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भारत ने कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की कवायद की तेज, ICMR और भारत बायोटेक ने मिलाया हाथ

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 May 2020, 10:10 IST

Corona Virus Vaccine: कोरोना वायरस (coronavirus) ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है. बिना दवा और वैक्सीन (vaccine) के चलते ये समस्या और भी विकराल बनी हुई है. पूरी दुनिया में कोविड-19 (covid-19) की दवाई (medicine) और वैक्सीन बनाने की कोशिश की जा रही है. भारत (India) भी इसमें लगा हुआ है अब भारत ने कोरोना वायरस की वैक्सीन (coronavirus vaccine) बनाने की कवायद तेज कर दी है.

इसके लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोविड-19 की पूर्ण स्वदेशी वैक्सीन विकसित करने के लिए भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (BBIL) के साथ मिलाया है. एक बयान में कहा गया है कि वैक्सीन का विकास आईसीएमआर के पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) में अलग किए गए वायरस के 'उप-प्रकार' का इस्तेमाल कर किया जएगा.


जिसके लिए 'उप-प्रकार को एनआईवी से सफलतापूर्वक बीबीआईएल भेज दिया गया है. स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई ने अपने एक बयान में कहा है कि, 'दो साझेदारों के बीच टीके के विकास पर काम शुरू हो चुका है. आईसीएमआर-एनआईवी टीके के विकास के लिए बीबीआईएल को सतत मदद उपलब्ध कराएगा.'

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वहीं आईसीएमआर ने अपने एक ट्वीट में कहा कि, 'दोनों सहयोगियों के बीच वैक्सीन विकसित करने को लेकर काम शुरू हो गया है. इस प्रक्रिया में आईसीएमआर-एनआईवी की ओर से बीबीआईएल को लगातार सपोर्ट दिया जाता रहेगा. वैक्सीन डिवेलपमेंट, ऐनिमल स्टडी और क्लिनिकल ट्रायल को तेज करने के लिए आईसीएमआर और बीबीआईएल तेजी से अप्रूवल लेते रहेंगे.'

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वहीं, भारत बायोटेक ने भी अपने एक बयान में कहा है कि इस प्रोजेक्ट के तहत लैब में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी तैयार की जाएंगी, जो कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में बेहद कारगर साबित होंगी. इसके तहत स्वस्थ हो चुके कोरोना संक्रमित मरीजों से एंटीबॉडी ली जाएंगी. आमतौर पर एक सप्ताह के बाद स्वस्थ हो चुके व्यक्तित के रक्त में ये एंटीबॉडी बनती हैं. इस बयान में कहा गया है कि, उत्तम गुणवत्ता की एंटीबॉडी लेकर प्रयोगशाला में उनके जीन के क्लोन तैयार किए जाएंगे.

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इस प्रकार ये एंटीबॉडी इस बीमारी से लड़ने के लिए एक बेहतर दवा के रूप में कार्य करेगी. बता दें कि यह उपचार प्लाज्मा थैरेपी से दो कदम आगे की प्रक्रिया है. एक बार सफल होने पर लैब में बड़े पैमाने पर एंटीबॉडी तैयार की जा सकती हैं. जबकि प्लाज्मा थैरेपी में प्लाज्मा की ज्यादा मात्रा में उपलब्धता बड़ी मुसीबत है.

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First published: 10 May 2020, 10:10 IST
 
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