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भ्रष्टाचार दरकिनार, तरक्की की राह पर दीपक सिंघल

पत्रिका ब्यूरो | Updated on: 26 July 2016, 13:46 IST
(पत्रिका)

यूं तो अमर सिंह मुलायम सिंह यादव के दिल से कभी निकले ही नहीं थे. तभी तो मुलायम सिंह यादव ने अमर सिंह को यूपी चुनाव से ठीक पहले संसद के उच्च सदन में भेजकर उनकी अहमियत बता दी है.

अमर सिंह की वापसी के बाद समाजवादी पार्टी पर एक बार फिर उनका दबदबा कायम हो रहा है. और ये बात उन्होंने अपने खास नौकरशाह दीपक सिंघल को उत्तर प्रदेश का मुख्य सचिव बनवाकर साबित की है. प्रदेश के 10 अखंड भ्रष्टों में दीपक सिंघल का नाम शुमार रहा है. भ्रष्टाचार की डीलिंग से जुड़ा अमर सिंह और दीपक सिंघल की बातचीत का टेप सुर्खियों में रहा है. उस बातचीत के तीन टेप हैं.

कौमी एकता दल के सपा में विलय को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल सिंह यादव पर नाराजगी जताई थी. जिसके बाद माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी के सपा में विलय को रद्द कर दिया गया था. दरअसल अखिलेश ने ऐसा करके अपनी साफ सुथरी छवि लोगों के सामने प्रस्तुत की थी. लेकिन तमाम आरोपों से घिरे दीपक सिंघल को उत्तर प्रदेश का मुख्य सचिव नियुक्त करके उन्होंने कई सवालों को खड़ा कर दिया है.

दीपक सिंघल उत्तर प्रदेश के 48वें मुख्य सचिव नियुक्त

उत्तर प्रदेश के 18 वरिष्ठ आईएएस अफसरों की वरिष्ठता को नजरअंदाज कर दीपक सिंघल को उत्तर प्रदेश का 48वां मुख्य सचिव बनाया गया है. इसके पहले आलोक रंजन मुख्य सचिव थे. आलोक रंजन को रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन दिया गया था.

एक्सटेंशन की अवधि बीत जाने के बाद भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उन्हें छोड़ना नहीं चाहते थे. अखिलेश ने उन्हें अपना सलाहकार बना कर उन्हें लाल बत्ती दे दी और मंत्री का दर्जा दे दिया. इधर, दीपक सिंघल की भी ये खास बात है कि वे अखिलेश, मुलायम, शिवपाल, अमर सबके प्रिय हैं.

10 महाभ्रष्टों में से तीन नौकरशाह अखंड प्रताप सिंह, नीरा यादव और दीपक सिंघल समाजवादी पार्टी के खास पसंद साबित हुए. जिन्हें सपा के विभिन्न कार्यकाल में प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया गया.

फिर सुर्खियों में अमर-सिंघल टेपकांड

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने चीनी मिल घोटाले में सिंघल के खिलाफ जांच कराई थी. बरेली में तैनाती के दौरान दीपक सिंघल चीनी मिल घोटाले में फंसे थे. कल्याण सिंह के कार्यकाल में जांच शुरू हुई और सरकार बदली तो जांच खत्म हो गई. बीएसपी सरकार आई तो जांच दोबारा शुरू हुई लेकिन सिंघल की पहुंच के आगे वह जांच भी रुक गई. फिर अमर सिंह से पैसे के लेन देन के तीन टेप लीक हुए और दीपक सिंघल फिर सुर्खियों में आ गए.

सिंघल और अमर सिंह की बातचीत के पहले टेप में दीपक सिंघल और अमर सिंह के बीच किसी शुगर डील के साथ-साथ स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) के टेंडर डॉक्युमेंट और उसकी पॉलिसी और भूमि आवंटन में मनमाफिक बदलाव की खुली चर्चा हो रही है.

दूसरे टेप में गैस की डील, आईएएस संजीव शरण के साथ नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हिस्सेदारी और किसी शासकीय मामले में मुख्य सचिव पर बाहरी दवाब डलवाने जैसी बातें हो रही हैं. वहीं तीसरे टेप में अमर सिंह दीपक सिंघल को आरडीए वाले देवेंद्र कुमार को 96.5 लाख रुपए पहुंचाने का निर्देश देते साफ-साफ सुने जा सकते हैं. कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि सिंघल की नियुक्ति का मतलब सपा सरकार में अमर सिंह का दबदबा बढ़ रहा है.

ब्लैक लिस्टेड कंपनी को बनाया व्हाइट

दीपक सिंघल पर अपने रिश्तेदार की ब्लैक लिस्टेड कंपनी को काम देने का भी आरोप रहा है. सिंघल जब ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव थे, तब अपने रिश्तेदार की ब्लैक लिस्टेड कंपनी को बहाल कर काम देना शुरू कर दिया था. सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर, अमर सिंह-दीपक सिंघल टेप प्रकरण की जांच की मांग अर्से से करती रही हैं.

यहां तक तक कि इस मामले में नियुक्ति विभाग के उप सचिव अनिल कुमार सिंह ने नूतन ठाकुर से 13 नवम्बर 2014 को ही शपथ पत्र दाखिल करने को कहा था. 26 फरवरी को शपथपत्र दाखिल भी कर दिया गया था, लेकिन जांच का कुछ नहीं हुआ और सिंघल को तरक्की मिलती चली गई और आखिरकार वे प्रदेश के मुख्य सचिव भी बना दिए गए.

18 अफसरों को नजरअंदाज कर सिंघल बने मुख्य सचिव

1982 बैच के आईएएस दीपक सिंघल को दनादन तरक्की मिली है. उन्होंने अपने से सीनियर 18 आईएएस अफसरों को पीछे छोड़कर मुख्य सचिव की कुर्सी हासिल की है. सिंघल से सीनियर अफसरों में 1979 बैच के आईएएस अफसर राजस्व परिषद के चेयरमैन अनिल कुमार गुप्ता, 1980 बैच के आईएएस शैलेश कृष्ण, 1981 बैच के आईएएस कुंवर फतेह बहादुर और 1982 बैच के आईएएस कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) प्रवीर कुमार शामिल हैं. दीपक सिंघल से सीनियर और भी 14 आईएएस अफसर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं.

कई और भ्रष्ट अफसरों पर रही है सपा की कृपा

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव अखंड प्रताप सिंह, नीरा यादव और मौजूदा मुख्य सचिव दीपक सिंघल के साथ-साथ कई और आईएएस भ्रष्टाचार के संदेह में हैं. इनमें एनआरएचएम घोटाले के प्रमुख अभियुक्त प्रदीप शुक्ला जैसे वरिष्ठ नौकरशाह भी हैं. जो अभी हाल तक जेल में थे, समाजवादी सरकार की कृपा मिलने पर जेल से छूट कर आए हैं और आते ही तैनाती पा गए हैं. मुख्यमंत्री अखिलेश के पसंदीदा नौकरशाह रहे राजीव कुमार भी उसी भ्रष्ट-धारा के हैं. सीबीआई अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा भी सुनाई थी.

First published: 26 July 2016, 13:46 IST
 
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