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केंद्र बनाम केजरीवाल सरकार: सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 July 2016, 16:06 IST

दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग और दिल्ली सरकार के बीच शक्तियों के बंटवारे के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की है.

दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह का कहना है कि राज्यों और केंद्र की शक्तियों से जुड़े मुद्दे को देखना संविधान के तहत केवल सुप्रीम कोर्ट के ही अधिकार क्षेत्र में है. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच विवाद संविधान के अनुच्छेद 239-ए के तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) की शक्तियों के इर्द-गिर्द केंद्रित है.

आम आदमी पार्टी सरकार ने यह आरोप लगाया है कि वह काम करने में असमर्थ है क्योंकि इसके ज्यादातर फैसलों को उप राज्यपाल नजीब जंग के कहने पर रद्द कर दिया जाता है या बदल दिया जाता है. इसके लिए उप राज्यपाल की ओर से दलील दी जाती है कि दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है.

पहले सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर सुनवाई के तैयार नहीं था, लेकिन शुक्रवार को उसने कहा, "दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आने दीजिए और दिल्ली सरकार इस अदालत के समक्ष सभी मुद्दे उठाने को स्वतंत्र है." दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले पर भी रोक लगाने की मांग की है.

फरवरी, 2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद लगातार संवैधानिक शक्तियों के मसले पर दिल्ली सरकार का टकराव उप राज्यपाल और गृह मंत्रालय से होता रहा है. केजरीवाल सरकार और उप राज्यपाल नजीब जंग के बीच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और अधिकारियों की नियुक्ति के मसले पर हुई तकरार की मध्यस्थता दिल्ली हाईकोर्ट को करनी पड़ी थी.

उस समय दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि अधिकारियों की नियुक्ति आदि के मामले में मुख्यमंत्री को पूरे अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर कहा था कि उपराज्यपाल जो कर रहे हैं, वह उचित है. दिल्ली सरकार को उनके निर्देशों का पालन करना चाहिए.

आम आदमी पार्टी का यह भी कहना है कि दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच का विवाद सुप्रीम कोर्ट को सुनना चाहिए और कोर्ट ही यह फैसला दे कि दिल्ली राज्य है या नहीं.

First published: 1 July 2016, 16:06 IST
 
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