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'भारत माता की जय' बोलना मजहब के खिलाफ: दारुल-उलूम देवबंद

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 April 2016, 15:53 IST

दारुल-उलूम देवबंद ने एक फतवे में कहा है कि 'भारत माता की जय' बोलना मुसलमानों के लिए उचित नहीं है.

देवबंद के फतवे मे कहा गया है, 'हम अपने देश से प्यार करते हैं लेकिन यह हमारा खुदा नहीं है. हम केवल एक खुदा पर भरोसा करते हैं. इसलिए यह नारा लगाना किसी मुसलमान के मजहब के खिलाफ है.'

फतवे में आगे कहा गया है, 'हिंदू धर्म के विपरीत इस्लाम एक खुदा के विचार को मानता है जिसकी मूर्ति या तस्वीर नहीं बनाई जा सकती. हिंदुओं का एक तबका भारत माता को देवी मानता है और उनकी पूजा करता है. मुसलमानों का इस देवी की पूजा करना इस्लाम के खिलाफ है.'

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देवबंद ने अपने फतवे में साफ कहा है कि भारत हमारा वतन है और हमारे पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं. हम औरों की तरह ही मुल्क से मोहब्बत करते हैं. लेकिन वतन को अपना देवी-देवता नहीं मान सकते. मुसलमान खुदा के सिवा किसी दूसरे की इबादत नहीं कर सकता है.

देवबंद का कहना है कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को मजहब की आजादी की इजाजत देता है. कोई सरकार या संगठन इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों के लिए दूसरे लोगों को मजबूर नहीं कर सकती अगर यह उनके धर्म के खिलाफ हो.

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दारुल-उलूम के प्रवक्ता अशरफ उस्मानी ने बताया कि भारत के कई हिस्से से लोगों के सवाल आ रहे थे कि क्या 'भारत माता की जय' बोला जा सकता है. लोगों के सवाल के जवाब में ये फतवा जारी किया गया है.

इस फतवे की केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने निंदा की है. उन्होंने कहा कि ये फतवा शहीदों का अपमान है और ये इस्लाम के कट्टरपंथी चेहरे को दर्शाता है.

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वहीं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि वंदे मातरम बोलना कोई फैशन नहीं है ये जूनून और जस्बे का सवाल है. राष्ट्रभक्ति फतवों से नहीं तय होती है. संविधान, संस्कार और संस्कृति से पैदा होती है, इसलिए कोई क्या फतवे दे रहा है हम इसको महत्वपूर्ण नहीं मानते. हर सच्चे हिंदुस्तानी के डीएनए में राष्ट्रभक्ति है.'

आपको बता दें कि एमआईएम नेता और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी कहा था कि वो 'भारत माता की जय' कभी नहीं बोलेंगे. ओवैसी की यह प्रतिक्रिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने नई पीढ़ी को भारत माता की जयकार करने की जरूरत बताई थी. हालांकि भागवत ने कहा था कि इस नारे को थोपा नहीं जा सकता है.

First published: 1 April 2016, 15:53 IST
 
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