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पंजाब: डैमेज कन्ट्रोल में जुटी आप की राह में कई रोड़े

राजीव खन्ना | Updated on: 5 October 2016, 7:43 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • आप के संकट की शुरुआत होती है, पार्टी द्वारा राज्य इकाई में फोर फ्रन्ट पर पंजाबियों को नजरअंदाज कर देने से.
  • गुरप्रीत सिंह घुग्गी को पार्टी का नया राज्य संयोजक बनाए जाने पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजनीतिक अनुभव और बौद्धिकता पर कोई ध्यान नहीं दिया गया.

पंजाब में आम आदमी पार्टी के राज्य संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर को पद से हटाए जाने के बाद से ही पार्टी को झटका लगने लगा है. राज्य में पार्टी की स्थापना काल से छोटेपुर उससे जुड़े हुए थे. अब आम आदमी पार्टी चुपचाप डैमेज कन्ट्रोल तंत्र बनाने की कोशिशों में जुट गई है.

पिछले एक माह से ज्यादा समय से, मीडिया ने अपना ध्यान क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू और उनके सहयोगियों द्वारा बनाए गए फोरम आवाज-ए-पंजाब पर मुख्यतः केन्द्रित कर लिया है. छोटेपुर ने क्षेत्रीय राजनीतिक संगठन 'अपना पंजाब पार्टी' का गठन कर लिया है. पटियाला से आप के निलम्बित सांसद धर्मवीर गांधी ने राजनीतिक फोरम को आकार दिया है. इन सब घटनाक्रमों के बाद आप नेतृत्व चुपचाप मुद्दों पर ध्यान देने की कोशिश कर रहा है.

इन सब वजहों से छोटेपुर के साथ ही अन्य विरोधियों को पिछले दो माह से आप पर हमला करने के लिए पर्याप्त सामग्री मिल गई है. आप के संकट की शुरुआत होती है, पार्टी द्वारा राज्य इकाई में फोर फ्रन्ट पर पंजाबियों को नजरअंदाज कर देने से. छोटेपुर ने पार्टी के खिलाफ जो आरोप लगाए थे. उसमें बड़े आरोपों में से एक बड़ा आरोप यह भी था कि पार्टी बाहर के लोगों को पंजाब में ला रही है.

पूर्व में गांधी और अन्य तमाम लोगों ने पार्टी से किनारा कस लिया था. इन सब का यही कहना है कि राज्य में बाहर से लाए गए पर्यवेक्षकों की मदद से दिल्ली में बैठकर रिमोट के जरिए आप को संचालित किया जा रहा है. छोटेपुर ने यह भी कहा है कि उन्हें जब से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है, तब से किसी भी स्थानीय ढांचे को आकार नहीं दिया जा सका है.

मजबूरी में बनाया नया संयोजक

हाल में आप ने गुरप्रीत सिंह घुग्गी को पार्टी का नया राज्य संयोजक बनाया है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उनके राजनीतिक अनुभव और उनकी बौद्धिकता पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. पार्टी हताश और निराश थी क्योंकि उसे इस वरिष्ठ पद पर कोई स्वीकार्य चेहरा नहीं मिल रहा था.

उनको राज्य संयोजक बनाने के बाद गुलशन छाबड़ा को पार्टी की राज्य इकाई का नया महासचिव बनाया गया है. मंडी गोबिन्दगढ़ के व्यापारी छाबड़ा पार्टी के लिए तभी से काम कर रहे हैं जब से राज्य में आप ने दस्तक दी थी. वह अपनी बेहतर सांगठानिक क्षमता के लिए जाने जाते हैं.

इन दोनों पदों पर नियुक्तियां करने के बाद आप ने अपने सांगठानिक ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए अन्य पदों पर भी नियुक्तियां की हैं. नौ नए उपाध्यक्ष और पांच संयुक्त सचिव बनाए गए हैं. उपाध्यक्षों में कर्नल (रिटायर्ड) सी डी सिंह कम्बोज, डॉ. बलबीर सिंह सौनी, बलदेव सिंह आजाद,बूटा सिंह अशांत,  कर्नल (रिटायर्ड) सी एम लखनपाल, डॉ. इन्द्रबीर सिंह, मोहन सिंह पहलियानवाला, मेहर सिंह मल्ली और दलबीर सिंह ढिल्लन शामिल हैं. नए संयुक्त सचिवों में मेजर सिंह, वरीन्दर सिंह खारा, हरिन्दर सिंह अमृतसर, ललित और डॉ. सारिका वर्मा शामिल हैं. इस बीच राष्ट्रीय संयुक्त सचिव जयदीप सिंह समराला को वॉल्टिंयर वेलफेयर एंड मैनेजमेन्ट विंग का हेड बनाया गया है.

दो सांसदों और नेताओं को बाहर करने पर आलोचना

आम आदमी पार्टी अपने दो निलम्बित सांसदों डॉ. गांधी और हरिन्दर सिंह खालसा को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है. पंजाबियों के साथ किए गए बर्ताव को लेकर गांधी सार्वजनिक रूप से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल समेत अन्य केन्द्रीय नेताओं की आलोचना कर रहे हैं.

