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हरियाणा कांग्रेस: अंदरूनी कलह से खुल रही कलई

राजीव खन्ना | Updated on: 1 August 2016, 7:09 IST

हरियाणा कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा है. अंदरूनी लड़ाई के चलते पार्टी के नए प्रभारी कमलनाथ के लिए स्थितियों पर काबू पाना मुश्किल हो गया है. वे बीते एक महीने से इसी कोशिश में लगे हैं. पार्टी के अंदर बन चुके धड़े लगातार एक दूसरे पर हमला बोलते रहते हैं और बार-बार आलाकमान तक एक दूसरे की शिकायत पहुंचाते रहते हैं.

हरियाणा कांग्रेस के ताजा घटनाक्रम के तहत पूर्व कांग्रेसी मंत्री कैप्टन अजय यादव ने फेसबुक और ट्विटर पर अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी. हालांकि उनके इस्तीफे को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है. जानकारों का मानना है कि वे इसी तरह का आक्रोश दिखाते रहते हैं और फिर अपनी ही बात से मुकर जाते हैं.

उनके इस्तीफे में जो कुछ लिखा गया है उससे पार्टी में हो रहा विघटन सामने आ गया है. यादव ने पहले भी पार्टी और मंत्रालय से कई बार इस्तीफा देने की घोषणा की है लेकिन बाद में वापस ले ली.

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अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा है- ‘अपनी जवानी और जिंदगी पार्टी को समर्पित करने के बाद भी मुझे अपमान, तकलीफ, बीमारी और मानसिक तनाव के सिवाय कुछ नहीं मिला है. यह वे नेता कर रहे हैं जिन्होंने सरकारी तंत्र को भ्रष्ट बना दिया है. भ्रष्ट नेताओं के इस गिरोह ने सरकारी खजाने को लूटा है.’

वे बताते हैं कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी की प्रदेश इकाई में चल रही गड़बड़ियों के बारे में बता दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता भुपिन्दर सिंह हुड्डा पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है सोनिया गांधी के करीबी उन्हें गुमराह कर रहे हैं.’ उन्होंने सोनिया से हुड्डा को दिया गया प्रमोशन वापस लेने की मांग की.

माना जा रहा है इस बार यादव ने इस्तीफे की घोषणा इसलिए की है क्योंकि कुछ दिनों पूर्व कमलनाथ ने पार्टी में चल रहा आंतरिक गतिरोध समाप्त करने के उद्देश्य से दिल्ली में जो बैठक बुलाई थी उसमें कैप्टन अजय यादव को शामिल नहीं किया गया था.

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इस धड़े का कहना है कि किरण के इस वक्तव्य से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है

यादव प्रकरण के अलावा पार्टी कांग्रेस विधायी दल की नेता किरण चैधरी के उस वक्तव्य पर भी बंटी हुई दिखाई दे रही है जिसमें उन्होंने भाजपाई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को एक ईमानदार नेता बताया था.

उन पर एक नहीं कई बार पार्टी के ही सदस्यों ने आरोप लगाया है. हुड्डा समर्थकों ने तो इस बात पर उनको पार्टी से हटाए जाने तक की मांग कर डाली. इस धड़े का कहना है कि किरण के इस वक्तव्य से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है. 

कांग्रेस प्रदेश इकाई के प्रमुख फूलचंद मुलाना और पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने इस बात पर किरण को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की तारीफ कर रही हैं, जो हमारे खिलाफ राजनीति कर रहा है. साथ ही गांधी परिवार और प्रदेश नेतृत्व की छवि खराब कर रही हैं.

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दूसरी ओर, हरियाणा कांग्रेस प्रमुख अशोक तंवर और उनके समर्थक किरण चैधरी के बचाव में उतर आए हैं. इनका कहना है कि किरण के बयान को गलत ढंग से पेश किया गया और उसका गलत मतलब निकाला गया. उन्होंने पार्टी नेताओं को किरण के खिलाफ बयानबाजी करने से मना किया है.

