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महाराष्ट्र: दही-हांडी उत्सव में मानव पिरामिड का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 August 2016, 18:48 IST
(पीटीआई)

महाराष्ट्र सरकार ने जन्माष्टमी पर दही-हांडी उत्सव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. सरकार ने पूछा है कि मानव पिरामिड निर्माण में 18 साल से कम उम्र के बच्चे हिस्सा ले सकते हैं या नहीं.

साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने उत्सव के दौरान मानव पिरामिड की ऊंचाई पर भी सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी है. महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट में अर्जी लगाकर सुप्रीम कोर्ट से स्थि‍ति साफ करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट इस अर्जी पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा.

अवमानना याचिका पर मांगी राय

दरअसल, 29 जुलाई को बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया था कि वो सुप्रीम कोर्ट से इस बारे में स्पष्टीकरण ले. हाई कोर्ट में स्वाति पाटिल नाम की महिला ने अवमानना याचिका दाखिल की है.

अर्जी में कहा गया है कि दही-हांडी के आयोजक हाई कोर्ट के अगस्त 2014 के फैसले का उल्लंघन कर रहे हैं जिसमें कहा गया था की दही हांडी की ऊंचाई 20 फीट से ज्यादा नहीं हो सकती.

मानव पिरामिड की ऊंचाई का मामला

साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने 11अगस्त 2014 में अपने आदेश में कहा था कि दही-हांडी उत्सव में मानव पिरामिड बनाने में 18 साल से कम उम्र के बच्चे हिस्सा नहीं ले सकते हैं और पिरामिड की ऊंचाई 20 फीट से ज्यादा नहीं हो सकती.

बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ उत्सव आयोजकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त 2014 को अंतरिम फैसला सुनाया था. इस आदेश में कहा गया था कि दही-हांडी उत्सव में मानव पिरामिड के निर्माण में 12 साल से कम उम्र के बच्चों को हिस्सा लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

हालांकि आदेश में पिरामिड की ऊंचाई को लेकर कोई सीमा नहीं तय की गई थी. दही-हांडी का उत्सव हर साल भगवान कृष्ण के जन्मदिन जन्माष्टमी के मौके पर आयोजित होता है.

इस उत्सव के दौरान मानव पिरामिड बनाए जाते हैं और ऊंचाई पर बंधे दही से भरे मिट्टी के बर्तन को तोड़ा जाता है. यह महाराष्ट्र का एक बेहद लोकप्रिय आयोजन है.

First published: 3 August 2016, 18:48 IST
 
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