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कन्हैया अगर एकता की कीमत नही समझेंगे तो सीपीआई गंगा ढाबा तक सिमट कर रह जाएगी

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 11 September 2016, 7:38 IST

भारतीय राजनीति में हाल ही में कूदे जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र नेता कन्हैया कुमार ने गुरुवार को कोलकाता का दौरा किया. वहां उन्होंने सीपीईएम कार्यकताओं से खचाखच भरे हॉल में संबोधन दिया. ऐसा लगा मानो उन्होंने अपने भाषण से सीपीआई-एम और उसके कार्यकर्ताओं में प्राण फूंक दिए हों.

कन्हैया ने माकपा नेता प्रकाश करात द्वारा लिखे गए लेख पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, सीपीईएम के कुछ वरिष्ठ नेता जेएनयू के छात्र रह चुके हैं. कन्हैया ने कहा मोदी सरकार तानाशाह है न कि फासीवादी. उन्हें मैं कहना चाहता हूं कि ‘कॉमरेड अगर आप और नहीं लड़ना चाहते तो कृपया सेवानिवृत्ति लेकर अमेरिका चले जाएं. हम अपनी लड़ाई खुद लड़ लेंगे.’

बंगाल में सीपीएम-कांग्रेस गठबंधन पर गेंद सीपीएम के पाले में डालते हुए कन्हैया ने कहा कि इसका जवाब सीताराम येचुरी देंगे, वे नहीं.

सीपीआई के वरिष्ठ नेताओं को कन्हैया की बातें लुभा गईं. सीपीआईके पूर्व राज्य सचिव मंजू कुमार मजूमदार ने दार्शनिक रुख अपनाते हुए कहा ऐसे शानदार भाषण के बारे में कुछ भी कहने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं. उन्हें अब यह आकलन करने की जरूरत महसूस हो रही है कि उन्हें क्या हासिल हुआ और उनके लिए ‘आजादी’ के मायने भी बदल चुके हैं. उन्हें अब एहसास हो रहा है कि वे भी ‘आजादी’ चाहते हैं.

हालांकि कन्हैया का भाषण और उसकी राजनीतिक विचारधारा के पीछे दो वजहें छिपी हैं-

वामपंथियों की प्राथमिकता भारतीय राजनीति में अपना अस्तित्व बचाने की है और इसके लिए राजनीतिक आधार ढूंढना होगा

पहला वाम राजनीति एक महत्वूर्ण मोड़ पर खड़ी है. लोकतांत्रिक वाम को रास्ता दिखाने वाली सीपीएम बंगाल में धराशायी हो चुकी है और देश के अन्य हिस्सों में यह पहले से ही सुप्तावस्था में है. केरल को अपवाद मान सकते हैं. वामपंथियों की पहली प्राथमिकता भारतीय राजनीति में अपना अस्तित्व बचाने की है और इसके लिए उन्हें अपना राजनीतिक आधार ढूंढना होगा.

राजनीतिक लाभ उठाने के लिए वामपंथियों के पास कॉमन एजेंडा है और उनका एक ही दुश्मन है- नरेंद्र मोदी और उनकी केंद्र सरकार, जो कुछ लोगों के लिए फासीवादी है तो कुछ के लिए रूढ़िवादी.

परन्तु इन वामपंथियों में एकता का अभाव है. जब पूरा का पूरा वामपंथी दल ही संख्या में घटता जा रहा है तब वाम दलों के लिए जरूरी है कि वे सभी लोकतांत्रिक कम्युनिस्ट पार्टियों, कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं व गैर सरकारी संगठनों को मिला कर एक महागठबंधन बनाएं.

कन्हैया को समझना होगा कि सार्वजनिक तौर पर वामपंथी साझेदारों की आलोचना करना वाम राजनीति के भविष्य के लिए खतरा है. मीडिया निश्चित रूप से इन भाषणों पर रोटियां सेकेगा.

बंगाल में बड़ी प्रसार संंख्या वाले अखबार टेलीग्राफ की हेडलाइन है- ‘अंकल इफ यू कैन नॉट फाइट, गो टू न्यूयॉर्क’. जनता भी इतनी मूर्ख नहीं है कि वह एक ही विचारधारा पर बार-बार भरोसा कर ले, जो कि छिन्न-भिन्न अवस्था में है और उसके भविष्य का कोई ठिकाना नहीं है.

बंगाल में सीपीआई की चुनावी सफलता पूरी तरह सीपीएम के भविष्य पर निर्भर हैं

दूसरा, कन्हैया को शायद यह कहावत पता नहीं है- ‘जैसा देश, वैसा भेष’. उन्होंने कहा कि वह अपना भाषण वाम दलों की विफलताएं गिनाने के साथ शुरू करना चाहते हैं. बजाय वामपंथियों के विचाराधारात्मक दुश्मन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की आलोचना करने के.

कभी काफी ताकतवर राजनीतिक पार्टी रही सीपीआई को 2016 के बंगाल विधानसभा चुनावों में बस एक ही सीट पर जीत मिली और दूसरे वामपंथी दलों सीपीएम, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी व वाम मोर्चा के दूसरे बड़े साझीदारों के मुकाबले बेहद कम वोट हासिल हुआ. 2011 में सीपीआई को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी.

बंगाल में सीपीआई की चुनावी सफलता पूरी तरह सीपीएम के भविष्य पर निर्भर हैं. सीपीएम कार्यकर्ता ही तो सीपीआई के लिए प्रचार करते हैं और सीपीएम के ही मतदाता सीपीआई को वोट देते हैं.

अगर अगले चुनाव में सीपीएम की सीटें और कम आती हैं तो सीपीआई संभवतः राज्य में खाता भी न खोल पाए और अगर सीपीएम के नेता ‘सेवानिवृत्त’ हो जाते हैं तो कन्हैया की पार्टी का क्या होगा. फिर या तो वे दिल्ली के अपने घरों की बैठक में वैचारिक युद्ध करेंगे या फिर गंगा ढाबा, जेएनयू में.

इतनी सारी मुसीबतों को देखते हुए सीपीआई कार्यकर्ताओं को कन्हैया के इस आजादी वाले नाटकीय ड्रामे से बचना होगा और बिना इसके प्रभाव में आए जमीनी राजनीति पर उतरना होगा, वह भी एकता के साथ और अंदरूनी मतभेद जनता के सामने न आए तो बेहतर है.

First published: 11 September 2016, 7:38 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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