Home » इंडिया » Countdown to Punjab polls : AAP stands at crossroads of Punjab politics
 

'आप' की नाव पंजाब में फंसी मंझधार में

राजीव खन्ना | Updated on: 1 July 2016, 7:44 IST
QUICK PILL
  • शानदार शुरुआत के बाद आम आदमी पार्टी अब पंजाब में चौराहे पर दिखाई दे रही है. हालांकि पार्टी समाज के सभी तबकों में अपनी पहुंच बनाने में सफल रही है लेकिन उसे अब अपनी ही कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. 
  • पार्टी अभी तक अपने मुख्य चेहरे को सामने नहीं रख पाई है. पार्टी नेता चुनाव जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है. हालांकि पार्टी नेताओं का बार-बार कहना है कि कोई पंजाबी ही राज्य का मुख्यमंत्री होगा.

शानदार शुरुआत के बाद आम आदमी पार्टी अब पंजाब में चौराहे पर दिखाई दे रही है. हालांकि पार्टी समाज के सभी तबकों में अपनी पहुंच बनाने में सफल रही है लेकिन उसे अब अपनी ही कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. 

कुछ विश्लेषकों की माने तो आम आदमी पार्टी की इस समस्या की वजह उम्मीद से अधिक भरोसा है. पार्टी अब किसी वैसे व्यक्ति की तलाश कर रही है जो राज्य में उसकी कमान संभाल सके.

पार्टी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी यही समस्या है. वह अभी तक अपने मुख्य चेहरे को सामने नहीं रख पाई है. पार्टी नेता चुनाव जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं. हालांकि पार्टी नेताओं का बार-बार कहना है कि कोई पंजाबी ही राज्य का मुख्यमंत्री होगा. 

पहले तो यह कहा जा रहा था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पंजाब के मुख्यमंत्री हो सकते हैं लेकिन अब यह कहा जा रहा है कि पंजाब का मुख्यमंत्री कोई पंजाबी ही होगा. ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि वह व्यक्ति सिख होगा या गैर सिख. यह सवाल इस लिहाज से भी अहम है कि पंजाब में सिख आबादी बहुसंख्यक है. 

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो नेतृत्व का मामला केवल मुख्यमंत्री के चेहरे तक सीमित नहीं है बल्कि यह विधानसभा क्षेत्रों में भी मुख्य मुद्दा बना हुआ है. जमीन पर आप की लहर है लेकिन यह साफ नहीं है कि किस तरह के उम्मीदवारों को टिकट मिलेगा.

यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व उम्मीदवारों की घोषणा में देरी कर रहा है. पार्टी ने इस मामले को फरवरी में यह कहकर टाल दिया था कि वह सबसे पहले अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगी.

दूसरा बड़ा सवाल छवि का है. लोगों के बीच यह छवि बनती जा रही है कि क्या आप दूसरे दलों से आए नेताओं का डंपिंग ग्राउंड बनकर रह जाएगी? यह सवाल सभी पूछ रहे हैं. अन्य दलों के नेता, सेवानिवृत्त नौकरशाह, पुलिस अधिकारी से लेकर पत्रकार तक आप से जुड़ रहे हैं. कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा, लेफ्टिनेंट कर्नल सी डी कंबोज और अमन अरोड़ा के आप में शामिल होने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, 'जिस तरह से हमारे खारिज नेताओं को आप में जगह मिल रही है, उसे देखकर कह सकते हैं कि आप कांग्रेसी नेताओं का डंपिंग ग्राउंड बनता जा रहा है.'

लोगों के बीच यह छवि बनती जा रही है कि आप दूसरे दलों से आए नेताओं का डंपिंग ग्राउंड बनकर रह जाएगी

जवाबी हमला करते हुए आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा, 'हां यह कूड़ेदान है लेकिन उन ईमानदार और मृतप्राय पड़े कांग्रेसी नेताओं का जिन्हें नजरअंदाज कर दिया गया.' लेकिन इन सबके बीच सवाल यह है कि आप में ऐसे कितने नेता शामिल होंगे. या फिर इनमें से कितनों को टिकट दिया जा सकता है या कितने को पार्टी में शामिल किया जा सकता है.

