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एनसीआरबी के आंकड़े: दलितों और महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश में हालात बदतर हुए

अभिषेक पराशर | Updated on: 31 August 2016, 8:43 IST
QUICK PILL
  • एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक 2014 के मुकाबले 2015 में देश भर में दलितों और महिलाओं के खिलाफ होने वाले आपराधिक मामलों में गिरावट आई है.
  • गुजरात में चल रहे दलित आंदोलन ने देश के सामने दलितों और पिछड़ों पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है.
  • 2015 में उत्तर प्रदेश दलितों और महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक राज्य रहा. 2015 में उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के 10.9 फीसदी जबकि दलित उत्पीड़न के 18.6 फीसदी मामले दर्ज हुए. 

गुजरात के उना में दलितों के साथ हुए अत्याचार का मुद्दा अब केवल राज्य में चल रहे सामाजिक आंदोलन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी धमक राष्ट्रीय राजनीति में भी सुनाई दे रही है. 

पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव में दलों की नजर दलित वोट बैंक पर हैं. और यही वजह रही जब भाजपा शासित गुजरात के उना में गौरक्षा के नाम पर दलितों के साथ हुई गुंडागिरी का मामला सामने आया तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, गुजरात में राजनीतिक जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी और देश की सबसे बड़ी दलित नेता मायावती ने संसद के भीतर और बाहर केंद्र सरकार को घेरने में कोई देर नहीं की. 

घटना के राष्ट्रव्यापी असर की संभावना का बीजेपी को भली भांति अंदाजा था और उसने तत्काल मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाकर नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की. हालांकि विश्लेषकों के एक धड़े की माने तो उना मामले में हुए नुकसान की भरपाई आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे से नहीं हो सकती.

गुजरात में चल रहे दलित आंदोलन ने देश के सामने दलितों और पिछड़ों पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है. 

दलितों के साथ होने वाले अत्याचार के मामले में 2014 का साल बेहद बुरा रहा. 2014 में दलितों के खिलाफ हुए अपराध के 39,408 मामले दर्ज हुए जो 2013 के मुकाबले करीब 19 फीसदी अधिक था. 

हालांकि 2015 में दलितों के खिलाफ होने वाले कुल अत्याचार के मामलों में कमी आई है.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक  2015 में दलितों के खिलाफ होने वाले अपराध में करीब 4.5 फीसदी की गिरावट आई है. 2015 में दलितों के खिलाफ हुए अपराध के कुल 45,003 मामले दर्ज हुए. 

सबसे खतरनाक राज्य उत्तर प्रदेश

2014 की तरह 2015 में भी उत्तर प्रदेश दलितों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में सबसे अव्वल रहा. उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 8,358 दलिक उत्पीड़न के मामले दर्ज हुए. देश भर में दलितों के खिलाफ अत्याचार के कुल मामलों में अकेले उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 18.6 फीसदी मामले दर्ज हुए. 

उत्तर प्रदेश के बाद दलितों के खिलाफ सबसे अधिक मामले राजस्थान (6,998) में दर्ज हुए जबकि 6,438 मामलों के साथ बिहार तीसरे पायदान पर रहा. 

उना प्रकरण के बाद दलितों की खराब स्थिति को लेकर गुजरात सर्वाधिक चर्चा में रहा. हालांकि 2015 में गुजरात में गुजरात में दलितों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में कमी आई है. 

2014 में गुजरात में दलित अत्याचार के कुल 1130 मामले दर्ज हुए थे जो 2015 में घटकर 1046 हो गया. 

देश भर में दलितों के खिलाफ अत्याचार के कुल मामलों में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 18.6 फीसदी मामले दर्ज हुए.

गुजरात के एक सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं, 'उना प्रकरण ने गुजरात में दलितों की बदतर स्थिति की पोल खोलकर रख दी है. इसका असर अन्य राज्यों के चुनावों में पड़ना तय है. हालांकि इन आंकड़ों के सामने आने के बाद बीजेपी को गुजरात मॉडल को न्यायोचित ठहराने का एक  और मौका मिलेगा. उत्तर प्रदेश में पार्टी दलितों की खराब हालत को लेकर समाजवादी पार्टी पर आक्रामक होगी, वहीं दूसरी तरफ बसपा की तरफ से बीजेपी के खिलाफ चलाए जा रहे दलित विरोधी अभियान से निपटने में मदद मिलेगी.'

