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साइरस मिस्त्री की चिट्ठी: क्या टाटा नए सत्यम हैं?

नीरज ठाकुर | Updated on: 29 October 2016, 8:12 IST
(सजाद मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने खुद को हटाए जाने के बाद एक गोपनीय और विस्फोटक चिट्ठी लिखी थी लेकिन वह लीक हो गई है. इस चिट्ठी से पैंडोरा बॉक्स खुल गया है जिसके चलते टाटा ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के 150 साल पुराने साम्राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है.

मिस्त्री टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर और टाटा कंसल्टेंसी के अलावा कई अन्य कंपनियों के चेयरमैन थे. टाटा संस इन कंपनियों की अम्ब्रेला कम्पनी है. अपनी चिट्ठी में मिस्त्री ने लिखा है कि उन्हें पांच नुकसान वाली कम्पनियां इंडियन होटल्स, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और टाटा टेली सर्विसेज विरासत में मिलीं थीं. ये कंपनियां घाटे में चल रही थीं. समूह ने उन कंपनियों में 1.96 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया था. फिर भी ये इकाइयां चुनौतियों का सामना कर रही हैं.

समूह को इन संपत्तियों पर 1.18 लाख करोड़ का बट्टा लग सकता है. बाजार को नियंत्रित करने वाले विनिमय बोर्ड को कंपनियों की सही कीमत की जानकारी नहीं दी गई. इससे कंपनी में कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल उठ खड़े होते हैं. इससे यह संभावना प्रबल लगती है कि कहीं टाटा ग्रुप सत्यम की लाइन पर तो नहीं चल रहा.

सत्यम

सत्यम कम्प्यूटर्स सर्विसेज़ लि. ने साल 2008 में इंडियन स्टॉक मार्केट को काफी संकट में डाल दिया था. कम्पनी के प्रोमोटर रामलिंग राजू और उनके परिवार ने स्टेटमेंट में जालसाजी करके कंपनी के राजस्व के साथ ही संपत्तियों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्शाते हुए इस घोटाले को अंजाम दिया था.

यहां सत्यम घोटाले और टाटा समूह के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच तुलना की जा रही है. सत्यम कम्प्यूटर्स के खिलाफ आरोप साबित हुए थे.

1- करीब 8 हजार करोड़ रुपए की देश की प्रमुख आईटी कंपनी सत्यम ने कॉरपोरेट धोखाधड़ी की थी. कम्पनी ने अपने राजस्व और परिसंपत्तियों की गलत रिपोर्टिंग की थी. यह कॉरपोरेट गवर्नेंस कानूनों के खिलाफ है. धोखाधड़ी में मुनाफा बढ़ाकर दिखाना और काल्पनिक परिसंपत्तियां दिखाने से कंपनी का स्टॉक मूल्य बढ़ गया था. 

2- अपनी चिट्ठी में मिस्त्री ने आरोप लगाया है कि उन पर कुछ ऐसे लेनदारों को इजाज़त देने के लिए दबाव डाला गया जिसके बारे में उन्हें पूरी जानकारी थी ही नहीं. कम्पनी में किसी भी लेनदेन के पूरे ब्यौरे को छिपाने या गलत जानकारी के कारण शेयरहोल्डर्स को विनिवेश करने के गलत फैसले लेने पड़े. सत्यम कम्प्यूटर्स के प्रमोटर्स को भी कंपनी प्रोमोटरों द्वारा किए गए लेनदेन की पूरी जानकारी न देने का दोषी पाया गया था.

3- परिसम्पत्तियों की कीमतों को छिपाने या गलत रिपोर्टिंग से मामले में थर्ड पार्टी ऑडिटर्स की मिलीभगत दिख सकती है. सत्यम घोटाले मामले में, थर्ड पार्टी ऑडिटिंग फर्म प्राइसवाटरहाउस कॉपर इंडिया के तीन ऑडिटर्स को सत्यम के खातों के अंकेक्षण में 'गम्भीर लापरवाही' का दोषी पाया गया था. मिस्त्री ने जो चिट्ठी लिखी है, उसमें भी टाटा समूह के थर्ड पार्टी ऑडिटर पर कई सवाल उठाए गए हैं.

मंत्रालय फ़िक़्रमंद

मिस्त्री और टाटा ट्रस्ट के बीच झगड़े से वित्त मंत्री अरुण जेटली के अगुवाई वाले कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय हिल गया है. सरकार भी टाटा जैसे समूह को संकट में नहीं डालना चाहती. ख़ासकर, ऐसे वक़्त में, जब भारतीय अर्थव्यवस्था निजी क्षेत्र से विनिवेश की कमी का सामना कर रही हो. 

टाटा समूह के खिलाफ कॉरपोरेट गवर्नेंस घोटाले का असर 100 से ज्यादा कंपनियों पर पड़ेगा. टाटा समूह इन कम्पनियों की अम्ब्रेला कम्पनी है जिसका सालाना राजस्व 100 बिलियन डॉलर (लगभग 10,000 करोड़ रुपए) से ज्यादा का है.

First published: 29 October 2016, 8:12 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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