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अहमदाबाद दलित रैली: न मरे पशु उठाएंगे, न साफ-सफाई करेंगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(दिलीप मंडल/फेसबुक)

उना में हुई दलितों की पिटाई के विरोध में गुजरात के गिर-सोमनाथ जिले में रविवार को दलितों ने विशाल रैली निकाली. हजारों की संख्या में पहुंचे दलित समुदाय के लोगों मृत पशुओं के शव को नहीं उठाने और सफाई का कामकाज नहीं करने का संकल्प लिया. इस रैली में उपस्थित नेताओं ने कहा कि अगर दलितों पर अत्याचार नहीं रुका तो अगले साल गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव में वे अपनी ताकत दिखाएंगे.

इस रैली में यह भी तय हुआ कि 5 अगस्त को उना में पद यात्रा निकाली जाएगी. आपको बता दें कि 11 जुलाई को गिर-सोमनाथ जिले के उना में हिंदू शिव सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा मरी हुई गाय की खाल उतार रहे चार दलितों को बुरी तरह पीटा गया था. इस सामूहिक हिंसा के बाद चार दलितों में एक युवक की मौत हो गई है.

दिलीप मंडल/फेसबुक

इसके अलावा घटना से गुस्साए 20 से ज्यादा दलित युवाओं ने अलग-अलग जगहों पर आत्महत्या करने की कोशिश की थी. इनमें से एक युवक योगेश हीराभाई सोलंकी की मौत रविवार को हो गई. राजकोट के पाराबारी गांव के रहने वाले सोलंकी ने 19 जुलाई को आत्महत्या की कोशिश की थी.

रविवार को साबरमती इलाके में आयोजित रैली में दलित समुदाय ने सरकार के सामने अपनी मांगों को रखा है. दलित नेता और रैली के आयोजक जिग्नेष मेवानी ने सरकार से मांग की है कि मरे हुए पशुओं को उठाने का काम छोड़ने वाले दलितों और भूमिहीन दलितों को सरकारी कोटे से 5-5 एकड़ खेती योग्य जमीन दी जाए.

मेवानी ने कहा, “मैं सभी दलित भाई-बहनों से अपील करता हूं कि वे मरे हुए पशुओं को ना उठाए. आप सभी संकल्प लें कि अब सीवर लाइन साफ करने का काम नहीं करेंगे. हम यह काम नहीं करना चाहते हैं. हमारी मांग है कि सरकार हमें जमीन दे ताकि हम सम्मानजनक जिंदगी जी सके.”

मेवानी ने सरकार को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है. उन्होंने उना में दलितों को पीटने वाले लोगों को एंटी-सोशल एक्टिविटी एक्ट (पीएएसए) के तहत गिरफ्तार करने की मांग की है. अगर उन्हें जमानत दी जाती है तो सरकार उन्हें पांच साल जिलों से बाहर रखे.

मेवानी ने सरकार से कहा है कि सभी दलित सफाईकर्मियों को छठे वेतन आयोग का लाभ दिया जाए और उनकी नौकरी स्थायी की जाए.

इसके अलावा रैली में शामिल दलित नेताओं ने हाल में विरोध प्रदर्शन करने वाले दलितों के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे को वापस करने की मांग की है. 2012 में थानगढ़ में पुलिस फायरिंग में मारे गए तीन दलितों के केस में जांच की रफ्तार तेज करने को कहा है.

दलित नेता मेवानी का कहना है कि अगर सरकार पटेल आरक्षण पर पटेल नेताओं से बात कर सकती है तो उसे दलितों से भी वार्ता करनी चाहिए.

First published: 1 August 2016, 2:58 IST
 
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