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महाराष्ट्र में लगातार बढ़ रही है मौतों की संख्या, अस्पताल लाये जाने वाले मृतकों का होगा कोरोना टेस्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 September 2020, 9:22 IST

Coronavirus: महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. राज्य में कोरोना वायरस से 29 हजार से ज्यादा मौतें हुई हैं. राज्य में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की हो रही मौतों के कारण शवों के अंतिम संस्कार करने में मुश्किलें खड़ी हो रही हैं. अब सरकार ने आदेश दिया है कि अस्पताल लाये गए शवों का रैपिड एंटीजन टेस्ट किया जाये ताकि इस बात की पुष्टि की जा सके कि मृत व्यक्ति को कोरोना संक्रमण था या नहीं. महाराष्ट्र सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर टीबी की जांच वाले टेस्ट TrueNat/CBNAAT की भी अनुमति दी है.

महाराष्ट्र में सोमवार तक 10 लाख से अधिक मामले और 29,114 से अधिक मौतें हुई हैं. मुंबई, पुणे और ठाणे में सबसे अधिक 8,109, 4,754 और 4,134 मौतें हुई हैं. अब 1,000 से अधिक मौतों वाले जिलों में जलगांव, नासिक और नागपुर शामिल हैं. महाराष्ट्र में शवगृह (Mortuaries) फुल चल रहे हैं. उदाहरण के लिए ससून जनरल हॉस्पिटल में प्रतिदिन औसतन 40-50 मौतें सामने आ रही हैं जबकि कम से कम 15 मृत लोगों को यहां रोज लाया जाता है.


नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में प्रतिदिन होने वाली 30-35 मौतों में से कम से कम पांच से 10 मृत लोगों को यहां लाया जाता है. अधिकारियों का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते प्रसार के कारण अब कोविड -19 की पुष्टि करने के लिए एक एंटीजन परीक्षण करने का निर्णय लिया गया है. चूंकि परिणाम एक घंटे के भीतर दिए जाते हैं, यह शवों के त्वरित निपटान में मदद कर सकता है.

21 अगस्त को जारी किए गए नए सर्कुलर में एंटीजन परीक्षणों में गलत रिपोर्ट आने को लेकर भी चिंता जताई है, जिससे शव परीक्षण करने के लिए फोरेंसिक हेल्थकेयर वर्कर मुश्किल में पड़ सकते हैं. अब तक ICMR के दिशा-निर्देशों और राज्य की सलाह के आधार पर ऑटोप्सी को बंद करने का संकेत दिया गया था.

इन दिशानिर्देशों के अनुसार कोरोना वायरस की मौत के मामलों में फोरेंसिक ऑटोप्सी तकनीकों को नहीं अपनाया जाना चाहिए. एक अस्पताल में मृत्यु और कोरोना वायरस संक्रमण के लिए चिकित्सा देखभाल के तहत पोस्टमॉर्टम की आवश्यकता नहीं होती है और मृत्यु के कारण के लिए आवश्यक प्रमाणीकरण उपचार करने वाले डॉक्टरों द्वारा किया जाता है.

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First published: 15 September 2020, 8:53 IST
 
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