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अनुराग ठाकुर शायद भूल गए हैं कि वो जनप्रतिनिधि भी हैं

चारू कार्तिकेय | Updated on: 24 April 2016, 10:07 IST
सबसे पहले मैं आपको ये बता दूं कि मैं क्रिकेट का जानकार नहीं हूं. गली लेवल से आगे की क्रिकेट मैं खेल नहीं पाया. बल्लेबाजी में मैं बुरा था, फील्डिंग में औसत और गेंदबाजी में औसत से भी कम.

मुझे याद नहीं कि सचिन तेंदुलकर ने अपने क्रिकेट करियर में कितने शतक बनाए हैं. मुझे सचिन का बैटिंग एवरेज भी नहीं पता. क्रिकेट की पारिभाषिक शब्दावाली के बारे में मेरी जानकारी लगभग हास्यास्पद ही है.

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मैं राजनीतिक संवाददाता हूं. इसलिए उन सभी चीजों में नज़र रखनी पड़ती है जिनमें हमारे नेता रुचि रखते हैं. आप भी जानते हैं कि क्रिकेट में हमारे नेता कुछ ज्यादा ही रुचि रखते हैं.

मेरे कई दोस्त, पड़ोसी और परिवार वाले क्रिकेट के जबरदस्त फैन हैं. इसलिए मैं अच्छी तरह समझता हूं कि इस खेल से लोगों की भावनाएं कितने गहराई से जुड़ी हुई हैं. हमारे देश में क्रिकेट की लोकप्रियता देखते हुए इस जनहित का विषय कहा जा सकता है. लेकिन जब इस खेल क कर्ता-धर्ता इस जनहित के संग हेराफेरी करते नजर आते हैं तो मुझे दुख होता है.

वरिष्ठ क्रिकेट विश्लेषक क़ैसर मोहम्मद अली बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय क्रिकेट के जमींदार कहते हैं

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) के 88 साल के इतिहास में इसे एक रियासत की तरह चलाया जाता रहा है. वरिष्ठ क्रिकेट विश्लेषक क़ैसर मोहम्मद अली बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय क्रिकेट के जमींदार कहते हैं.

अली के अनुसार इन जमींदारों ने इस खेल और दुनिया के सबसे अमीर खेल बोर्ड बीसीसीआई पर कब्जा कर रखा है. जमींदारों की तबीयत के अनुरूप बीसीसीआई में भ्रष्टाचार और कदाचार का भी लंबा इतिहास रहा है.

बीसीसीआई को जवाबदेह बनाने की लंबे समय से कोशिश की जाती रही है लेकिन इसका नतीजा अब तक सिफर ही रहा है. लोढ़ा कमिटी की जांच और अनुशंसा के बाद पहली बार बोर्ड के माथे पर शिकन आती दिख रही है. फिर भी भारतीय सुप्रीम कोर्ट कमिटी की अनुशंसा को लागू करने को लेकर अडिग नजर आ रहा है.

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बीसीसीआई के सचिव और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर के अनुसार बोर्ड को निशाना बनाया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईपीएल पर अख्तियार किए गए रुख पर भी ठाकुर काफी परेशान नजर आए. उन्होंने आईपीएल को भारत से बाहर ले जाने की धमकी देते हुए कहा, "कोर्ट में आईपीएल के खिलाफ दायर की जार रही जनहित याचिकाओं (पीआईएल) के कारण बहुत नुकसान हुआ है."

अनुराग ठाकुर भूल गए हैं क्रिकेट अब इस देश में एक जनहित का विषय बन चुका है

मुनाफे की चिंता में अनुराग ठाकुर खुद अपने बयान के विरोधाभास को देखने में चूक गए. वो भूल गए कि वो एक सांसद है जो जनप्रतिनिधि होता है. जिसका कर्तव्य जनहित की रक्षा करना होता है. लेकिन उन्हें जनहित से ज्यादा बीसीसीआई और उसके मुनाफे की पड़ी है.

अनुराग ठाकुर देश की सत्ताधारी पार्टी से संबंध रखते हैं इसलिए उनका ये रुख और भी ज्यादा चिंताजनक है. हो सकता है कि ज्यादा मुनाफे के लिए आईपीएल को भारत के बाहर लेते जाएं.  अगर ऐसा होता है तो क्या ये 'भारत माता जय' की राजनीति करने वाली पार्टी के नेता का दोहरा चरित्र नहीं होगा?

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मेरी सीमित राय में आईपीएल क्रिकेट कम है मनोरंजन ज्यादा है. सट्टेबाजी, स्पॉट फिक्सिंग और मैच फिक्सिंग का इससे नाभिनाल का संबंध प्रतीत होता है. ऐसे में 2009 की तरह इसे देश के बाहर ले जाने के बजाय सुप्रीम कोर्ट की मानते हुए इसकी खामियों को दूर किया जाना चाहिए. क्योंकि आईपीएल को देश से बाहर ले जाना आसान है लेकिन आईपीएल से गंदगी बाहर करना बहुत कठिन है.

लाखों भारतीयों की भावनाएं क्रिकेट से जुड़ी हुई हैं इसलिए जरूरी है कि इसमें पारदर्शिता आए. इसके लिए जरूरी है कि नेता लोग क्रिकेट में राजनीति करना बंद करें.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

First published: 24 April 2016, 10:07 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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