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नाबालिग गर्भवती को कोर्ट ने दी गर्भपात की इजाजत

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 May 2016, 12:50 IST
(एजेंसी)

पिता के अमानवीय कृत्यों से गर्भवती हुई एक 16 साल की नाबालिग लड़की को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने गर्भपात की इजाजत दी है.

मामले में लड़की का पिता आरोपी है और उस पर पास्को एक्ट की धाराओं के तहत मामला चल रहा है. कोर्ट ने इंदौर के एमवाय अस्पताल को नाबालिग के गर्भपात का आदेश दिया है.

इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस पीके जायसवाल ने शनिवार को सुरक्षित रखा फैसला सुनाया. फैसले से पूर्व कोर्ट ने गर्भवती नाबालिग की जांच भी कराई थी. यह मामला इंदौर के बड़वाह क्षेत्र का है. यहां रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी लड़की के साथ कई बार रेप किया था. उसकी पत्नी अपने पति के व्यवहार से तंग आकर पिछले 12 सालों से अलग रह रही है.

इस मामले में पुलिस ने बताया कि आरोपी ने अपनी बेटी के साथ कई दिनों तक रेप किया, जिससे नाबालिग गर्भवती हो गई. गर्भधारण के बाद यह बात लड़की के ताऊ को पता चली तो उन्होंने इस मामले में नाबालिग के पिता के खिलाफ 17 अप्रैल को बड़वाह थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई.

कोर्ट में बच्ची के ताऊ की ओर से अधिवक्ता निलेश दवे ने हाई कोर्ट में टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत एक याचिका दायर की. इस याचिका में कहा गया कि बच्ची को इसलिए गर्भपात की अनुमति दी जाए, क्योंकि उसने बच्चे को जन्म दिया तो यह दोनों की जान और भविष्य के ठीक नहीं होगा. 

याचिका पर गौर करते हुए कोर्ट ने एमवाय अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच करवाकर रिपोर्ट मांगी कि क्या पीड़िता को गर्भपात से कोई खतरा तो नहीं. डॉक्टरों की टीम ने इस मामले में जांच करके अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट भेज दी. 

गुरुवार को हुई सुनवाई में पीड़िता के अधिवक्ता दवे ने तर्क दिया कि पीड़िता को 13 सप्ताह, चार दिन का गर्भ है. चिकित्सा विज्ञान के मुताबिक 20 सप्ताह की अवधि तक गर्भपात कराने में कोई खतरा नहीं है और गर्भपात कराया जा सकता है. पीड़िता के वकील के दलील से अपनी सहमति जताते हुए कोर्ट ने नाबालिग को गर्भपात की इजाजत दे दी.

First published: 29 May 2016, 12:50 IST
 
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