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अरुणाचल के हाइड्रो प्रोजेक्ट में घोटाले की आशंका, विजिलेंस जांच में किरण रिजिजू का नाम

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 December 2016, 15:16 IST
(फ़ाइल फोटो (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया))
QUICK PILL
नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NEEPCO) के मुख्य सतर्कता अधिकारी सतीश वर्मा की रिपोर्ट के बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू पर दबाव बढ़ रहा है.129 पेज की रिपोर्ट में हाइड्रो प्रोजेक्ट में घोटाले की आशंका ज़ाहिर की गई है, वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक ऑडियो जारी कर प्रधानमंत्री से सफ़ाई देने और किरण रिजिजू के इस्तीफ़े की मांग की है.   

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू, उनके कज़िन गोबोई रिजिजू और नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन के चेयममैन, प्रबंध निदेशक समेत कई अधिकारी भ्रष्टाचार के एक मामले में फंसते जा रहे हैं. यह खुलासा नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NEEPCO) के मुख्य सतर्कता अधिकारी सतीश वर्मा की 129 पेज की रिपोर्ट से हुआ है. उन्होंने यह रिपोर्ट तैयार करके सीबीआई, केंद्रीय सतर्कता आयोग और उर्जा मंत्रालय को इसी साल जुलाई में भेजी थी. हालांकि अभी तक कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई है. 

इस कथित घोटाले का खुलासा होने के बाद से कांग्रेस हमलावर हो गई है. पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू से इस्तीफ़े की मांग की है. सुरजेवाला ने यह भी कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पर व्यापक बयान देना चाहिए ताकि अरुणाचल में चल रही परियोजना में पारदर्शिता आ सके. अरुणाचल कांग्रेस भी शिकंजा कसने के मूड में है. 

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अरुणाचल के सबसे बड़े हाइड्रो प्रॉजेक्ट्स में से एक कामेंग हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रॉजेक्ट में भ्रष्टाचार हुआ है. इस परियोजना का निर्माण पश्चिमी अरुणाचल में किया जा रहा है जो कि किरण रिजिजू के  संसदीय क्षेत्र में आता है. नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NEEPCO) के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीसी) सतीश वर्मा ने अपनी 129 पेजों की रिपोर्ट में रिजिजू, उनके कज़िन गोबोई रिजिजू समेत कई अधिकारियों का ज़िक्र किया है. 

रिपोर्ट कहती है कि हाइड्रो प्रॉजेक्ट में फर्ज़ी बिल पर हुए भुगतान, फर्ज़ी कंपनियों के नाम पर भुगतान हुए. आशंका व्यक्त की गई है कि हेराफेरी की रक़म 450 करोड़ तक हो सकती है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि किरण रिजिजू ने प्रॉजेक्ट के ठेकेदार का फंड जारी करने के लिए 4 नवंबर 2015 को ऊर्जा मंत्रालय को चिट्ठी लिखी थी. गोबोई रिजिजू इसी प्रोजेक्ट में ठेकदार हैं लेकिन किरण रिजिजू ने कहा है कि उन्होंने किसी बड़े ठेकेदार के लिए नहीं बल्कि स्थानीय लोग जो प्रॉजेक्ट की चीजें सप्लाई कर रहे हैं, उनके लिए चिट्ठी लिखी थी.  

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार और उसके बाद कांग्रेस ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में एक ऑडियो टेप का ज़िक्र किया है. यह टेप सतीश वर्मा की 129 पेज की रिपोर्ट का हिस्सा है. इसमें गोबोई फंड जारी करने के लिए भैया (मंत्री) के नाम का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं. 

रिजिजू ने लांघी मर्यादा

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट के सिलसिले में जब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, 'मैंने पटेल इंजिनियरिंग (ठेकेदार) का फंड जारी करने के लिए उर्जा मंत्रालय को चिट्ठी लिखी थी. मगर मैंने यह चिट्ठी हाइड्रो परियोजना से जुड़े स्थानीय ठेकेदारों का अर्ज़ी पर लिखी थी. मुझे इसमें किसी घोटाले की जानकारी नहीं थी. अगर यह घोटाला है तो इसकी जांच होनी चाहिए और ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा मिलनी चाहिए. मैं पूरी तरह भ्रष्टाचार के विरुद्ध हूं'. 

हालांकि इसके अगले दिन किरण रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई को बयान दिए. इस बार उन्होंने कहा, 'ये ख़बर किसी ने बदमाशी करके प्लांट की है. हां, लेटर मैंने लिखा है पर उसमें ऐसा कुछ नहीं है. यह एक ग़ैरज़रूरी मुद्दा है'. 

इसके बाद रिजिजू ने मर्यादा की सीमा लांघते हुए कहा, 'ये जो न्यूज़ प्लांट कर रहे हैं, हमारे यहां आएंगे तो जूते खाएंगे. लोगों की सेवा करना करप्शन है?'

First published: 13 December 2016, 15:16 IST
 
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