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नोट के बदले चोटः मोदी के फॉलोवर्स की संख्या ट्विटर के गले की फांस बन गई है

आदित्य मेनन | Updated on: 12 November 2016, 8:24 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

ट्विटर इंडिया ने 9 नवम्बर को अचानक प्रधानमंत्री के फॉलोवर्स में आई गिरावट पर कैच न्यूज की खबर प्रकाशित की थी. इसपर प्रतिक्रिया देने के बाद ट्विटर एक ही दिन में मोदी के फॉलोवर्स की संख्या पहले जितनी ही दिखा दी. 

कैच न्यूज ने गुरुवार को ख़बर की थी कि 9 नवम्बर को ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फॉलोवर्स की संख्या में तीन लाख तेरह हजार की कमी देखी गई. प्रधानमंत्री ने इससे एक दिन पहले ही 500 और 1000 रूपए के नोटों पर पाबंदी लगाने की घोषणा की थी. 

मगर खबर आने के कुछ घंटों में ट्विटर के एक प्रवक्ता ने सफ़ाई देते हुए कहा, 'फॉलोलर्स की संख्या में गिरावट ट्विटर की तरफ़ से स्पैम अकाउंट डिलीट करने की वजह से आई है और ऐसा बहुत से अकाउंट्स के साथ हुआ है. 

ट्विटर की इस सफ़ाई के बाद कैच ने ट्विटर प्रवक्ता से कुछ नए सवाल किए. 

1-  क्या नरेंद्र मोदी के फॉलोवर्स में आई गिरावट मोदी को अनफॉलो करने वाले अकाउंट की वजह से हुई है या फिर ट्विटर पर से फर्जी अकाउंट हटाने की वजह से?

2- अगर ऐसा फर्जी अकाउंट हटाने की वजह से हुआ है तो फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट जस के तस कैसे हैं, उन पर क्यों नहीं फर्क पड़ा? मगर प्रवक्ता के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं था.

अपने ही दावे से पलटा ट्विटर

गुरुवार की रात कैच की ख़बर आने के कुछ ही घंटे बाद ट्विटर इंडिया ने जो प्रतिक्रिया दी थी, अगली सुबह यानी कि शुक्रवार को वह इससे पलट गया. शुक्रवार को पलटी मारते हुए ट्विटर ने कहा, 'मोदी के फॉलोवर्स की संख्या में आई गिरावट स्पैम अकाउंट्स डिलीट करने की वजह से नहीं हुआ है'.

प्रवक्ता ने कैच से कहा, यह गिरावट स्पैम अकाउंट्स डिलीट करने के कारण नहीं बल्कि सोशल ग्राफ में खामी की वजह से आई है. ट्विटर इंडिया ने यह भी बताया कि अब प्रधानमंत्री मोदी के फॉलोवर्स की संख्या फिर से उतनी ही हो गई है'. 

मगर ट्विटर के इस नए दावे से फिर कुछ सवाल उठते हैं-

1- ट्विटर ने पहले ऐसा क्यों कहा कि फॉलोवर्स में गिरावट स्पैम अकाउंट्स डिलीट करने की वजह से है?

2- क्या स्पैम सफाई अभियान के तहत दूसरे अकाउंट्स भी इस ग्राफ की खामी का शिकार हुए हैं? 

3- और अगर शिकार हुए हैं तो क्या ऐसे अकाउंट्स के फॉलोवर्स की संख्या फिर से पहले जितनी ही हुई है, जैसे कि मोदी की हो गई?

4- ट्विटर ने फॉलोवर्स की संख्या फिर से कैसे 'बहाल' कर दी? क्या इसका मतलब यह है कि डिलीट किए गए ट्विटर अकाउंट फिर से सक्रिय कर दिए गए?

5- अगर मान लिया जाए कि कैच की खबर गलत है तो ट्विटर गोपनीय प्रवक्ताओं से सफाई क्यों दिलवा रहा है? आख़िर छिपकर सफ़ाई देने के क्या मायने निकाले जाएं?

6- अगर सचमुच मोदी के ट्विटर हैंडल से स्पैम अकाउंट डिलीट किए गए हैं तो ट्विटर इंडिया को सामने आकर यह दावा करना चाहिए. वह अनजान प्रवक्ताओं से सफाई क्यों दिलवा रहा है? क्या इसका मतलब भी नहीं निकलता कि मोदी के फॉलोवर्स की संख्या फर्ज़ी है?

7- और आखिरी सवाल जो उठता है, वह यह कि क्या ट्विटर पर सरकार का दबाव है?

ट्विटर की परेशानी का सबब

1- मोदी की तरफ़ से 500 और 1000 के नोटों को खारिज करने की घोषणा के अगले ही दिन उनके फॉलोवर्स में गिरावट आना शर्मनाक है. बैंकों, एटीएम और बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच इसे सरकार के इस कदम का विरोध माना जा सकता है.  इसलिए इसे इस रूप में समझा जा सकता है कि असलियत में और ऑनलाइन दोनों ही मोर्चों पर सरकार के इस निर्णय से उपजी नकारात्मक प्रतिक्रिया के चलते सरकार सकते में है. 

2- स्पैम सफाई के ट्विटर की शुरूआती सफाई से सवाल उठते हैं कि सोशल मीडिया पर मोदी का असर फर्जी अकाउंट्स की वजह से भी है. पहले भी सोशल मीडिया हैंडल पर ऐसे आरोप लग चुके हैं.

3- कैच की खबर के तुरंत बाद ट्विटर का यूं अचानक फॉलोवर्स की संख्या में इजाफा दिखाकर पहले जितनी ही बताना इन आरोपों को बल देता है कि उस पर किसी तरह का दबाव है.

First published: 12 November 2016, 8:24 IST
 
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