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फिर हुआ डेटा लीक, EPFO पोर्टल हैकिंग से 2.7 करोड़ लोगों का डेटा चोरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 May 2018, 7:34 IST

एक बार फिर से डेटा लीक का मामला सामने आया है. इस बार ईपीएफओ की वेबसाइट से 2.7 करोड़ लोगों के पर्सनल और प्रोफेशनल डेटा चोरी होने का मामला सामने आया है. ऐसा अनुमान है की ईपीएफओ की वेबसाइट पर रजिस्टर्ड तकरीबन 2.7 करोड़ लोगों की जानकारी लीक हो गई है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को लिखे गए एक लेटर के मुताबिक हैकर्स ने EPFO के आधार सीडिंग पोर्टल से डेटा चुराया है.

लेटर में सेंट्रल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को लिखा है कि सेंट्रल इंटेलिजेंस ब्यूरो से उन्हें जानकारी मिली है कि वेबसाइट में कुछ कमिया हैं जिसका फायदा हैकर्स उठा रहे हैं.

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साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट आनंद वेंकटनारायण ने बताया कि, 'नाम, पता, नौकरी का ब्योरा और चूंकि हर शख्स अपने वेतन का 12% पीएफ में कटवाता है तो वेतन की जानकारी भी चोरी हुई है. यही नहीं बैंक के खातों के नंबर भी चोरी संभव है, क्योंकि लोग अपना पीएफ निकलवाते भी हैं.

सरकार ने किया नजरअंदाज

मार्च महीने में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय की तरफ से लोकसभा में दिए जानकारी के अनुसार अप्रैल 2017 से लेकर जनवरी 2018 के बीच कुल 114 सरकारी वेबसाइट हैक की गईं. गौरतलब है कि 6 अप्रैल को रक्षा, गृह और कानून मंत्रालय वगैरह की वेबसाइटों को हैक करने की खबरें आईं, लेकिन सरकार ने उनको हार्डवेयर की समस्या बताकर खारिज कर दिया था.

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'सेक्यूजीनियस साइबर सुरक्षा फर्म' के सीईओ क्षितिज अदलखा ने बताया कि, ' ये लीक इसलिए होते हैं क्योंकि सरकार कोई पहल करने के बजाए हमेशा प्रक्रियात्मक मुद्रा में रहती है. शुरुआत में हम सुरक्षा के बारे में कोई क़दम नहीं उठाते. कोई गड़बड़ी होने के बाद ही कुछ करते हैं.

ईपीएफओ ने सरकार की वेबसाइट से डेटा लीक होने की बात कप हरिज किया है लेकिन गौरतलब है कि सीएससी द्वारा दी जाने वाली साड़ी सुविधाओं को फ़िलहाल रोक दिया गया है. ईपीएफओ का कहना है कि उसने सीएससी की 'संवेदनशीलता की जांच' लंबित रहने तक इन सेवाओं को रोका है.

First published: 3 May 2018, 7:34 IST
 
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