा बयान दे गए जिसने उनके सभी किए किराए पर पानी फेर दिया. 

7 अप्रैल को किए गए ट्वीट में सिंह ने लिखा, 'दोस्तों आप प्रेस्टीट्यूट्स से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं?' मीडिया के खिलाफ अपना भड़ास निकालते हुए उन्होंने पत्रकारों के लिए एक नया शब्द ईजाद किया 'प्रेस्टीट्यूट'. वह ऐसा पहले भी कर चुके थे. उनकी पार्टी बीजेपी ने भी सिंह के इस बयान से दूरी बना ली.

First published: 18 August 2016, 10:17 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी