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कोरोना संकट: देश के करोड़ों सरकारी कर्मचारियों को बड़ा झटका, अब डेढ़ साल तक नहीं बढ़ेगा DA

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 April 2020, 17:09 IST

Coronavirus: देश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच केंद्र सरकार के अंतर्गत काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है. COVID-19 के कहर के बीच केंग्र सरकार ने 1 जनवरी, 2020 से 1 जुलाई, 2021 के बीच मिलने वाले महंगाई भत्ते की दर को संशोधित नहीं करने का फैसला लिया है.

केंद्र की मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि महंगाई भत्ते का भुगतान मौजूदा दर यानि 17 फीसदी के हिसाब से किया जाता रहेगा. यहां तक कि 1 जुलाई, 2021 को महंगाई भत्ते में किए जाने वाले संशोधन के समय भी डेढ़ साल की इस अवधि के बकाए का भुगतान नहीं करने का फैसला लिया गया है. इसका नुकसान करोड़ों कर्मचारियों को होगा.

इस बाबत केंद्रीय वित्त मंत्रालय कार्यालय ने एक ज्ञापन जारी किया है. इसके अनुसार, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 1 जनवरी, 2020 से दिए जाने वाले महंगाई भत्ते तथा पेंशनभोगियों को महंगाई राहत की अतिरिक्त किश्त का भुगतान नहीं करने का फैसला किया है. इसके साथ ही 1 जुलाई, 2020 तथा 1 जनवरी, 2021 से दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की अतिरिक्त किश्तों को भी नहीं दिया जाएगा.

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हालांकि ये जरूर है कि महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का भुगतान मौजूदा दरों यानि 17 फीसदी के हिसाब से किया जाता रहेगा. जारी ज्ञापन में यह भी साफ-साफ स्पष्ट कर दिया गया है कि 1 जनवरी, 2020 से 30 जून, 2021 की अवधि के बीच का कोई बकाया कर्मचारियों को नहीं दिया जाएगा. य ह आदेश केंद्र सरकार के सारे कर्मचारियों तथा पेंशन का लाभ उठाने वाले भोगियों पर लागू होगा.

साल में दो बार होती है महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी

गौरतलब है कि हर कैलेंडर वर्ष में दो बार यानि 1 जनवरी तथा 1 जुलाई को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते की दर में बढ़ोतरी होती है. इस तरह सरकार के मौजूदा फैसले की जद में तीन संशोधन यानि 1 जनवरी, 2020; 1 जुलाई, 2020 और 1 जनवरी, 2021 आएंगे. इसका अस 48.34 लाख केंद्रीय कर्मचारियों तथा 65.26 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा. इस तरह फैसले का असर कुल एक करोड़ 13 लाख 60 हज़ार परिवारों पर पड़ेगा.

1.20 लाख करोड़ रुपये की होगी बचत

केंद्र सरकार के इस फैसले का बड़ा असर भी देखने को मिलेगा. केंद्र सरकार को इस फैसले से 37,350 करोड़ रुपये के बड़े रकम की बचत होगी. इसी तरह यदि राज्य सरकारें भी केंद्र सरकार का अनुसरण कर लें तो उन्हें 82,566 करोड़ रुपये की बचत होगी. यानि कि देश की सरकारों को इस फैसले से लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी. इस पैसे का इस्तेमाल कोरोना वायरस से जारी जंग में हो सकता है.

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First published: 23 April 2020, 17:09 IST
 
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