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पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल को मिला था 'ओआरओपी' का फायदा, बैंक ने की गड़बड़ी!

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 November 2016, 9:29 IST
(एजेंसी)

दिल्ली में जहर खाकर आत्महत्या करने वाले पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल के मामले पर जहां देश की सियासत गरमाई हुई है. वहीं इस मामले में रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उन्हें ‘ओआरओपी’ के तहत पेंशन योजना का फायदा मिला था.

हालांकि इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय का यह भी कहना है कि उन तक यह सुविधाएं इसलिए नहीं पहुंच पाईं क्योंकि हरियाणा के भिवानी जिला स्थित एसबीआई की शाखा के हिसाब में कुछ गड़बड़ी हुई थी.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस खामी की वजह से ग्रेवाल को छठे वेतन आयोग के तहत ‘वन रैंक वन पेंशन योजना’ के जरिए उतनी रकम नहीं मिल पाई, जितनी उनको मिलनी चाहिए थी.

रक्षा मंत्रालय का कहना है, "ओआरओपी के दायरे में सभी पूर्व सैनिकों की शिकायतों का हल करना उनकी प्रमुख प्राथमिकता है और ग्रेवाल की आत्महत्या की गंभीरता से जांच होगी."

मंत्रालय के मुताबिक ग्रेवाल ने टेरिटोरियल आर्मी में छह साल 11 महीने की सेवा दी, जिसके बाद वह रक्षा सुरक्षा कोर में रहे.

मंत्रालय के मुताबिक उनकी सेना में उनकी सेवाओं को देखते हुए वो ‘ओआरओपी’ के पूरी तरह से हकदार थे. उनके अन्य सहकर्मियों की तरह उन्हें पूर्व सैनिक कल्याण प्रकोष्ठ से संपर्क करना चाहिए था.

रक्षा अधिकारियों का कहना है कि अगर रामकिशन ग्रेवाल ने सीधे मंत्रालय का रुख किया होता तो उनके मामले का हल भी सैकड़ों अन्य की तरह सौहार्दपूर्ण तरीके से हो जाता.

मंत्रालय का कहना है, "31 अक्टूबर वाला रामकिशन ग्रेवाल का खत और एक नवंबर को उनकी आत्महत्या ने कई सवाल खड़े किए हैं. इस बारे में गंभीर जांच किए जाने की जरूरत है कि मृतक के साथ कौन था जब उन्होंने यह कठोर कदम उठाया. किसने उन्हें जहर मुहैया किया और क्या किसी ने उनकी मनोदशा का फायदा उठाकर इस कदम के लिए उन्हें उकसाया था."

मंत्रालय का कहना है कि मृत पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से ना तो उनके कार्यालय में ना ही घर पर मिलने का समय मांगा था.

इस बीच रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि सरकार पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और वन रैंक वन पेंशन योजना के तहत कुल 5,507.47 करोड़ रुपया बांटा गया है.

First published: 3 November 2016, 9:29 IST
 
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