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महाराष्ट्र: मराठा रैलियों के ख़िलाफ़ दलितों-पिछड़ों की लामबंदी

अश्विन अघोर | Updated on: 14 October 2016, 8:29 IST
QUICK PILL
  • कोपर्डी गैंगरेप और हत्याकांड में तीन महीने से महाराष्ट्र में चल रही मराठाओं की रैली अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है. 
  • दलितों और अन्य पिछड़ा समूहों ने अपनी ताक़त का एहसास कराने के लिए 24 तारीख़ को अहमद नगर में महादलित रैली बुलाई है. 

महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में मराठा आंदोलनों की गूंज सुनाई दे रही है. इन मराठाओं ने कमोबेश सभी बड़े शहरों में रैली निकाल कर सत्ता प्रतिष्ठान को अपनी ताक़त का एहसास कराया है. इनकी विराट रैलियों को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों ने इनके आगे घुटने टेकते हुए सारी मांगें मान ली हैं. 

ख़ुद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिया है. मराठाओं की शिकायत है कि शिक्षा और सरकारी नौकरियों में उनका समाज पिछड़ गया है. 

मराठा समाज पर नज़र रखने वाले विश्लेषक मानते हैं कि इस समुदाय का बहुत बड़ा वर्ग पिछड़ा और आर्थिक रूप से कमजोर है लेकिन इनकी ताज़ा रैलियों की वजह अहमद नगर में कोपर्डी में एक नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप और हत्या का होना है. यही वजह है कि इनकी मांगों में एससी-एसटी (प्रिवेन्शन ऑफ एट्रोसिटीज एक्ट) 1989 में संशोधन भी शामिल है.

वरिष्ठ पत्रकार गणेश तोर्सेकर कहते हैं, ‘मराठा समुदाय में इस तथाकथित गुस्से की असली वजह दलितों द्वारा उनके समाज की एक नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप और हत्या है. यह मराठाओं की शासक वाली मानसिकता है. पिछड़ापन और आर्थिक संकट बाद की बात है'.

मराठाओं की हर रैली में विभिन्न समुदायों को मिलने वाले आरक्षण पर निशाना साधा जा रहा है. खासतौर पर प्रदर्शनकारी लड़कियां कह रही हैं कि आरक्षण की वजह से उन्हें मेडिकल और इंजिनियरिंग कॉलेजों में दाखिला नहीं मिला. वे कोपर्डी  गैंगरेप और हत्या प्रकरण भी उठा रही हैं और चूंकि इस मामले में दलित ही मुलज़िम हैं, तो सारा गुबार उन पर ही फूट पड़ा है.

दलित महिलाओं के साथ यौन हिंसा पर चुप्पी?

मगर चार महीने बाद दलितों ने भी पहली बार मुंह खोला है. उनका कहना है कि कोपर्डी गैंगरेप पीडि़ता का महिमा मंडन किया जा रहा है. प्रख्यात लेखक प्रदन्य पवार कहते हैं, 'वे इसकी आड़ में एससीएसटी प्रिवेन्शन ऑफ एट्रोसिटीज एक्ट में संशोधन करवाना चाहते हैं'.

प्रदन्य पंवार ने पूछा है, ये रैलियां एक नया बेंच मार्क बनाती नजर आ रही हैं लेकिन इनकी असल वजह क्या है? कोपर्डी गैंगरेप मुख्य मुद्दा है. वारदात उसी अहमद नगर की है, जो कई बार दलितों पर अत्याचार का गवाह रहा है. मराठा समुदाय उन घटनाओं की तो बात ही नहीं कर रहा है. उन्हें मराठा के अलावा दूसरे समुदाय की औरतों की इज्जत की चिंता नहीं है. उनकी महिलाएं इज्जत की हकदार हैं और बाकी शोषण के लिए बनी है? यह धारणा गलत है.

आंबेडकरवादी लामबंद

तीन महीने से इन रैलियों का उबाल देखकर अब महाराष्ट्र के बहुत सारे आंबेडकरवादी समूह लामबंद होने लगे हैं. इन्होंने 24 अक्टूबर को अहमद नगर में एक दलित महा रैली करने का एलान किया है. हालांकि दलित संगठनों ने भी कोपर्डी गैंगरेप के आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग की है. लेकिन एससी-एसटी अधिनियम में संशोधन की मांग का विरोध किया है. आयोजकों को रैली में 5 लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ आने की उम्मीद है.

पिछले दिनों नासिक में रैली निकालने वाले ओबीसी कार्यकर्ता श्रवण देवरे ने कहा ‘हम मराठों को आरक्षण दिए जाने के खिलाफ नहीं हैं लेकिन हमारी कीमत पर नहीं. इन्हें अलग से पिछड़ा वर्ग बनाकर आरक्षण दिया जाए. नासिक की इस रैली में 15 लाख लोग इकठ्ठे हुए थे, जो बाद में बारामती में शरद पंवार के घर तक मौन जुलूस लेकर पहुंचे थे.

First published: 14 October 2016, 8:29 IST
 
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