इससे भाजपा को बैठे बिठाए कांग्रेस पर तंज कसने के लिए एक मुद्दा मिल गया है. राज्य मंत्री नायब सैनी ने कथित तौर पर कहा, 'चौधरी का भाजपा में स्वागत है. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को अपने नेताओं के सच बोलने पर रोक नहीं लगानी चाहिए. हरियाणा कांग्रेस में नेतृत्व का संकट है. कमलनाथ ने हाल ही में एक बैठक में कथित तौर पर दोनों धड़ों से कहा है कि वे इस विषय पर मीडिया में चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के सिलसिले पर विराम लगाएं.

अहम बात यह है कि हरियाणा कांग्रेस में फूट पड़ चुकी है और लगता नहीं कि स्थितियों में सुधार होगा. राज्य विधानसभा में उन्हें पार्टी के 17 विधायकों और प्रदेश के कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं का समर्थन प्राप्त है. हालांकि पार्टी मामलों पर उनकी पकड़ को तंवर और चौधरी जैसे विरोधी नेताओं से चुनौती मिलती रहती है. इन दोनों ने हुड्डा के एकाधिकार वाले इलाकों में भी सेंध लगा दी है.

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कांग्रेस विधायी दल का नेता होने के बावजूद चौधरी के पास विधायकों का समर्थन नहीं है

वरिष्ठ राजनीतिक पर्यवेक्षक बलवंत तक्षक कहते हैं, ‘तंवर जनमानस के नेता नहीं हैं क्योंकि उन्हें जनता का समर्थन नहीं है. कांग्रेस विधायी दल का नेता होने के बावजूद चौधरी के पास विधायकों का समर्थन नहीं है. इससे आप पार्टी में चल रहे अंदरूनी हालात का अंदाजा लगा सकते हैं.’

दोनों धड़ों के नेता अंदरूनी कलह के चलते कथित तौर पर केंद्रीय नेतृत्व तक शिकायत लगाते रहते हैं और पार्टी के भीतर विरोधी का कद कम करने की गुहार लगाते हैं.

हुड्डा को कमजोर करने की बहुत सी कोशिशें हुई हैं, क्योंकि विरोधियों को पता है कि जब तक हुड्डा की स्थिति पार्टी में मजबूत बनी रहेगी तब तक कोई उन्हें पूछने वाला नहीं है भले ही उन्हें कोई पद दे दिया जाए.

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तक्षक कहते हैं संयोग से कमलनाथ का पार्टी प्रभारी बनाया जाना हुड्डा के लिए फायदे का सौदा कहा जा सकता है क्योंकि इन दोनों के बीच काफी बेहतर तालमेल है. अपना राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने के लिए हुड्डा पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ही मोर्चों पर संघर्ष कर रहे हैं. 

हुड्डा ने आरोप लगाया है कि खट्टर सरकार उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्य कर रही है; इसी के चलते उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज करवाए गए हैं.

बात जब जाट बहुल क्षे़त्र की राजनीति की आती है तो हुड्डा ही कांग्रेस में सबसे बड़े जाट नेता हैं. वे प्रतिद्वंद्वी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) को बराबर की टक्कर दे सकते हैं.

तक्षक को निकट भविष्य में हरियाणा कांग्रेस में कोई बदलाव होता दिखाई नहीं दे रहा. वे कहते हैं, ‘लगता है चुनाव नजदीक आने पर ही कोई बदलाव किए जाएंगे, उस वक्त टिकट बंटवारे के आधार पर नेता तय किए जाएंगे.

परन्तु क्या तब तक हरियाणा की राजनीति यूं ही गरमाती रहेगी और सौ साल से ज्यादा पुरानी पार्टी यूं ही अंतकर्लह में उलझती रहेगी? क्या पार्टी इस सबके लिए तैयार है?’

First published: 1 August 2016, 7:09 IST
 
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