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जी हां! सार्क देशों में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने में सबसे आगे रहा है पाकिस्तान

अभिषेक पराशर | Updated on: 27 January 2016, 13:31 IST
QUICK PILL
  • दक्षिण एशियाई देशों में पाकिस्तान एकमात्र मुल्क रहा है जो करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआई) में अपनी स्थिति सुधारने में सफल रहा है. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने में पाकिस्तान की स्थिति भारत से ज्यादा मजबूत दिखाई देती है. 
  • उत्तर कोरिया और सोमालिया सबसे भ्रष्ट देश बने हुए हैं. दोनों देशों का स्कोर महज 8 प्वाइंट रहा है. पिछले चार सालों में लीबिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, स्पेन और तुर्की में भ्रष्टाचार बढ़ा है और इस वजह से इनकी सीपीआई रैंकिंग बदतर हुई है.

दक्षिण एशियाई देशों में पाकिस्तान को लेकर एक अलग तरह की छवि सामने आती है. आम तौर पर पाकिस्तान को विफल कानून-व्यवस्था वाले देश के तौर पर देखा जाता है और इस वजह से आतंक और भ्रष्टाचार के खिलाफ पाकिस्तान की कोशिशों पर कोई भरोसा नहीं कर पाता. हालांकि आंकड़ों में पाकिस्तान वैसा नजर नहीं आता है जैसी उसके बारे में धारणा बनी हुई है.

दक्षिण एशियाई देशों में पाकिस्तान एकमात्र मुल्क रहा है जो करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआई) में अपनी स्थिति सुधारने में सफल रहा है. यह निष्कर्ष प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांपसरेंसी इंटरनेशनल के एक सर्वेक्षण से सामने आए हैं. इस रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने में पाकिस्तान की स्थिति भारत से ज्यादा मजबूत दिखाई देती है. 

अन्य चार देशों भारत, श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश की सीपीआई रैंकिंग 2014 की रैकिंग के बराबर या उससे कम रही. वहीं 2015 में पाकिस्तान की सीपीआई रैकिंग में सुधार हुआ है. ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने बुधवार को सीपीआई 2015 की रिपोर्ट जारी कर दी है.

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल पाकिस्तान के चेयरमैन सोहैल मुजफ्फर ने कहा कि पाकिस्तान का सीपीआई स्कोर एक और अंक बढ़कर 30 हो चुका है और इस मजबूती की वजह से पाकिस्तान की रैंकिंग में तीन पायदान की मजबूती आई है.

मुजफ्फर ने कहा, 'पाकिस्तान को और अधिक बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए था और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाकर हम इस लक्ष्य को हासिल कर सकते थे.' उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार ट्रांसपैरेंसी पाकिस्तान की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करेगी और इससे आने वाले भविष्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ पाकिस्तान की लड़ाई और तेज होगी.

2015 की बड़ी चुनाैती रहा भ्रष्टाचार

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के चेयरमैन जोस उगाज ने कहा, '2015 की रिपोर्ट यह बताती है कि भ्रष्टाचार अभी दुनिया के लिए सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है. लेकिन 2015 ऐसा साल रहा जब लोगों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया. दुनिया भर के देशों में लोगों ने सत्ता प्रतिष्ठान को यह चेताने की कोशिश की कि अब भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.'

ब्राजील के सीपीआई इंडेक्स में 5 अंकों की गिरावट आई है और यह 7 पायदान नीचे घिसककर 76वें पायदान पर जा चुका है

सीपीआई इंडेक्स में 168 देशों को शामिल किया गया है और यह रिपोर्ट इन देशों में भ्रष्टाचार की छवि को बयां करती है. 2015 की रिपोर्ट में दो तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 50 से कम है. इंडेक्स की रेटिंग 0-100 के बीच होती है. 100 स्कोर वाले देश को पूरी तरह से भ्रष्टाचार मुक्त माना जाता है जबकि 0 स्कोर वाले देश को सर्वाधिक भ्रष्ट देश माना जाता रहा है.

सबसे बड़ा झटका ब्राजील को लगा है. ब्राजील के सीपीआई इंडेक्स में 5 अंकों की गिरावट आई है और यह देशों की सूची में 7 पायदान नीचे घिसककर 76वें पायदान पर जा चुका है.

पेट्रोब्रास घोटाले के खिलाफ 2015 में ब्राजील के लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था. बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद ही इस मामले के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई.

वहीं डेनमार्क लगातार दूसरे साल भी टॉप पर बना हुआ है. वहीं उत्तर कोरिया और सोमालिया सबसे भ्रष्ट देश बने हुए हैं. दोनों देशों का स्कोर महज 8 प्वाइंट रहा है. पिछले चार सालों में लीबिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, स्पेन और तुर्की में भ्रष्टाचार बढ़ा है और इस वजह से इनकी सीपीआई रैंकिंग बदतर हुई है.

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में ग्रीस, सेनेगल और ब्रिटेन ने जबरदस्त मुहिम छेड़ रखी है और इनकी सीपीआई रैंकिंग में सुधार हुआ है. 

First published: 27 January 2016, 13:31 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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