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बंगाल: सिंडिकेट माफिया पर चला दीदी का हंटर

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 8 August 2016, 7:46 IST
(गेटी)

सिंडिकेट माफिया के बढ़ते प्रभाव का सामना कर रहीं बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब कड़ा रुख अपना लिया है. उन्होंने शनिवार, छह अगस्त को एक व्हिप के जरिए इसे कठोर शब्दों में स्पष्ट भी कर दिया है.

अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि वे किसी भी तरह की आपराधिक या अराजक घटना में लिप्त न हों. यदि पार्षदों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो तृणमूल कांग्रेस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी.

यह तीसरी बार है जब उन्होंने अपने कैडर को कड़ी हिदायत दी है. पिछली कैबिनेट बैठक में भी सिंडिकेट राज का मामला प्रमुखता से उठा था. तब उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार इस मामले में अब किसी को भी नहीं छोड़ेगी, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी.

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शनिवार की बैठक ममता बनर्जी के कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर हुई जिसमें सभी मंत्रियों, सांसदों, विभिन्न नगरपालिकाओं के मेयर ने भी भाग लिया. बैठक में कोलकाता नगर निगम के मेयर शोबन चटर्जी भी मौजूद थे.

पिछले पांच सालों से सिंडिकेट राज का प्रभाव बढ़ता ही जा रहा है. सत्तारूढ़ दल कई कार्यकर्ताओं के संबंध ऐसे संगठनों से हो गए हैं जिनके चलते आपस में ही टकराव की स्थितियां पैदा हो गई हैं. रंगदारी वसूलने और दादागिरी की वजह से तृणमूल की छवि पर विपरीत असर हो रहा है.

हालात नियंत्रण के बाहर

तृणमूल नेता और विधाननगर के निगम पार्षद अनिंद्य चटर्जी और उनके कई साथियों को कोलकाता में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के रिश्तेदार से जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

ममता बनर्जी से जुड़े सूत्रों के अनुसार हसीना ने पिछले दिनों ममता को फोन कर साल्टलेक के एसी ब्लाक में रहने वाले उनकी एक रिश्तेदार अरुणाभा मुखर्जी को चटर्जी द्वारा धमकाने की बात बताई थी.

पश्चिम बंगाल में पिछले पांच सालों से सिंडिकेट राज का प्रभाव बढ़ता ही जा रहा है

उन्होंने ममता से यह भी कहा कि चटर्जी उनके रिश्तेदार मुखर्जी से जबरन उगाही की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने उनसे मामले में तुरन्त ही दखल देने को कहा था.

फिर क्या था, बंगाल की मुख्यमंत्री ने इस अवैध उगाही सिंडीकेट को खत्म करने के लिए पुलिस को खुली छूट दे दी. उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि इस मामले से जुड़ी कोई भी शिकायत मिलने पर आरोपियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं.

पुलिस ने फौरन कार्रवाई की. 12 जुलाई से 25 जुलाई के बीच इस तरह का अवैध धंधा कर रहे 49 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

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सूत्रों के अनुसार पुलिस को उन लोगों को भी गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं जो गुंडागर्दी में लिप्त हैं और राजनीतिक संरक्षण में सिंडीकेट राज चला रहे हैं. इसके अलावा रियल एस्टेट की सभी अवैध गतिविधियों को भी खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं.

बैठक में ममता बनर्जी ने तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदर, सब्यसाची मुखर्जी और बिधाननगर नगर पालिका के मेयर का विशेष रूप से नाम लिया और उन्हें निर्देशित किया कि वे निर्माण कार्य सामग्री की खरीद करवाने में सिंडिकेट को शामिल न करें.

कोलकाता से सटा न्यू टाउन राजर हाट का इलाका तो पार्टी नेताओं के सिंडिकेट राज से कुछ ज्यादा ही त्रस्त है. यहां तृणमूल कार्यकर्ताओं के आतंक के आगे किसी की मुंह खोलने की हिम्मत नहीं होती.

इन दिनों राजर हाट टाउनशिप और उससे जुड़े इलाके में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है. सिंडिकेट के जरिए इलाके में बन रही इमारतों के मालिकों को तय दर पर पसंदीदा व्यापारियों से ही निर्माण सामग्री को खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है.

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उन्होंने राज्य के म्युनिसिपल मामलों के मंत्री फरहाद हाकिम को भी निर्देशित किया कि वे दोनों से बात करें और एक बैठक करें जिससे सिंडीकेट राज को खत्म करने में मदद मिल सके.

सिंडिकेट की गहरी जड़ें

इस संकट को अच्छी तरह से समझने के लिए किसी को भी दो जून, 2015 में घटी एक घटना पर नजर दौड़ानी होगी. उस दिन सिंडिकेट के विरोधी धड़े न्यू टाउन में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की परियोजना साइट के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति का ठेका हासिल करने के लिए भिड़ गए. दोनों को ही टीएमसी का समर्थन मिला हुआ था.

रंगदारी वसूलने और दादागिरी की वजह से तृणमूल की छवि पर विपरीत असर हो रहा है

इस घटना से सत्तारूढ़ दल के भीतर ही मुश्किलें बढ़ गईं. टीएमसी सूत्रों के अनुसार न्यू टाउन के विधायक सब्यसाची दत्ता और बारासाट के सांसद काकोली घोष विरोधी गुटों की अगुवाई कर रहे थे.

इस बीच ममता ने चाय बागानों के सभी टीएमसी संघों से अनुरोध किया है कि वे सभी संघों का आपस में विलय कर एक ही संघ बना लें ताकि पार्टी के अंदर की शत्रुता खत्म हो जाए.

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वह पहले ही ऊर्जा मंत्री शोवनदेब चटर्जी और डोला सेन को निर्देश दे चुकी हैं कि वे जलपाईगुड़ी चाय बागानों के सभी जिला स्तर के नेताओं की बैठक 20 अगस्त को कोलकाता के नेताजी इनडोर स्टेडियम में आयोजित करें ताकि सभी फेडरेशनों को मिलाकर एक फेडरेशन के झंडे तले लाने का काम पूरा हो सके.

वह पहले ही साफ कर चुकी हैं कि पार्टी हर कार्यकर्ता को पार्टी के भीतर के विरोध को खत्म करने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं सौंपेगी. इसी के चलते उन्होंने हुगली के युवा सभापति दिलीप यादव को कार्यमुक्त करते हुए यह जिम्मेदारी शांतनु बनर्जी के कंधों पर डाल दी. यादव के पास पश्चिम बंगाल के हुगली जिले की उत्तरपाड़ा नगरपालिका के चेयरमैन का पद सुरिक्षत है.

विपक्ष की बांसुरी

विपक्षी नेता मुख्यमंत्री की इस बात के लिए आलोचना कर रहे हैं कि वे देर से जागी हैं. कांग्रेस नेता अधीर चौधरी कहते हैं कि उन्होंने राज्य में चल रहे सिंडिकेट राज के सम्बंध में कुछ साल पहले रिपोर्ट लिखाई थी. अधीर कहते हैं कि तब ममता ने इस मुद्दे पर मुश्किल से ही ध्यान दिया था. लेकिन अब वह यह समझ रहीं हैं कि इस संकट से निबटने के लिए राजनीतिक रूप से सामना करना जरूरी है.

वह सवाल करते हैं कि उन लोंगो का क्या होगा जो सिंडिकेट राज के जाल में पहले ही फंस चुके हैं?

First published: 8 August 2016, 7:46 IST
 
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