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जेटली के इस्तीफे की धमकी के बाद आजाद को हटाया, आरएसएस नाराज

समीर चौगांवकर | Updated on: 27 December 2015, 9:08 IST
QUICK PILL
  • दरभंगा से भाजपा सांसद कीर्ति आजाद को डीडीसीए विवाद में पार्टी से बाहर किए जाने पर भाजपा के भीतर कुछ लोगों के साथ ही आरएसएस भी नाराज है.
  • पार्टी के अदरूनी सूत्रों के मुताबिक मोदी और शाह उन्हें पार्टी से निकाले जाने के हक में नहीं थे लेकिन जेटली के इस्तीफे की धमकी के बाद अमित शाह ने कार्रवाई की.

डीडीसीए में भ्रष्टाचार को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली को घेरने और पार्टी को असहज कर रहे भाजपा सांसद कीर्ति आजाद को पार्टी से निलंबित करने का निर्णय जेटली के इस्तीफा देने की धमकी के बाद किया गया था. भाजपा अध्यक्ष शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजाद को पार्टी से निकालने पर सहमत नहीं थे.

इस मसले पर जेटली को राष्ट्रीय स्वंससेवक संघ (आरएसएस) का साथ भी नहीं मिला है. खबर है कि आजाद के निलंबन से आरएसएस खफा है. एक मीडिया चैनल से बात करते हुए आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ''हमसे इस मुद्दे पर कोई भी चर्चा नहीं की गई और ऐसा लगता है कि पार्टी ने आम आदमी पार्टी के दबाव में जल्‍दबाजी में झुकने वाला काम किया है.''

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी से आजाद का निलंबन नहीं चाहते थे

आरएसएस का मानना है कि डीडीसीए में भ्रष्टाचार से केंद्र सरकार का कुछ लेना देना नहीं है और इस लड़ाई को अलग तरीके से लड़ा जाना चाहिए था. कीर्ति आजाद द्वारा डीडीसीए में भ्रष्‍टाचार के लगाए गए आरोप नए नहीं और वह इन्‍हें काफी लंबे वक्‍त से उठाते रहे हैं.

जेटली ने दी पद छोड़ने की धमकी

पार्टी का एक धड़ा आजाद को निकालने का पक्षधर था, वहीं दूसरा तुरंत कार्रवाई करने के पक्ष में नहीं था. सूत्रों की मानें तो मोदी और शाह चाहते थे कि जिस तरह शत्रुघ्न सिन्हा को नजरअंदाज किया जा रहा है, वैसे ही कीर्ति को नजरअंदाज किया जाए.

नाम ना छापने की शर्त पर भाजपा के एक सीनियर लीडर ने बताया, जेटली ने मंगलवार रात को ही शाह को फोन कर साफ कह दिया था अगर कीर्ति को बाहर नहीं किया गया तो वह संसदीय बोर्ड से इस्तीफा दे देंगे. जेटली ने पार्टी अध्यक्ष को साफ कर दिया था कि वह मंत्री बने रहेंगे लेकिन पार्टी के बाकी सभी पदों से और जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे देंगे.

शाह का कहना था, सिर्फ कीर्ति पर कार्यवाही से गलत संदेश जाएगा पर जेटली अड़ गए. शाह ने रूस रवाना हो रहे पीएम से जेटली की जिद को लेकर चर्चा की. मोदी से अनुमति मिलने के बाद शाह ने कीर्ति को निलंबित किया.

वित्त मंत्री के पद है स्वामी की नजर

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी निलंबित कीर्ति आजाद के पक्ष में आकर जेटली से हिसाब चुकता करना चाहते हैं. गौरतलब है कि सुब्रमण्यम स्वामी 1990-91 में योजना आयोग के सदस्य, वाणिज्य, विधि एवं न्याय मंत्री और बाद में अन्तरराष्ट्रीय व्यापार आयोग के अध्यक्ष भी रहे.

स्वामी का दावा है कि उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल के दौरान भारत में आर्थिक सुधारों के लिए खाका बनाया था. हालांकि, राजनैतिक अस्थिरता और कम समय के लिए प्रधानमंत्री रहने के कारण चंद्रशेखर स्वामी की सलाह को लागू नहीं कर सके. बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव के नेतृत्व में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 1991 में काफी हद तक लागू किया गया.

आजाद का साथ देकर स्वामी वित्त मंत्री जेटली से अपना पुराना हिसाब चुकता करना चाहते हैं

गांधी परिवार को लगातार घेरने और कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी करने वाले स्वामी को भाजपा ने अपने साथ आने का न्यौता दिया था. बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेता और अभी गृहमंत्री राजनाथ सिंह के कहने और संघ के सहयोग के बाद स्वामी ने भाजपा में अपनी पार्टी जनता पार्टी का विलय कर लिया.

हावर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त कर चुके स्वामी की नजर मोदी सरकार में वित्त मंत्री बनने की थी. स्वामी ने अपनी यह इच्छा जाहिर भी किया था. स्वामी को भरोसा दिलाया गया था कि केंद्र में एनडीए की सरकार बनने पर उनका ख्याल रखा जाएगा.

हालांकि, सरकार बनने के बाद अरूण जेटली ने वित्त मंत्रालय अपने लिए मांग लिया. तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने स्वामी का नाम आगे किया लेकिन जेटली ने मोदी और शाह पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रक्षा के साथ वित्त मंत्रालय भी खुद रख लिया. यही नहीं जेटली सुब्रमण्यम स्वामी को अपने अधीन वित्त राज्य मंत्री का दर्जा देने को भी तैयार नहीं थे.

जेटली द्वारा बोए गए कांटे ही सुब्रमण्यम स्वामी को अब खटक रहे है और वे कीर्ति का साथ देकर जेटली से अपना हिसाब बराबर करने की कोशिश में है. स्वामी को उम्मीद है कि जेटली का इस्तीफा होगा तो उन्हे वित्त मंत्री बनाया जा सकता है.

First published: 27 December 2015, 9:08 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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