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लॉकडाउन: रोजगार ख़त्म, गांव जाने लिए साधन नहीं, कम से कम जिंदा घर पहुंच जाएं

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 March 2020, 11:44 IST

कोरोना वायरस (coronavirus) के खिलाफ भारत ने 21 दिनों तक पूरे देश को बंद (lockdown) रखने का फैसला लिया है. भारत ही नहीं दुनियाभर का यही आलम है. इस लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर असंगठित सेक्टर पर पड़ने की संभावना है, जहां लोग रोज कमाकर अपना पेट भरते हैं. भारत की राजधानी दिल्ली में  ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं, जो दूसरे राज्यों से आकर मजदूरी करते हैं. लॉकडाउन की घोषणा के बाद सभी लोग अपने गांवों की ओर चल दिए हैं लेकिन परिवहन की कोई सुविधा न होने के कारण उन्हें पैदल ही अपने गांवों की ओर जाना पड़ रहा है.

ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज का कहना है कि 21 दिन के लॉकडाउन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर 9 लाख करोड़ का असर पड़ेगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसकी संभावना जताई है. अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती एक आर्थिक पैकेज की है. क्योंकि आने वाले कई दिनों तक कारोबार बंद रखने पड़ सकते हैं. बड़ी संख्या में लोग सामाजिक समारोह, जो पहले से तय थे, उन्हें रद्द कर रहे हैं. ज्यादातर कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह दी है. लेकिन मुश्किल असंगठित क्षेत्र की है. 

एक तस्वीर दिल्ली के गाजीपुर में भी दिखी, जहां उत्तर प्रदेश से आये कई मजदूर दिल्ली-गाजीपुर सीमा के पास कंधे पर सामान लादकर पैदल चलते दिखाई दिए. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार घर जा रही एक महिला कहती है. "हमारे पास  पैसा नहीं बचा है क्योंकि यहां अब कोई काम नहीं है हम क्या खायेंगे? अगर हम शहर नहीं छोड़ेंगे, तो हम भूखों मर जाएंगे." कोरोना की वजह से जब से दिल्ली-एनसीआर में काम-धंधे ठबंद हो चुके हैं. जो रोज कमाकर शाम को चूल्हा जलाते हैं, वो गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं.

 

पीएम मोदी के सम्बोधन के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने गांवों की ओर चल पड़े थे. 21 दिनों के कंप्लीट लॉकडाउन की घोषणा बाद तो लोगों की उम्मीद ही टूट गई. इस भीड़ में कई लोगों का कहना है ''अभी निकलेंगे, तो कम से कम जिंदा अपने गांव तक तो पहुंच जाएंगे. जब हालात सुधर जाएंगे, तो वापस आ जाएंगे''.

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First published: 26 March 2020, 11:44 IST
 
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