दादरी कांडः अखिलेश यादव क्यों लें इसकी जिम्मेदारी

चारू कार्तिकेय | Updated on: 7 February 2017, 13:49 IST
QUICK PILL

कार्रवाई में कमी

भाजपा को अखलाक की हत्या के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा हैलेकिन सपा दोष से बच गई है.

कानून व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर ज्यादा दोष दिया जा सकता है.

कई नेताओं ने अब तक अखलाक के परिवार से मुलाकात कीलेकिन मुख्यमंत्री नहीं पहुंचे.

निराशाजनक ट्रैक रिकॉर्ड

अखिलेश के राज्य में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में हुई वृद्धि

देश भर में अकेले उत्तर प्रदेश ने बीते चार वर्षों में सांप्रदायिक हिंसा की सर्वाधिक घटनाएं हुईं.

२०१२ से लेकर अबतक यूपी में सांप्रदायिक हिंसा की ५६६ घटनाएं हुईंइसमें १५२ की मौत हुई

कहानी में जोड़

कैसे मुजफ्परनगर सांप्रदायिक ताकतों के लिए उत्तर प्रदेश में एक मानक बन गया.

उत्तर प्रदेश के बिसहाड़ा गांव में २८ सितंबर को ५० वर्षीय मोहम्मद अखलाक की भीड़ द्वारा हत्या किए जाने के बाद से नामी-गिरामी नेताओं में उसके परिजनों से मुलाकात की होड़ लगी हुई है. पहले केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री महेश शर्मा ने इस हत्या को एक हादसा बताते हुए हास्यापद बयान दिया.

इसके बाद पहुंचने वाले दूसरे हाई प्रोफाइल व्यक्ति एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने इसे पूर्व नियोजित साजिश करार दिया. फिर ३ अक्तूबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी बिसहाड़ा पहुंचे.

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक राजनेता जो गायब रहे वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे. वो भी तब जब उन पर राज्य में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी थी.

तो इन दिनों अखिलेश यादव कहां थे.

जिस दिन इस हत्या की खबर ने सुबह देश भर को जगा दिया, अखिलेश उस वक्त भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए एक संगठन के सीईओ के साथ बैठक कर रहे थे. अगले दिन, वे गोमती नदी पर एक परिवहन प्रणाली बनाने के प्रस्ताव को लेकर आए एक विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि मंडल से मिले. इसके अगले दिन एक आदिवासी समुदाय की महिला उद्यमियों के एक समूह से मिले और उनके शैक्षिक भ्रमण के लिए शुभकामनाएं दीं.

इस बीच तीन दिन बीत गए जब मुख्यमंत्री ने जाहिर किया कि उन्हें इस घटना के बारे में पता है. इस वक्त तक उनके प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें खूब बेवकूफ बनाया. घटना के बाद पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई करते हुए अखलाक के घर से मिले मांस को जांच के लिए फोरेंसिक प्रयोगशाला भिजवा दिया. शायद जिसका मतलब प्रशासन यह संकेत दे रहा था कि यदि जांच में गौमांस की पुष्टि होती है तो भीड़ द्वारा की गई हत्या को उचित ठहराया जा सकेगा.

अखिलेश सरकार की विफलाएं

सांप्रदायिकता और कानून एवं व्यवस्था से निपटने में उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने गंभीर रूप से अक्षमता प्रदर्शित की है. बिसहाड़ा में भीड़ द्वारा की गई हत्या भी अखिलेश सरकार की अक्षमता प्रदर्शित करने वाली कई घटनाओं की लंबी सूची में एक नवीनतम जोड़ है. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते चार वर्षों में उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक सांप्रदायिक घटनाएं हुई हैं.

2012 में, जिस वर्ष यूपी में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने, तब प्रदेश ने ११८ सांप्रदायिक दंगे देखे. इसमें ३९ लोगों की मौत हुई और ५०० घायल हुए. अगले वर्ष २०१३ में यह घटनाएं बढ़कर २४७ हो गईं. जिसमें ७७ की मौत और ३६० घायल हुए.

इस रिकॉर्ड में २०१३ में हुआ मुजफ्फरनगर दंगा भी शामिल है. जिसकी भयावहता का अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि इस दंगे में न केवल तमाम मौतें हुईं. बल्कि लोगों के दिलों में बसे डर और असुरक्षा की वजह से ५० हजार  

First published: 1 January 1970, 5:30 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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