Home » इंडिया » Cornered in Uttarakhand, Congress hits back at BJP over #HCUcrackdown
 

#एचसीयूः राष्ट्रपति के दर पर कांग्रेस मांगे अप्पा राव और स्मृति ईरानी की बलि

चारू कार्तिकेय | Updated on: 30 March 2016, 15:43 IST

देवभूमि उत्तराखंड में अपनी सरकार बचाने के हरसंभव प्रयास कर रही कांग्रेस ने मंगलवार को बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलने का फैसला कर ही लिया. विरोध के लिये इन्होंने रोहित वेमुला की आत्महत्या और उसके बाद हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के घटनाक्रम को मुख्य मुद्दा बनाया है.

लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने कल राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मिलकर उन्हें अपनी मांगों की एक लंबी सूची वाला ज्ञापन सौंपा.

इस प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के अलावा सांसद आनंद शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अजय माकन, रणदीप सिंह सुरजेवाला, राजीव सातव, आरपीएन सिंह, अशोक तंवर, राजकुमार वर्का, अरशद रिजवान और रोजी जाॅन शामिल थे.

लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने कल राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मिला

इस ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर की भूमिका निभाने वाले राष्ट्रपति का ध्यान ‘‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय और मोदी सरकार के कई मंत्रियों द्वारा विभिन्न परिसरों में छात्रों और अध्यापकों पर हो रहे अत्याचार और बुनियादी कानूनी अधिकारों के उल्लंघन, विशेषकर हैदराबाद विश्वविद्यालय की तरफ दिलवाना था. इसके अलावा इनका कहना था कि हैदराबाद में तो तेलंगाना की राज्य सरकार की मिलीभगत से ऐसा किया जा रहा है.

कांग्रेस का दावा है कि वाइस चांसलर पी अप्पा राव ने यह जानते हुए कि उनके खिलाफ एक एफआईआर लंबित है, 21 मार्च को दोबारा कार्य संभाला

पार्टी ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निरंतर आतंक का माहौल तैयार किया जा रहा है. इनका दावा है कि वाइस चांसलर पी अप्पा राव ने यह जानते हुए कि उनके खिलाफ एक एफआईआर लंबित है, 21 मार्च को दोबारा कार्य संभाला और ऐसे में छात्रों और शिक्षकों द्वारा किया गया उनका विरोध जायज बिल्कुल था. इस विरोध के जवाब में वीसी ने मंत्रालय में बैठे अपने आकाओं और अन्य मंत्रियों के बल पर योजनाबद्ध तरीके से प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिये दमनात्मक कार्रवाई का सहारा लिया.

इस ज्ञापन में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से निवेदन किया गया कि, विश्वविद्यालयों के संविधान के संरक्षक और विजिटर के रूप में अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए वे जांच होने तक वीसी को निलंबित करने के अलवा विश्वविद्यालय का तमाम नेतृत्व बदलें और साथ ही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बंडारू दत्तात्रेय के खिलाफ जांच सुनिश्चित करें. उनकी अन्य मांगे इस प्रकार थीं:

  • पुलिस को वाइस चांसलर के खिलाफ दायर मामलों की जांच में तेजी लानी चाहिये.

  • छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ दायर तमाम मामलों को तुरंत राज्यपाल, जो विश्वविद्यालय के कुलपति भी हैं, द्वारा तुरंत खारिज किया जाना चाहिये.

  • विश्वविद्यालय में सामान्य आवागमन स्थापित कर स्थिति को सामान्य बनाने की दिशा में पहल करनी चाहिये.

  • काम में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुसूचित जाति/जनजाति संशोधन अधिनियम 2016 की धारा 4 के तहत आपराधिक जांच की जानी चाहिये.

  • ईरानी और दत्तात्रेय के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और जांच पूरी होने तक उन्हें मंत्री पद से हटाया जाए.

  • पुराने वीसी सहित विश्वविद्यालय के तमाम नेतृत्व को बदला जाए और छात्रों और शिक्षकों से परामर्श लेते हुए नए नेतृत्व को चुना जाए.

  • कुलपति को यह सुनिश्चित करने के लिये कहा जाए कि रोहिथ वेमुला के परिवार को उचित मुआवजा मिलने के साथ ही उसके भाई को विश्वविद्यालय में नौकरी मिले.

  • केंद्र सरकार को तुरंत उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों के लिये एक भेदभाव विरोधी कानून तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ करनी चाहिये और इसे बजट सत्र के दूसरे हिस्से में प्रस्तुत करना चाहिये.
First published: 30 March 2016, 15:43 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

पिछली कहानी
अगली कहानी