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सूखाग्रस्त बुंदेलखंड में भूख से दलित की मौत !

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2016, 12:48 IST

उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका सूखे की मार झेल रहा है. बांदा जिले में सरकारी कोटे से राशन लेने जा रहे एक दलित की कथित रूप से भूख की वजह से रास्ते में ही मौत होने का मामला सामने आया है.

यूपी पुलिस के मुताबिक बांदा के ऐला गांव में नाथू नाम के व्यक्ति की उस वक्त मौत हो गई, जब वो सरकारी राशन की दुकान पर अनाज लेने के लिए जा रहा था. 

चार दिन से भूखा था परिवार


वहीं मृतक की पत्नी मुन्नी देवी ने बताया कि उसका पूरा परिवार पिछले चार दिन से भूखा था. उसका पति नाथू सरकारी मदद का इंतजार कर रहा था. नाथू सरकारी राशन लेने के लिए घर से निकला, लेकिन भूख की वजह से रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

वहीं बांदा के जिलाधिकारी योगेश कुमार ने भूख की वजह से नाथू की मौत होने की बात को खारिज किया है. इस मामले में नैरनी के उपजिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट आई है.

जिला प्रशासन का इनकार


जिसके मुताबिक मौत, गर्मी के कारण या दिल का दौरा पड़ने से हुई है. डीएम का कहना है कि चूंकि परिजनों ने नाथू के शव का अंतिम संस्कार कर दिया और पोस्टमार्टम नहीं हो पाया, इसलिए उसकी मौत के बारे में दावे के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता.

वहीं मामला मीडिया में आने के बाद मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सख्त कदम उठाते हुए बांदा के जिलाधिकारी योगेश कुमार से घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट को 24 घंटे के भीतर तलब की है.

देर से मिली राहत


दूसरी ओर डीएम के बयान के उलट मृतक नाथू की पत्नी मुन्नी देवी ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि खाने का राहत पैकेट काफी देर में पहुंचा और उसके पति की मौत भूख से हो गई.

मृतक की पत्नी के मुताबिक क्षेत्र के लेखपाल ने नाथू के शव का जल्द से जल्द अंतिम संस्कार करने का दबाव डाला ताकि उन्हें कोई मुआवजा भी न मिल सके.

साथ ही एक अधिकारी ने उससे कुछ कागजात पर अंगूठे का निशान लगवाया और कहा कि वो अपने घर में अनाज न होने की बात किसी को न बताए.

अखिलेश सरकार पर निशाना


इस बीच मामले पर सियासत भी गरमा गई है. यूपी बीजेपी के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश सरकार पर निशाना साधा है.

मौर्य ने सूबे की सरकार पर सूखाग्रस्त बुंदेलखंड में राहत उपलब्ध कराने में नाकामी का आरोप लगाते हुए बांदा में दलित की भूख से हुई मौत को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

मौर्य ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार ऐसे संवेदनशील मामलों पर जवाबदेही तय करने में पूरी तरह से असफल रही है.

वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि सरकार ने बुंदेलखंड और प्रदेश के दूसरे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्यों की निगरानी के लिए अलग से एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया है. मामले की जांच कर रही है. जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

First published: 5 May 2016, 12:48 IST
 
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