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बुरहान वानी और उरी हमले के बाद कश्मीर में ज़िंदगी कैसी है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 October 2016, 2:27 IST
QUICK PILL
  •  बुरहानी एनकाउंटर के बाद घाटी में उपजी अशांति और उरी हमले के बावजूद बगावती स्वर कमजोर पड़ गए हैं.  नियंत्रण रेखा के पार कारोबार और श्रीनगर-मुजफ्फराबाद पीस बस फिर से शुरू हो गई हैै. 

उरी हमले के बावजूद कश्मीर के सामान से भरे बारह ट्रक यहां से नियंत्रण रेखा पार करके पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पहुंचे और एक ट्रक वहां से यहां आया. यहां से जाने वाले ट्रकों में हस्तशिल्प, मसाले, कशीदाकारी के आइटम्स थे, जबकि उधर से आने वाले में सूखे मेवे. 8 जुलाई को लोकप्रिय आतंकी कमांडर बुरहान वानी के एक एन्काउंटर में मारे जाने के बाद घाटी में विरोध भड़कने से 12 जुलाई को कारोबार थम गया था, पर अब यह फिर शुरू हुआ है.

उरी हमला, जिसमें 19 सैनिक मारे गए थे, के एक दिन बाद, श्रीनगर-मुजफ्फराबाद पीस बस 8 सवारियों के साथ सवरे जल्दी चली, उस माहौल में जब उरी हमले के जवाब में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध की आशंकाएं प्रबल थीं. पांच सवारियां पाक अधिकृत कश्मीर की थीं, जो यहां अपने परिजनों सेे मिलने आई थीं, और तीन लोग यहां के कश्मीरी थे, जो वहां अपने रिश्तेदारों से मिलने जा रहे थे.

यूरी हमले के बावजूद बस पाक अधिकृत कश्मीर रोजमर्रा की तरह जा रही थी, उससे कश्मीर को भी हैरानी हुई. खासकर इसलिए क्योंकि बॉर्डर के पार सैन्य कैंपों में प्रतिकार और सैन्य स्ट्राइक्स के लिए नई दिल्ली से बराबर फोन आ रहे थे.

आपसी विश्वास का सबसे बड़ा माध्यम

2003 से 2007 तक मनमोहन-मुशर्रफ शाति प्रक्रिया के नतीजे के रूप में नियंत्रण रेखा के पार बस सर्विस और कारोबार क्रमश: अप्रैल 2005 और अक्टूबर 2008 में शुरू हुआ. इसे 1947 के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर) का सबसे बड़ा माध्यम माना गया.

हालांकि बस में बहुत कम सवारियां सफर करती हैं और केवल सीमित कारोबार की अनुमति है, पर अगर निरंतर और दृढ़ता के साथ इस दिशा में कोशिश की जाए, तो इस बस की शुरुआत इस बात की सूचक है कि कश्मीर पर आपसी समझ संभव है.

और अब नवीनतम भारत-पाक विवाद में उनका बने रहना, जब नई दिल्ली इंडस वॉटर ट्रीटी और पाकिस्तान को सबसे प्रिय राष्ट्र का स्टेटस देने पर पुनर्विचार करना चाह रही है, से राज्य के लोग और व्यवसायी आश्वस्त महसूस कर रहे हैं.

कश्मीर ट्रेडर्स एंड मैन्युफैक्चरर्स फेडरेशन के अध्यक्ष यसीन खान ने कैच न्यूज को बाताया, 'हालांकि कारोबार और सफर का फिर से शुरू होना स्वागत योग्य है, पर हम समझ नहीं पा रहे हैं कि युद्ध की बयानबाजी के बीच इसकी अनुमति कैसे दे दी गई. और खासकर तब जब एलओसी व्यापार सीधा केंद्रीय गृहमंत्री के अधीन है और पाकिस्तान सरकार, जम्मू-कश्मीर सरकार को इस संदर्भ में फैसले लेने का अधिकार नहीं है.'

हालांकि खान ने मांग की है कि दोनों देशों के लिए बेहतर यह है कि वे कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स निरंतर अपनाएं और आश्वस्त करें कि ये 'कश्मीर पर स्थाई हल के लिए बनाए गए हैं.'  खान ने आगे कहा, 'जब से यह कारोबार दोनों कश्मीर के बीच शुरू हुआ है, बहुत कम प्रगति हुई है, और यही हाल सफर का है. संप्रेषण और बैंक की सुविधाएं नहीं हैं. कारोबार कश्मीर के दो हिस्सों और यहां के उत्पादों तक सीमित है.'

उरी के बाद के नतीजे

यूरी हमले के बाद उत्पन्न गतिरोध से अधिकांश कश्मीरी काफी निराश हैं क्योंकि इससे 'राज्य की तीन महीने पुरानी बगावत बेअसर' हो गई. राजनीतिक विश्लेषक डॉ. गल वानी कहते हैं, 'लोगों को उम्मीद थी कि बगावत की लहर से केंद्र की ओर से कश्मीर के लिए विश्वसनीय राजनीतिक वचनबद्धता का सूत्रपात होगा और पाकिस्तान के साथ भी बातचीत फिर से शुरू होगी.

पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. बल्कि नई दिल्ली कश्मीर को लेकर और कट्टर हो गई है, और संकट से निबटने के लिए केवल सुरक्षा उपायों पर भरोसा कर रही है. यह यूरी हमले के बाद और बढ़ गया और इसने कश्मीर से जुड़ी सभी कोशिशों पर विराम लगा दिया.'

हालांकि यूरी हमला और इसके नतीजे ने राज्य में चल रहे विरोध को अलबत्ता ठंडा किया है. घाटी में चल रहे विरोध के स्वर में प्रत्यक्षत: गिरावट आई है. 18 सितंबर को जब आक्रमण जारी था, कुलगाम, कुपवाड़ा और अवंतीपुरा के कई स्थानों पर पथराव की खबरें थीं.

खुशबू के परिवार और गवाहों ने कहा कि खुशबू जान के अलावा 13 लोग शोपियां जिले के गडाफपुरा गांव में चैतवातन क्षेत्र के पास विरोधियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में मारे गए. लड़की को पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जाते ही मृत घोषित कर दिया. उसकी मौत की शुरुआती वजह हृदयाघात बताया गया.

81 दिन में मरने वाले 91 हुए

81 दिनों के कलह में हुई मौतें अब 91 हो गईं हैं. इसके अलावा सैकड़ों लोग आंशिक या पूरी तौर पर अंधे हो गए और लगभग 12 हज़ार चोटिल हैं. मंगलवार को परीमपुरा में पथराव के दौरान एक वाहन के अचानक मुडऩे से फोजिया सिदीक (22) को टक्कर लगी और वह श्रीनगर की सरहद पर मारी गईं. उसकी बहन नाडिया के गंभीर चोटें आईं, जिसका श्रीनगर अस्पताल में इलाज चल रहा है.

कश्मीर की रोजमर्रा स्थिति वही है: बाजार बंद कर दिए जाते हैं और सड़कें सूनी हो जाती हैं. पूरा इलाका दिन दहाड़े भूतहा लगने लगता है. कारोबार और पर्यटन पंगु हो गए हैं.

यासीन खान के मुताबिक कश्मीर को रोजाना 135 करोड़ रुपयों का नुकसान हो रहा है, जो इन दिनों ईद उल फितर के दिनों में 200 करोड़ तक पहुंच जाता है. इस तरह 81 दिनों में कुल नुकसान 11000 करोड़ रुपए का हो गया.

इसी तरह से शिक्षा भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. स्कूल बंद हैं और बच्चे घर तक सीमित हैं. विडंबना यह है कि हालांकि कुछ स्कूलों ने पढ़ाई की सामग्री ऑनलाइन पोस्ट की हैं, पर इंटरनेट नहीं होने से कोई भी उन्हें पढ़ नहीं सकता.

स्थानीय स्तंभकार ने कहा, 'यूरी हमले से ये सब दिक्कतें छिप गई हैं. और भारत-पाक संबंध उधेडऩे वाले सार्क सम्मेलन की मंदी ने कश्मीर पर सकारात्मक कदम के लिए बहुत कम गुंजाइश छोड़ी है. यह वह समय है जब नई दिल्ली क्षेत्रीय संस्थागत इंफ्रास्ट्रक्चर को अलग कर रही है. ऐसे में उम्मीद करना मुश्किल है कि यह कश्मीर पर राजनीतिक दृष्टि से ध्यान देगी. यह दुख की बात है.'

First published: 1 October 2016, 2:27 IST
 
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