पार्टी नेताओं का कहना है कि दोनों निलम्बित सांसदों के खिलाफ समुचित समय आने पर कार्रवाई की जाएगी. इस बीच यह भी खबर है कि पार्टी नेता ठीक इसी समय यह भी कह रहे हैं कि गांधी पटियाला के सांसद के रूप में इस्तीफा दे दें और उनकी जहां से मर्जी हो, वहां से विधान सभा का चुनाव लड़ लें.

इस कदम से तो पार्टी की अपने सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करने की कोशिशों में विफलता ही दिखाई पड़ती है. पार्टी ने अभी हाल ही में छोटे स्तर के उन नेताओं को निकाल दिया है जिन्होंने पार्टी के नेताओँ पर आरोप लगाते हुए पार्टी को चुनौती दी थी. पार्टी ने इन नेताओं को अनुशासनहीनता के नाम पर निकाला है. इनमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पवित्तर सिंह, मीडिय़ा टीम के सदस्य कर्नल (रि) जसजीत सिंह गिल, सर्किल इंचार्ज जगतार सिंह, महिला इकाई की सदस्य लखविन्दर कौर, एनआरआई सेल के हरपाल सिंह, डॉ. अमनदीप सिंह बैन्स, बलजीत सिंह चहल, कर्नल (रिटायर्ड) दलविन्दर सिंह ग्रेवाल और अमनदीप सिंह हैं. आप ने स्पष्ट किया है कि पार्टी इन नेताओं के साथ और ज्यादा कुछ नहीं कर सकती थी.

पंजाबी बनाम गैर पंजाबी

इन सबके अलावा पार्टी में पंजाबी बनाम गैर पंजाबी का मुद्दा भी गरमाया हुआ है. खबर है कि आप ने विधान सभा चुनाव क्षेत्रों के लिए 60 स्थानीय पार्टी नेताओं को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया है. ये पूर्व में नियुक्त किए गए 13 जोन पर्यवेक्षकों का स्थान लेंगे. ये विधानसभा पर्यवेक्षक तटस्थ व्यक्ति के रूप में रहेंगे और हर दो विधानसभा क्षेत्रों पर निगाह रखेंगे. वे चुनाव अभियान की भी निगरानी करेंगे.

पंजाब में पार्टी द्वारा बाहरी लोगों को थोपे जाने का मुद्दा जब से केन्द्रीय स्तर पर गरमाया है, तब से दिल्ली और उप्र से आए बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता या तो पंजाब छोड़कर चल गए हैं अथवा लो प्रोफाइल में रह रहे हैं. पार्टी नेता हिम्मत सिंह शेरगिल कहते हैं कि जो लोग पंजाब से चले गए हैं, उनका काम पूरा हो गया था. वे यहां संगठन के काम को आगे बढ़ाने के लिए आए थे.

यह तो पहले दिन से ही तय था कि वे पंचायत चुनाव तक नहीं लड़ेंगे, फिर विधान सभा चुनाव की तो बात ही छोड़िए. जो लोग छोड़कर गए हैं, विधान सभा क्षेत्रों में उनका कम पूरा हो गया था. ये लोग वहीं काम कर रहे थे, जहां प्रत्याशी घोषित कर दिए गए थे. अब यह प्रत्याशी पर था कि वे उन्हें मुक्त कर दें. वे अन्य विधान सभा क्षेत्रों में भी जाकर यही काम करेंगे.

पार्टी अन्य राज्यों में चाहती है विस्तार

उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का यह समूह खुद पार्टी से जुड़ा हुआ है ताकि अन्य राज्यों में भी पार्टी संगठन का ढांचा खड़ा करने में उनकी मदद ली जा सके जहां आप अपना विस्तार करना चाहती है. इन राज्यों में हिमाचल प्रदेश, गुजरात और गोवा जैसे राज्य शामिल हैं. उन्होंने कहा कि बाहर से आए इन कार्यकर्ताओं को अक्सर गांधी और छोटेपुर द्वारा पार्टी का वेतन भोगी कर्मचारी बताया जाता है.

ये लोग आरोप लगाते रहे हैं कि केजरीवाल आप को एक कॉरपोरेट घराने की तरह चला रहे हैं. आप की रणनीति में जो महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है, वह यह है कि पिछले माह बाघा पुराना में की गई रैली. इस रैली में किसान घोषणापत्र जारी किया गया.

इस रैली से राज्य से नेतृत्व में और लोगों को जगह देने की शुरुआत हुई है. पिछले एक माह से अधिक समय से घुग्गी, संगरूर के सांसद भगवन्त मन्न और एच एस फूलका ने भी विभिन्न जगहों पर हुई सफल रैलियों को सम्बोधित किया है. इन रैलियों में जनता का जो रिस्पॉन्स मिला है, वह पार्टी के लिए उत्साहवर्धक कहा जा सकता है.

First published: 5 October 2016, 7:43 IST
 
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