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उनाकांड के पीड़ित संघ समर्थित रथयात्रा में शामिल होने दिल्‍ली पहुंचे

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST

कह सकते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बड़ी सफलता हाथ लगी है. उनसे जुड़े एक संगठन ने उना में पीटे गए दलित पीड़ितों को अपने मंच पर बुलाने में सफलता हासिल की है.

भारतीय बौद्ध संघ जो कि आरएसएस का बुद्धिस्ट मंच है, 13 अक्टूबर, बृहस्पतिवार को दिल्ली स्थित गुजरात भवन में उना के पीड़ित दलित युवकों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक पीड़ित दलित युवक राजधानी ट्रेन से बृहस्पतिवार की सुबह करोल बाग स्थित बीबीएस के दफ्तर पहुंचेंगे. प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस गुजरात भवन में दोपहर दो बजे के आस-पास होगी.

संघ के लिहाज से यह बड़ी कामयाबी है. उना में दलित युवकोंं की पिटाई के बाद पैदा हुए दलितों के विरोध का सबसे पहला निशाना संघ और गुजरात की भाजपा सरकार और दूसरे हिंदुवादी संगठन बने थे. उना में दलित युवकों पर हमला करने वाले शिव सेना के लोग थे.

संघ से जुड़े भारतीय बौद्ध संघ की 14 अक्‍टूबर को दिल्‍ली से शुरू हो रही दलित चेतना धम्‍म वाहन रथयात्रा से ठीक पहले संगठन ने दावा किया है कि गुजरात के उना में गौरक्षकों के हाथों हुई दलित उत्‍पीड़न की घटना के चारों पीड़ित युवकों समेत दो युवाओं के पिता बालूभाई सरवैया उनकी यात्रा में भी हिस्‍सा लेंगे.

उना के चारों पीड़ित लड़के और उनमें से दो के पिता बालूभाई अहमदाबाद राजधानी से दिल्ली पहुंच चुके हैं

पिछले महीने जब उना दलित कांड के पीड़ितों की आरएसएस संबद्ध संगठन की रथयात्रा में हिस्‍सा लेने की ख़बर सार्वजनिक हुई थी, तब पीड़ितों ने दावा किया था कि न तो उन्‍हें बुलाया गया है और न ही वे इस यात्रा में शामिल होंगे. कुछ स्रोतों से उनके शामिल होने की भी ख़बर उस वक्‍त आई थी, लेकिन यात्रा से ठीक दो दिन पहले बुधवार को भारतीय बौद्ध संघ के अध्‍यक्ष भंते संघप्रिय राहुल ने कुछ लोगों को बताया है कि उना के चारों पीड़ित लड़के और बालूभाई अहमदाबाद राजधानी से पहुंच चुके हैं.

दिल्‍ली विधानसभा के करीब स्थित के 26, अलीपुर रोड से शुक्रवार को दिन में शुरू होने वाली इस यात्रा में केंद्र सरकार के कई मंत्रियों और नेताओं के हिस्‍सा लेने की सूचना है. इनमें प्रमुख रामदास अठावले, रामविलास पासवान, अर्जुन मेघवाल और सत्‍यनारायण जटिया शामिल हैं. सत्यनारायण जटिया बीबीएस के मुख्य संरक्षक हैं.

आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर दलितों को एक बार पिर से अपने पाले में लाने के उद्देश्‍य से निकाली जा रही इस रथयात्रा का समापन अगले 26 मई को जूनागढ़ में होगा और पांच राज्‍यों की यात्रा करते हुए गुजरात में यह बाबासाहब आंबेडकर की जयन्‍ती पर अगले साल 14 अप्रैल को प्रवेश करेगी.

उना से मिली सूचना के मुताबिक बालूभाई सरवैया सोमवार को अहमदाबाद में ही थे, लेकिन वे अपने बेटे के कान का इलाज कराने वहां आए थे. उना में रहने वाले दलित कार्यकर्ता चंद्रसिंह महीडा ने रथयात्रा की बात तो स्‍वीकार की, लेकिन पीड़ितों के इसमें शामिल होने की बात से उन्‍होंने इनकार किया.

गुजरात के गिर सोमनाथ जिला स्थित उना में 11 जुलाई को सरेबाज़ार गौरक्षकों द्वारा दलितों की पिटाई के विरोध में अहमदाबाद से पदयात्रा कर के 15 अगस्‍त को उना में एक विशाल जनसभा आयोजित करने वाले दलितों के युवा नेता जिग्‍नेश मेवाणी ने इस रथयात्रा से अनभिज्ञता जतायी. उन्‍होंने फोन पर बताया कि उन्‍हें इसकी कोई जानकारी नहीं है.

संघप्रिय राहुल के मुताबिक बालूभाई समेत उना कांड के चारों पीड़ित युवा आज सुबह दिल्‍ली पहुंचने के बाद दोपहर में दिल्‍ली के गुजरात भवन में रथयात्रा से जुड़ी एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में शामिल होंगे जिसमें भारतीय जनता पार्टी के कुछ वरिष्‍ठ नेता भी होंगे. राहुल के मुताबिक वे यात्रा के शुरुआती हफ्ते में इसमें शामिल रहेंगे जब यात्रा गाजि़याबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर पहुंचेगी.

उना पीड़ितों को अपने मंच पर खड़ा करने के पीछे संघ की एक मंशा यह भी हो सकती है कि वह दशहरा के दिन गुजरात में दलित से बौद्ध बने लगभग 200 लोगों के मामले को दबाना चाहता है और यह संदेश देना चाहता है कि सबकुछ ठीक है.

उना दलितों को अपने पक्ष में खड़ा करने के पीछे भाजपा और संघ की मंशा आगामी उत्तर प्रदेश और अगले साल पंजाब, गुजरात के विधानसभा चुनावों को माना जा रहा है. इन राज्यों में दलित आबादी बड़ी संख्या में है.

First published: 13 October 2016, 7:33 IST
 
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