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दारूल उलूम देवबंद: जाकिर नाइक को जांच के बगैर दोषी ठहराना गलत

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 July 2016, 13:37 IST

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में इस्लामी शिक्षण संस्था दारूल उलूम देवबन्द ने विवादित इस्लामिक धर्म प्रचारक जाकिर नाइक का समर्थन किया है.

इस मसले पर संस्था के प्रेस प्रवक्ता अशरफ़ उस्मानी ने कहा, "पूर्व में जारी किये गये फतवों को सरकार और मीडिया ज़ाकिर के खिलाफ हथियार बना रही है. इस बात को साफ किया जाये कि पूर्व में जारी फतवे पहले की तरह आज भी हैं.

लेकिन डॉक्टर नाइक इस्लामिक उपदेशक हैं और उनके खिलाफ बिना किसी जांच के इस तरह सीधे आरोप लगाना ठीक नहीं है."

नाइक के समर्थन के साथ ही प्रवक्ता अशरफ उस्मानी ने यह भी कहा कि पूरे मामले पर अभी जांच चल रही है. इसलिए हम इस मसले पर अभी कुछ नहीं बोल सकते.

इस समय मीडिया संस्था के पुराने फतवों को इस तरह से पेश कर रही है, जैसे ये अभी दिए गए हों. इसका संदेश गलत जाता है.

इस्लामिक उपदेशक डॉक्टर जाकिर नाइक के विवादित तकरीरों की केंद्र औऱ महाराष्ट्र सरकार जांच कर रही है. वहीं दूसरी ओर मीडिया ने जाकिर नाइक पर दारूल उलूम की ओर से पूर्व में जारी फतवों को दिखाए जाने से मामला गरमा गया है.

इसके बाद संस्था ने इस मसले पर अपनी चुप्पी तोड़ी और खुलकर जाकिर नाइक का समर्थन कर दिया. गौरतलब है कि दारूल उलूम देवबंद के फतवा विभाग से केन्या के एक व्यक्ति ने पूछा था कि जाकिर नाइक के बारे में देवबंद की राय को स्पष्ट किया जाए.

इस पर दारूल उलूम ने जवाब दिया था कि डॉक्टर जाकिर नाइक का ज्ञान गहरा नहीं है. इसलिए वह विश्वसनीय नहीं हैं और मुसलमानों को उन्हें सुनने से बचना चाहिए.

इसी तरह एक अन्य फ़तवे में दारूल-उलूम ने लोगों से जाकिर नाइक के प्रोग्राम में ना जाने की भी सलाह दी थी. इतना ही नहीं उस फतवे में यह भी कहा गया कि जाकिर नाइक की कही बातों पर विश्वास या अमल करने से पहले किसी आलिम से उस बात की पुष्टि कर लेनी चाहिए.

दारुल-उलूम ने कहा था कि जाकिर नाइक एक स्वतंत्र विचार वाले व्यक्ति हैं. तकरीर देते वक्त वह इस्लामिक ड्रेस नहीं पहनते हैं. इसलिये उनके भाषणों पर विश्वास नहीं करना चाहिए.

First published: 12 July 2016, 13:37 IST
 
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