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कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर पशोपेश में सीपीएम

रजत रॉय | Updated on: 11 February 2016, 22:55 IST

कुछ महीने बाद पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के केंद्रीय पोलित ब्यूरो और पश्चिम बंगाल राज्य समिति के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.

अब बंगाल में राज्य समिति की बैठक में सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने हिस्सा लेने का फैसला किया है. सामान्यत: सीपीएम की राज्य समिति की बैठक में पोलित ब्यूरो का केवल एक सदस्य हिस्सा लेता है. दो या उससे ज्यादा सदस्य तभी राज्य समिति की बैठक में हिस्सा लेते हैं जब कठिन राजनीतिक हालात हो जाते हैं.

दो दिनों चलने वाली बंगाल राज्य समिति की बैठक कोलकाता में होने वाली है. इसके बाद दिल्ली में पोलित ब्यूरो की बैठक होगी जिसमें सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कांग्रेस के साथ गठबंधन पर अंतिम निर्णय होगा.

नाम ना छापने की शर्त पर बंगाल से आने वाले पोलित ब्यूरो के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया, 'तृणमूल के खिलाफ लड़ने से पहले हमें पार्टी के नेताओं को समझाना होगा. केरल और आंध्र प्रदेश से आने वाले पोलित ब्यूरो के सदस्य बंगाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन खिलाफ हैं.' उन्होंने कहा कि गठबंधन के मसले में पार्टी में गहरे मतभेद हैं.

सीपीएम पोलित ब्यूरो की बैठक में कांग्रेस के साथ गठबंधन पर अंतिम निर्णय होगा

प्रकाश करात ने कुछ दिनों पहले ऑन द रिकॉर्ड बयान देते हुए कहा था कि केंद्रीय समिति पार्टी की विचारधारा को ध्यान में रखते हुए फैसला लेगी. पिछले पार्टी कांग्रेस में सीपीएम ने यह प्रस्ताव पारित किया था कि वह जन गोलबंदी सुनिश्चित करने के लिए लोकतांत्रिक ताकतों को एक मंच पर लाएंगे लेकिन उन्होंने यह बिलकुल नहीं कहा कि इसमें कांग्रेस को बतौर पार्टी शामिल किया जाए.

हालांकि, बंगाल सीपीएम के नेता एक दूसरी दिशा में काम कर रहे हैं जिसे पार्टी कांग्रेस की मान्यता मिली हुई है. इसके मुताबिक राज्य समिति के पास चुनाव के समय अपनी रणनीति तय करने के मामले में पर्याप्त आजादी होगी.

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बंगाल से आने वाले पोलित ब्यूरो के अन्य सदस्य कहते हैं जब ज्योति बसु को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव आया था तो यह पोलित ब्यूरो में गिर गया था. बंगाल राज्य समिति इस मुद्दे पर विभाजित थी. राज्य समिति के अधिकांश सदस्य इस प्रस्ताव के खिलाफ थे. इस बार राज्य समिति में सहमति नहीं है.

पार्टी के दक्षिण भारतीय नेता गठबंधन के प्रस्ताव के खिलाफ हैं. दक्षिण के नेता पिछली पार्टी कांग्रेस का हवाला दे रहे हैं जिसमें पार्टी ने 'कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं' किए जाने की नीति पर मुहर लगाई थी. इन नेताओं का मानना है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के फैसले से केरल, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पांडिचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी की छवि पर उल्टा असर पड़ेगा.

सीपीएम केरल में एलडीएफ का नेतृत्व करती है जो सत्ताधारी कांग्रेस के खिलाफ लड़ेगी. केरल के सीपीएम नेताओं का मानना है कि बंगाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन केरल में उनके चुनावी अभियान को पटरी से उतार सकता है. सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य एसआर पिल्लई ने केरल राज्य समिति के नेताओं के साथ हुई बैठकों में पार्टी लाइन से हटने के किसी भी प्रयास के विरोध का संकल्प जताया है.

सीपीएम-कांग्रेस वास्तव में गठबंधन चाहती हैं लेकिन दोनों पार्टियां पहले गठबंधन का प्रस्ताव नहीं देना चाहती

प्रकाश करात ने खुद कांग्रेस के साथ गठबंधन के विचार का विरोध किया है. उनके जैसे लोग पोलित ब्यूरो में बहुमत में है. ऐसे में बंगाल के वामपंथी नेताओं के लिए दक्षिणी भारत के वामपंथी नेताओं को बात को नजरअंदाज आसान नहीं होगा.

बंगाल से आने वाले केंद्रीय समिति के सदस्य कहते हैं, 'क्या सब कुछ पार्टी कांग्रेस के दस्तावेजों में लिखा है? क्या इससे पहले भी इस तरह की स्थितियां बनी हैं? हमें यहां नहीं भूलना चाहिए यूपीए-1 से समर्थन वापस लिए जाने का फैसला पार्टी लाइन के मुताबिक था लेकिन इसने टीएमसी और कांग्रेस को नजदीक आने का मौका दिया जिससे हमें चुनाव में नुकसान उठान पड़ा. '

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कांग्रेस और सीपीएम दोनों एक ही तरह की राजनीतिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं. दोनों पार्टियां वास्तव में गठबंधन चाहती हैं लेकिन कोई भी पहले गठबंधन का प्रस्ताव नहीं देना चाहती. दोनों को डर है कि प्रस्ताव अस्वीकार होने पर पार्टी की छवि पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.

राज्य कांग्रेस के नेता अब्दुल मन्नान के अनुसार कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सीपीएम के पोलित ब्यूरो के निर्णय के बाद ही कोई फैसला लेगा. हाल में ही मन्नान गठबंधन के मसले पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात कर चुके हैं.

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राज्य में कांग्रेसी नेताओं के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने लगातार शीर्ष नेतृत्व पर यह कहकर दबाव डाला है कि जमीनी कार्यकर्ताओं की इच्छा गठबंधन की है.

सीपीएम के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्रा राज्य का दौरा कर रहे हैं और अपनी रैलियों में कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में तर्क दे रहे हैं. सूर्यकांत मिश्रा के अनुसार, भले ही दोनों दलों के नेता इंतजार कर रहे हैं लेकिन जमीनी स्तर पर लोग गठबंधन के लिए तैयार हैं.

First published: 11 February 2016, 22:55 IST
 
रजत रॉय

Journalist based out of Kolkata.

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