आप के नेता एचएस शेरगिल ने कहा, 'जो भी हमारी पार्टी में शामिल हो रहा है, वह बिना किसी स्वार्थ के ऐसा कर रहा है. कोई इस उम्मीद में पार्टी में शामिल नहीं हो रहा कि उसे यहां पर टिकट मिलेगा.'

पार्टी में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने के दौरान आप ने अप्रैल महीने में सेंट्रल पैनल का गठन किया था. यह कमेटी किसी के पार्टी में शामिल होने के बारे में फैसला करती है. संजय सिंह ने कहा कि यह फैसला पार्टी में शामिल होने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए किया गया.

पार्टी ने चुनाव प्रचार समिति भी बनाई है जो चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की समीक्षा करेगी. बूथ स्तर के कार्यकर्ता पार्टी के संभावित उम्मीदवारों के बारे में पार्टी को बताएंगे. इसके बाद पांच नामों को पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी को भेजा जाएगा और फिर पीएसी उम्मीदवारी पर आखिरी फैसला करेगी.

शेरगिल ने कैच को बताया, 'किसी भी दागी या भ्रष्टाचारी व्यक्ति को टिकट नहीं मिलेगा. अगर कोई ऐसा व्यक्ति टिकट लेने में सफल रहता है तो फिर उसकी टिकट वापस भी ली जा सकती है.'

पार्टी के पंजाब के चार सांसदों में से दो डॉ. धर्मवीर गांधी और हरिंदर सिंह खालसा अभी भी पार्टी से निलंबित हैं

शुरुआती दिनों में आप के साथ और फिर बाद में स्वराज अभियान से जुड़े प्रोफेसर मंजीत सिंह बताते हैं, 'मसला यह है कि आप किस तरह की राजनीति कर रही है. यह वैसी पार्टी है जहां नेताओं को आगे बढ़ने नहीं दिया जाता है. प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के मामले में ऐसा हो चुका है. उनकी रणनीति केजरीवाल के ईद-गिर्द आभामंडल बनाने की है. उनके बाद कोई मायने नहीं रखता. किसी के विद्रोह से भी कोई फर्क नहीं पड़ता.'

सिंह ने कहा, 'उनकी राजनीतिक चमचागिरी और अनिश्चितता पर टिकी है. यह राजनीति वास्तविक अर्थों में कॉरपोरेट मॉडल पर आधारित है जहां सब कुछ पर्दे के पीछे तय होता है. पूरा ध्यान चीजों को मैनेज करने, बजट और लाभ कमाने पर होता है. यह बताता है कि कैसे दिल्ली में विज्ञापन पर 526 करोड़ रुपये खर्च किए गए.'

साथ ही कुछ अन्य मामले भी है. पार्टी के पंजाब के चार सांसदों में से दो डॉ. धर्मवीर गांधी और हरिंदर सिंह खालसा अभी भी पार्टी से निलंबित हैं और पार्टी को इस बारे में लोगों को जवाब देना होगा. यह सभी निलंबित नेता पंजाब में बाहरी नेतृत्व थोपे जाने के खिलाफ बोलते रहे हैं. आप के आंतरिक सूत्रों की माने तो पार्टी ने इन दोनों सांसदों से दूरी बना ली है.

शेरगिल को हालांकि लगता है कि पार्टी को राज्य में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि विपक्षी दल आप को राजनीति से बाहर रखने के लिए हर दिन नए स्तर पर जाकर हमला कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, 'कीचड़ उछालने से लेकर ताकत की मदद से वह सब कुछ कर सकते हैं.' विश्लेषकों की माने तो आने वाले दिनों में इसमें बढ़ोतरी ही होने की संभावना है.

First published: 1 July 2016, 7:44 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी