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नोट के बदले चोट? मोदी के ट्विटर समर्थकों में गिरावट, 3 लाख ने अनफॉलो किया

आदित्य मेनन | Updated on: 10 November 2016, 22:38 IST
QUICK PILL
  • मोदी के ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या में तेज गिरावट आई है. यह गिरावट आठ तारीख को 500 और 1000 के नोटों को रद्द करने के फैसले के बाद आई है.
  • इस दौरान अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट में एक स्थिर गति से वृद्धि जारी रही जबकि ट्विटर के शहंशाह कहे जाने वाले मोदी के समर्थक कम हुए हैं. जानकारों के मुताबिक यह मोदी के लिए खतरे की घंटी है.

लगता है कि कालेधन पर लगाम लगाने के लिए 1000 और 500 रुपये के करेंसी नोट बंद करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई घोषणा उनके लिए उलटी साबित हो गई है. आलम यह हो गया है कि पीएम मोदी को नापसंद करने वाले लोग न केवल बाजार और सड़कों पर हैं बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर भी इसका असर देखने को मिला.

आठ नवंबर की रात की गई घोषणा के अगले दिन यानी नौ नवंबर को नरेंद्र मोदी के ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या में तीन लाख से भी ज्यादा की कमी आ गई. माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट के हर उतार-चढ़ाव पर नजर रखने वाली ट्विटर काउंटर नामक वेबसाइट के मुताबिक इस दिन (9 नवंबर को) आश्चर्यजनक रूप से नरेंद्र मोदी के 3 लाख 13 हजार ट्विटर फॉलोअर्स ने उन्हें अनफॉलो कर दिया.

उपरोक्त ग्राफ के जरिए मोदी के ट्विटर समर्थकों में आई तेज गिरावट को सममझा जा सकता है. सोशल मीडिया एनालिटिक्स पर नजर रखने वाली एक अन्य वेबसाइट ट्रैकेलिटिक्स के मुताबिक भी मोदी के ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या में एक दिन में 3 लाख 18 हजार की गिरावट देखी गई.

बता दें कि 23 लाख 80 हजार फॉलोअर्स के साथ मोदी देश में ट्विटर पर सबसे ज्यादा फॉलो की जाने वाली शख्सियत हैं. मोदी के पीछे दूसरे पायदान पर उनके करीब ही बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन हैं जिनके फॉलोअर्स की संख्या 23 लाख 30 हजार है.

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फॉलोअर्स की संख्या में आई कमी इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि बीते काफी वक्त से इसमें लगातार बढ़ोत्तरी हो रही थी.

नवंबर में ही औसतन रोजाना मोदी के ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या में 25 हजार का इजाफा हो रहा था. 1000-500 के करेंसी नोटों को बंद करने की घोषणा वाले दिन यानी 8 नवंबर को यह संख्या और ज्यादा बढ़ते हुए 50 हजार के करीब पहुंच गईं थी. लेकिन उस रात को मोदी द्वारा की गई घोषणा के बाद ट्विटर फॉलोअर्स का गुस्सा शायद ट्विटर पर देखने को मिला.

इस ग्राफ को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सितंबर से मोदी के फॉलोअर्स की संख्या में लगातार ईजाफा हो रहा था और अचानक 9 नवंबर को यह तेजी से गिर गई.

वैसे सामान्यत: अचानक इतनी तेजी से ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या में कमी उस वक्त देखने को मिलती है जब यह ट्विटर अपने यहां से फेक (नकली या जाली) ट्विटर अकाउंट को हटाता है. लेकिन ऐसा होने पर एक साथ तमाम राजनेताओं के फॉलोअर्स की संख्या में भी गिरावट आती है. लेकिन 9 तारीख का मामला ऐसा नहीं था.

उदाहरण के रूप में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या इस समयावधि के दौरान निरंतर गति से बढ़ी है.

अगर वास्तव में फॉलोअर्स की संख्या में कमी की वजह पीएम मोदी के 1000-500 करेंसी नोटों के प्रचलन को बंद करने का फैसला है, तो यह भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ी चिंता की बात है. 

इसे देखते हुए यह आसानी से माना जा सकता है कि वर्चुअल दुनिया से अलग असल दुनिया में इस फैसले का विरोध और ज्यादा हो रहा होगा.

ट्विटर का बयान

वहीं ट्विटर इंडिया के आधिकारिक प्रवक्ता से इस गिरावट के संबंध में कैच की बातचीत हुई. उन्होंने कैच को बताया, 'प्रधानमंत्री मोदी के फॉलोवर्स की संख्या में अचानक आई इस कमी के पीछे स्पैम अकाउंट का डिलीट होना है. उन्होंने कहा कि पीएम के ट्विटर हैंडल से स्पैम अकाउंट्स डिलीट किए गए हैं. मगर उन्होंने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि फिर इसी तरह के स्पैम अकाउंट हटाए जाने का असर अन्य राजनेताओं मसलन अरविंद केजरीवाल या राहुल गांधी के ट्विटर हैंडलों पर क्यों नहीं दिख रहा?'

ट्विटर प्रवक्ता ने इस सवाल का भी जवाब नहीं दिया कि मोदी के फॉलोवर्स की संख्या में यह गिरावट पहले क्यों नहीं आई? गिरावट की शुरुआत 8 नवंबर की रात नोट बंद करने की घोषणा के बाद ही अचानक क्यों हुई? जाहिर है इन सवालों के जवाब हमसे, ट्विटर से बेहतर वो जनता जानती है जो अब तक प्रधानमंत्री को ट्विटर पर फॉलो करती रही है.

(अमित कुमार बाजपेयी और साहिल भल्ला के सहयोग सहित)

First published: 10 November 2016, 22:38 IST
 
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