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घोड़ी चढ़ने पर अड़े दलित दूल्हे ने पूछा- क्या मैं हिंदू नहीं, क्या अलग है मेरा संविधान?

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 April 2018, 13:25 IST

देश के किसी न किसी कोने से आए दिन खबर आती है कि दलित दूल्हे को घोड़ी नहीं चढ़ने दिया गया, या फिर घोड़ी चढ़ने से मारा-पीटा गया. घोड़ी चढ़ने पर दलितों के हत्याओं की भी खबरें आम हैं. अब ऐसी ही एक खबर यूपी से आई है. जहां एक दलित दूल्हे ने गांव के भीतर से अपनी बारात निकालने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है. उसने कहा कि क्या मैं हिंदू नहीं, क्या मेरा अलग संविधान है?

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बसई बाबस गांव के रहने वाले संजय कुमार की बारात 20 अप्रैल को कासगंज जिले के ठाकुर बहुल गांव निजामपुर जाने वाली है. लेकिन पिछले सौ वर्षों से गांव में कथित परंपरा है कि कोई भी दलित दूल्हा घोड़ी पर गांव नहीं घूम सकता. लेकिन संजय अपनी बारात में घोड़ी पर चढ़ने को लेकर अड़ गया है. जिसे लेकर प्रशासन के हाथ पांव फूल गए हैं.

 

हफ्ते भर पहले संजय के ससुराल पक्ष के लोगों ने कानपुर के दलित नेताओं से गुहार लगाई थी कि धूमधाम से उनके जमाई की बारात निकाली दी जानी चाहिए. इस मामले में जमीअत भी साथ आ गया था. जमीयत ने ऐलान किया था कि धूमधाम से बरात कासगंज जाएगी और दूल्हे का अरमान पूरा किया जाएगा. बारात में अल्पसंख्यक समुदाय के हजारों लोग शामिल होंगे.

मामले में मुख्यमंत्री के आदेश के बाद डीएम और एसपी गांव का दौरा कर आए थे. बारात निकालने की व्यवस्था भी कर दी थी. किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए लड़की पक्ष और ठाकुर परिवारों के 30 लोगों को शांति भंग की आशंका में पाबंद भी किया है लेकिन जांच के बाद अधिकारियों ने बारात को उस रास्ते पर ले जाने पर असहमति जता दी.

अधिकारियों का कहना है कि जिस रास्ते पर बारात ले जाने की मांग की जा रही है, उसकी गलियां संकरी और रास्ते पर नालियों को कारण कीचड़ है. डीएम का कहना है कि इस रास्ते पर पिछले 20 सालों से किसी भी दलित की बारात नहीं गुजरी है. डीएम ने लड़की के परिजनों को सलाह दी है कि बारात उसी रास्ते से निकाली जाए, जहां से सामान्य तौर पर निकलती है. लेकिन लड़की के परिजन भी अपनी मांग पर अड़े हैं और बारात को उसी ठाकुर बहुल इलाके से ही निकालना चाहते हैं.

इसे लेकर पिछले कुछ समय से संजय, लगभग सभी सरकारी कार्यालयों, पुलिस अधिकारी, मुख्यमंत्री, एससी एसटी कमीशन समेत अधिकतर मीडिया हाउस को चिट्ठी लिखकर यह सवाल पूछ चुके हैं कि "क्या मैं हिंदू नहीं हैं?" संजय सोशल मीडिया पर अपनी बारात ले जाने को लेकर मदद की गुहार लगा रहे हैं.

 

15 मार्च को संजय ने मदद के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का भी रुख किया है. संजय का कहना है कि जब देश का संविधान कहता है कि हम सब समान हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो कि हिदुत्व पार्टी के सीएम हैं, कहते हैं कि हम सब हिंदू हैं. तो फिर मुझे इस तरह की परेशानी का सामना क्यों करना पड़ रहा है? मैं हिंदू नहीं हूं क्या?

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संजय का कहना है कि संविधान से चलने वाली सरकार में लोगों के लिए अलग-अलग नियम नहीं हो सकते. वहीं गांव की प्रधान और ठाकुर समुदाय की कांति देवी का कहना है कि हमें कोई दिक्कत नहीं, लड़की की शादी हो. इससे ठाकुरों को कोई एलर्जी नहीं है. लेकिन कोई जबरदस्ती हमारे रास्ते पर आएगा और दीवार तोड़ेगा ये दिक्कत है. जब बारात कभी हमारे रास्ते से निकली नहीं है तो विवाद वाला काम क्यों किया जा रहा है?

First published: 1 April 2018, 13:10 IST
 
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