दिल्ली में सुधरी सुरक्षा

दिल्ली समेत देश के कुल सात केंद्र शासित प्रदेशों में दलितों के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न के मामले में जबरदस्त तरीके से 40 फीसदी की कमी आई है. 2014 में इन सातों केंद्र शासित प्रदेशों में दलित उत्पीड़न के कुल 102 मामले दर्ज हुए थे जो देश भर में दलित उत्पीड़न के मामलों के मुकाबले 0.2 फीसदी था. 2015 में यह अनुपात घटकर 0.1 फीसदी हो गया. 

2015 में दिल्ली में दलित उत्पीड़न के मामलों में जबरदस्त गिरावट आई है. 2014 में दिल्ली में दलित उत्पीड़न के कुल 87 मामले दर्ज हुए थे जो 2015 में घटकर 54 हो गया. 

आम आदमी पार्टी दिल्ली के बाद पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला कर चुकी हैं. पंजाब में दलित मतदाताओं की बड़ी आबादी है और आम आदमी पार्टी इस वोट बैंक को लुभाने की हर संभव कोशिश करती रही है. 

वास्तव में गुजरात के उना प्रकरण जोर-शोर से उठाकर केजरीवाल पंजाब की सियासत कर रहे थे. गुजरात के मुकाबले पंजाब में दलित वोट बैंक के लिहाज से बड़ी ताकत है और यह अभी तक कांग्रेस के प्रति वफादार रहा है. दिल्ली में दलित उत्पीड़न के मामलों में आई गिरावट को केजरीवाल अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर गिनाने की कोशिश कर सकते हैं.

केजरीवाल रोहित वेमुला की आत्महत्या को हत्या बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी से माफी मांगे जाने की अपील कर चुके हैं. केजरीवाल ने कहा था, 'यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है. यह लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और समानता के विचार की हत्या है. मोदी जी को मंत्रियों को बर्खास्त करते हुए इस मामले में देश से माफी मांगनी चाहिए.'

महिलाओं के खिलाफ कम हुए अपराध

साल 2014 में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के मामलों में करीब नौ फीसदी से अधिक की तेजी आई थी लेकिन 2015 में ऐसे मामलों में गिरावट आई है. 2014 में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के कुल 3,37,922 मामले दर्ज हुए थे जो 2015 में घटकर 3,27,394 हो गया.

2014 की तरह ही 2015 में उत्तर प्रदेश महिलाओं के लिए देश का सबसे खतरनाक राज्य रहा. प्रदेश में देश भर के मुकाबले 10.9 फीसदी मामले दर्ज हुए. 

2015 में राज्य में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के कुल 35,527 मामले दर्ज हुए. हालांकि 2014 (38,467) के मुकाबले प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के मामलों में कमी आई है. 

2014 की तरह ही 2015 में उत्तर प्रदेश महिलाओं के लिए देश का सबसे खतरनाक राज्य रहा.

उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा रहा है. हाल ही में बुलंदशहर में हुए सामूहिक बलात्कार ने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी थी. 2015 में आए एनसीआरबी के आंकड़े राज्य की खराब कानून-व्यवस्था की हालत की पुष्टि करते हैं.

प्रदेश सरकार हालांकि कई मामलों को राजनीतिक साजिश बताकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करती रही है. बुलंदशहर बलात्कार मामले में भी ऐसा ही हुआ जब प्रदेश के मंत्री आजम खान ने इसे राजनीतिक साजिश बता डाला. खान को यह बयान देना भारी पड़ा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उनसे स्पष्टीकरण की मांग की है.

उत्तर प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल महिलाओं के सबसे खराब राज्यों में शुमार है. महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद बंगाल में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं.

बंगाल में 2015 में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के 33,218 मामले दर्ज हुए. उत्तर प्रदेश की तरह ही बंगाल में  भी पिछले साल (38,299) के मुकाबले इन मामलों में कमी आई है.

वहीं तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र (31,126) रहा जबकि चौथे और पांचवे नंबर पर क्रमश: राजस्थान (28,165) और मध्य प्रदेश (24,135) रहा. 2014 में उत्तर प्रदेश और बंगाल में सबसे अधिक महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले सामने आए थे.

महिलाओं के  लिए सर्वाधिक असुरक्षित देश के पांच राज्यों में दो राज्य बंगाल और राजस्थान की मुख्यमंत्री खुद महिला हैं.

First published: 31 August 2016, 8:43 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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