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जब केजरीवाल की वजह से दिल्ली में पहली बार लगा राष्ट्रपति शासन, मात्र 49 दिन रहे मुख्यमंत्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 February 2020, 16:10 IST

Delhi Election 2020: दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर मतदान हो चुका है. 11 फरवरी को चुनाव के रिजल्ट आएंगे. इससे पहले लगभग सभी एग्जिट पोल्स में एक बार फिर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने का अनुमान लगाया गया है. इसका मतलब यह है कि अरविंद केजरीवाल लगातार तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बन सकते हैं.

अरविंद केजरीवाल के अन्ना आंदोलन के आंदोलन से निकलकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने तक का सफर बहुत ही रोचक है. साल 2013 के विधान सभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ा था. इस सीट पर उनकी सीधी टक्कर 15 साल से दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित से थी.

शीला दीक्षित को हरा मचा दी थी सनसनी

केजरीवाल ने तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 25864 वोटों से हराकर दिल्ली की राजनीति में तूफान ला दिया था. केजरीवाल को उस चुनाव में कुल 44269 वोट मिले थे, वहीं शीला दीक्षित को केवल 18405 वोट ही प्राप्त हुए थे. एक नौकरशाह से सामाजिक कार्यकर्ता और फिर राजनेता बने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में धमाकेदार प्रवेश किया था. 

आम आदमी पार्टी ने 2013 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 28 सीटें जीतकर दिल्ली की राजनीति में खलबली मचा दी थी. हालांकि केजरीवाल ज्यादा दिन तक दिल्ली के सीएम नहीं रहे. इसके बाद दिल्ली में पहली बार राष्ट्रपति शासन लग गया. वह भी अरविंद केजरीवाल की वजह से लगा था. जब साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाराणसी पहुंच गए थे.

 

केजरीवाल की वजह से दिल्ली में पहली बार लगा था राष्ट्रपित शासन !

उस समय अरविंद केजरीवाल के ऊपर दिल्ली के सबसे कम कार्यकाल के मुख्यमंत्री होने का ठप्पा भी लगा. साल 2014 में वह केवल 49 दिनों के लिए मुख्‍यमंत्री रहे और फिर कुर्सी छोड़ लोकसभा का चुनाव लड़ने पहुंच गए थे. उनसे पहले सुषमा स्वराज के पास यह रिकॉर्ड था, जो मात्र 52 दिनों के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी थीं.

2015 का दिल्ली विधान सभा चुनाव

लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के हाथों हारने के बाद एक बार फिर अरविंद केजरीवाल दिल्ली का चुनाव लड़ने आए. तब उनके नेतृत्व में साल 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 70 में से रिकॉर्ड 67 सीटें जीतकर एक बार फिर सनसनी मचा दी थी. 14 फरवरी 2015 को वो एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए और लगातार पांच साल तक गद्दी संभाली.

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First published: 9 February 2020, 16:10 IST
 
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