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जेएनयू छात्रसंघ चुनाव: जानिए अध्यक्ष पद के लिए किसके बीच है टक्कर?

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 September 2016, 13:03 IST
(फेसबुक)

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में आज छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान हो रहा है. नौ फरवरी की घटना की पृष्ठभूमि में जेएनयू छात्रसंघ चुनाव पर इस बार हर किसी की खास नजर है.

आरोप है कि उस घटना में कथित रूप से देश विरोधी नारे लगाए गए थे. इस मामले में जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत दो अन्य छात्र गिरफ्तार हुए थे. हालांकि उन्हें बाद में जमानत मिल गई थी. हाल ही में हाईकोर्ट ने जेएनयू प्रशासन की ओर से किसी भी कार्रवाई पर 19 सितंबर तक रोक लगा दी है.

कन्हैया का छात्र संगठन मैदान में नहीं

जेएनयू में सेंट्रल पैनल के लिए कुल 18 उम्मीदवार मैदान में हैं. मतदाताओं की संख्या करीब 8600 है. जेएनयू छात्र संघ चुनाव के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त इशिता माना ने कहा कि 18 उम्मीदवार सेंट्रल पैनल के लिए मैदान में हैं जबकि 79 उम्मीदवार विश्वविद्यालय के विभिन्न केंद्रों में काउंसलर पदों के लिए मैदान में हैं.

खास बात यह है कि सीपीआई से जुड़ा एआईएसएफ (ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन) इस बार चुनाव नहीं लड़ रहा है. वर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार इसी संगठन के सदस्य हैं. एक नजर जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में ताल ठोक रहे प्रमुख उम्मीदवारों पर:

कौन-कौन उम्मीदवार?

मोहित के पांडे- आइसा-एसएफआई

सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज (स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज) के पीएचडी छात्र मोहित के पांडे अध्यक्ष पद के लिए आइसा और एसएफआई के संयुक्त उम्मीदवार है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के रहने वाले मोहित ने बीए की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है. इसके अलावा पीजी की पढ़ाई के लिए वो भोपाल में रहे. वह सीपीआई एमएल से भी जुड़े रह चुके हैं. लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मोहित आइसा कार्यकर्ताओं के संपर्क में आए. चुनाव में उनका मुख्य मुद्दा सामाजिक न्याय के साथ ही डायरेक्ट पीएचडी पाठ्यक्रम में आरक्षण को लागू कराना है. इसके अलावा यौन उत्पीड़न के मुद्दों पर भी वो जेंडर सेंसिटाइजेशन कमिटी को मजबूत करना चाहते हैं.

जान्हवी ओझा- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद

एबीवीपी की उम्मीदवार जान्हवी ओझा बिहार के छपरा से ताल्लुक रखती है. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की है. जान्हवी स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के पैरासिटॉलोजी (परजीवी विज्ञान) विभाग में पीएचडी छात्रा हैं. गैर राजनीतिक घराने से आने वाली जान्हवी 2012 में जेएनयू में एडमिशन लेने के बाद से राजनीति में सक्रिय हैं. ओझा का कहना है कि जेएनयू में 9 फरवरी की घटना से पहले उनका चुनाव लड़ने की तरफ कोई रुझान नहीं था. लेकिन इसके बाद उन्होंने छात्रसंघ चुनाव में उतरने का फैसला लिया. उनका मुख्य एजेंडा जीएस कैश को मजबूत करने के साथ ही जेएनयू कैंपस को कंप्लीट वाई-फाई जोन में तब्दील करना है. 

