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हेडली के बयान से पाकिस्तान पर कोई असर होगा?

विवेक काटजू | Updated on: 10 February 2016, 9:08 IST
QUICK PILL
  • मुंबई हमले के अभियुक्त डेविड हेडली ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अमेरिकी जेल से मुंबई की अदालत में गवाही दी. हेडली ने हमले के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के बीच सांठगांठ की बात अदालत को बतायी.
  • भारत की नरेंद्र मोदी सरकार पाकिस्तान के साथ वार्ता शुरू कर रही है. ऐसे में उसे सुनिश्चित करना होगा कि पाकिस्तान वार्ता के प्रति अपनी गंभीरता साबित करने के लिए मुंबई और पठानकोट हमले के लिए जिम्मेदार आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करे.

मुंबई हमले के अभियुक्त डेविड कोलमैन हेडली ने सोमवार को मुंबई कोर्ट को जो कुछ बताया वो भारतीय खुफिया एजेंसियों को पहले से पता रहा होगा. इनमें से कुछ जानकारी तो पहले पब्लिक डोमेन में थी. लेकिन इससे इन जानकारियों को महत्व कम नहीं हो जाता.

मुंबई में 26 नवंबर 2008 में हुए आतंकी हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले किसी अभियुक्त ने पहली बार भारतीय अदालत के सामने बयान दर्ज कराया. वो भी देश से बाहर से.

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हेडली कोई मामूली जिहादी नहीं है. वो पढ़ा लिखा है. वो एक पाकिस्तानी-अमेरिकी है जिसके अच्छे संपर्क हैं. लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (आईएसआई) के संबंधों के बारे में उसने अहम जानकारियां दी हैं जिन्हें भारतीय साजिश कहकर नहीं ठुकराया जा सकता.

हेडली की तुलना अजमल कसाब से करें तो आपको दोनों के बीच का अंतर समझ आएगा. कसाब हमले में शामिल था. वो अनपढ़ था. वो इस खतरनाक संगठन का एक पैदल सिपाही था. हेडली की स्थिति इसके ठीक उलट है.

क्या भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत और आतंकवाद को बढ़ावा साथ-साथ चल सकते हैं?

हेडली ने अदालत को बताया कि उसे भारत के खिलाफ जिहाद करने के लिए हाफीज सईद ने प्रेरित किया था. उसके बयान से जाहिर है कि उसके दिल में आज भी सईद के लिए सम्मान है क्योंकि वो अपने बयान के दौरान सईद को 'साहिब' कहकर संबोधित कर रहा था.

ये बहुत बड़ा उद्घाटन नहीं है लेकिन इससे पाकिस्तान के आतंकियों पर कार्रवाई करने के मंसूबों पर सवाल खड़े होते हैं. भारत लगातार कहता रहा है कि सईद मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है.

सईद को हिरासत में रखने के तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद पाकिस्तान उसे आजादी से घूमने दे रहा है. वो भारत के खिलाफ आतंकवाद को खुलेआम बढ़ावा देता है.

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अब सवाल ये है कि पाकिस्तान के संग भारत के रिश्तों को बेहतर बनाने की मंशा जाहिर करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सलाहकार इस जानकारी का इस्तेमाल किस तरह करना चाहेंगे?

ये सबूत बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एलईटी और आईएसआई के संबंध को कानूनी तौर पर प्रमाणित किया जा सकता है. इसे किसी तरह प्रभावित भी नहीं किया जा सकता है. इस मामले में खुद हेडली पर भी कोई बाहरी दबाव बनाना मुश्किल है क्योंकि वो अमेरिकी जेल में बंद है.

हेडली ने अदालत को बताया कि किस तरह एलईटी और उसके स्पांसर आईएसआई ने मुंबई हमलों की योजना बनाई

अब ये देखना है रुचिकर होगा कि भारतीय राजनयिक और रणनीतिकार किस तरह पाकिस्तान पर इसके माध्यम से दबाव बनाते हैं या वो पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के हृदय परिवर्तन का इंतजार करते रहेंगे.

हेडली ने अदालत को बताया कि किस तरह एलईटी और उसके स्पांसर आईएसआई ने मुंबई हमलों की योजना बनाई. उनकी दो कोशिशें नाकाम हो गईं फिर भी उन्होंने तीसरी बार प्रयास किया जो सफल रहा.

पाकिस्तानी सेना को अब तहरीक-ए-तालिबान(टीटीपी) के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी. आतंकवादियों के सहारे छद्म युद्ध पर लगाम लगानी होगी. ताकि भारत के संग उसके रिश्तों की तल्खी कम हो.

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भारत सरकार को पाकिस्तान को ये बात अच्छी तरह समझाना होगा. अभी तक इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि पाकिस्तान ऐसा कोई कदम उठा रहा है.

अमेरिका ने हेडली की गवाही में मदद करके काफी भारत के संग सहयोग किया है. जाहिर है कि ये अमेरिका की पाकिस्तान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है. अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में आतंकियों का इस्तेमाल करना बंद करे.

पठानकोट हमले के जख्म अभी ताजा हैं. हेडली के बयान से मुंबई के भी घाव उभर आए हैं

ये तय है कि पाकिस्तान अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करेगा. अमेरिका एक सीमा से आगे नहीं जा सकता. पाकिस्तान हमेशा ही अमेरिका को नचाता रहा है. अभी अमेरिका को अफगानिस्तान में पाकिस्तानी मदद की जरूरत है.

हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका दोहरा मापदंड अपना रहा है. वो चाहता तो पाकिस्तान पर दबाव बना सकता था कि मुंबई हमलों के अभियुक्तों की प्रत्यर्पण किया जाए ताकि उनपर अमेरिकी अदालत में सुनवाई हो.

पठानकोट हमले के जख्म अभी ताजा हैं. हेडली के बयान से मुंबई के भी घाव उभर आए हैं. पाकिस्तान ने पठानकोट हमले की जांच के लिए विशेष जांच दल बनाया है. भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार(एनएसए) और विदेश सचिव पाकिस्तान के साथ इस मामले में नियमित संपर्क में हैं.

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लेकिन अभी तक इस बात के कोई संकेत नहीं मिले हैं कि पाकिस्तान इस जांच को लेकर गंभीर है. अभी तक जो खबरें आई हैं उनसे यही लगता है कि भारत द्वारा दिए गए सुराग उनके लिए पर्याप्त नहीं हैं.

देखना ये है कि क्या मोदी पाकिस्तान पर अपनी रणनीति बदलने का दबाव बना सकते हैं. और अगर पाकिस्तान अपना रवैया नहीं बदलता तो क्या वो फिर भी दोनों देशों के संग वार्ता जारी रखना चाहेंगे.

क्या भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत और आतंकवाद को बढ़ावा साथ-साथ चल सकते हैं?

अगर पाकिस्तान अपने वादे नहीं निभाता तो मोदी के लिए पाकिस्तान के प्रति पहले से सशंकित रहने वाली भारतीय जनता को समझाना मुश्किल होगा. भारत की पाकिस्तान नीति के लिए ये एक निर्णायक मोड़ है.

First published: 10 February 2016, 9:08 IST
 
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