सोनपिंपले राहुल पूनाराम- बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन 

बाप्सा (बीएपीएसए) के उम्मीदवार सोनपिंपले राहुल पूनाराम सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम में एम फिल के छात्र हैं. महाराष्ट्र के नागपुर के झुग्गी से आने वाले सोनाराम की मां एक कंस्ट्रक्शन वर्कर हैं. बेहद गरीब परिवार से आने वाले पूनाराम ने रिक्शा चालक पिता की मौत के बाद सातवीं तक की पढ़ाई के लिए होटल में बर्तन तक धुले हैं. नागपुर से ही उन्होंने समाज शास्तर में स्नातक की पढ़ाई की है. पढ़ाई के दौरान वो अंबेडकर आंदोलन से जुड़ गए. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से एमए की पढ़ाई करते हुए वे जेएनयू के 'यूनाइटेड दलित स्टूडेंट्स' के संपर्क में आए. उनका मुख्य एजेंडा मौखिक परीक्षा के अंक घटाने के साथ ही दलित, आदिवासियों, महिलाओं, पूर्वोत्तर और कश्मीर के लोगों के बीच एकता बनाना है.

सनी धीमान- नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया

कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई से चुनाव लड़ रहे सनी धीमान जेएनयू के सेंटर फॉर स्टडीज इन साइंस पॉलिसी के शोध छात्र हैं. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से आने वाले धीमान शुरुआती दौर में लेफ्ट के संगठन एआईएसएफ से जुड़े थे. वर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार से कुछ निजी मतभेदों की वजह से उन्होंने एआईएसएफ को छोड़ दिया और एनएसयूआई में शामिल हुए. स्नातक की शिक्षा मुजफ्फरनगर से पूरी करने के बाद धीमान ने नोएडा की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी से पीजी किया है. यहीं पर वो अंबेडकरवादी विचारधारा के करीब आए. ओबीसी समुदाय से आने वाले धीमान 2013 में एआईएसएफ से जीएसकैश का चुनाव लड़ने वाले इकलौते उम्मीदवार थे. धीमान का मानना है कि जेएनयू में धुर वामपंथी और धुर दक्षिणपंथी के बजाए सेंटर लेफ्ट यूनियन की जरूरत है. उनका मुख्य एजेंडा आरएसएस की विचारधारा को चुनाव में हराना है. सनी धीमान का सबसे बड़ा मुद्दा हॉस्टल की समस्या को सुलझाना है.

दिलीप कुमार- स्टूडेंट्स फ्रंट फॉर स्वराज (एसएफएस)

उत्तर प्रदेश के जौनपुर से आने वाले दिलीप कुमार स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में हिंदी अनुवाद विभाग के पीएचडी छात्र हैं. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में बीए की पढ़ाई के दौरान उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ी. छात्रों को स्कॉलरशिप दिलवाने की सुनिश्चितता से लेकर कर्मचारियों की तनख्वाह के लिए दिलीप कुमार ने अभियान चलाया था. हालांकि दिलीप का कहना है कि वे कभी किसी संगठन से नहीं जुड़े रहे हैं. जेएनयू के संस्कृत विभाग में एमए छात्र के तौर पर उन्होंने 2011 में एडमिशन लिया था.

इसके बाद उनका सबसे पहला राजनीतिक जुड़ाव आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन सीवाईएसएस (छात्र युवा संघर्ष समिति) से रहा. जेएनयू के प्रोफेसर आनंद कुमार और योगेंद्र यादव से प्रेरणा लेकर वह एक वैकल्पिक राजनीति के विचार के साथ आप से जुड़े. हालांकि आप से आनंद कुमार के हटने के बाद उन्होंने सीवाईएसएस से नाता तोड़ लिया. स्वराज अभियान लॉन्च होने के बाद स्टूडेंट्स फ्रंट फॉर स्वराज की स्थापना हुई. माना जा रहा है कि सीवाईएसएस की आधी से ज्यादा जेएनयू यूनिट इसमें शामिल हो चुकी है. स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज के काउंसिलर होने के साथ ही दिलीप अपने हॉस्टल के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उनका मुख्य एजेंडा लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के विरोध के साथ ही अल्पसंख्यक छात्रों से जुड़े मुद्दे हैं. 

First published: 9 September 2016, 13:03 IST
 
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