Home » इंडिया » While asking about Anna Hazare's statement Arvind Kejriwal evades media
 

'आहत' अन्ना के आक्रमण के आगे केजरीवाल ने डाले हथियार, मीडिया से काटी कन्नी

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 September 2016, 16:13 IST
(पीटीआई)

जिस जनलोकपाल आंदोलन की बुनियाद पर अरविंद केजरीवाल ने अपनी सियासी जमीन पर खड़ी की थी, उसी के अगुवा रहे अन्ना हजारे अब अरविंद केजरीवाल पर हमलावर हैं.

अन्ना ने आप सरकार के मंत्री संदीप कुमार का सेक्स सीडी कांड सामने आने के बाद जब सोमवार को अपनी जुबान खोली, तो अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा. कहा कि मैं बहुत दुखी हूं. कभी अन्ना और केजरीवाल की जुगलबंदी पूरे देश के जनमानस पर छाई हुई थी, लेकिन हाल के दिनों में अन्ना ने केजरीवाल से खुद को दूर कर लिया है.

जाहिर है गुरु के तरकश से निकले तीरों का केजरीवाल के पास फिलहाल कोई जवाब नहीं है. लिहाजा जब उनसे अन्ना हजारे के बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो चुप्पी साध ली.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अक्सर बयान देने में देरी नहीं लगाते. इस बार जब पत्रकारों ने उनसे अन्ना हजारे के बयान पर सवाल पूछा, तो कन्नी काटते हुए बगलें झांकने लगे. केजरीवाल ने मीडिया को बिना कोई जवाब दिए निकलने में ही भलाई समझी.

अन्ना का हमला जारी

इस बीच अन्ना हजारे का केजरीवाल पर हमलावर रुख जारी है. रालेगण सिद्धि में अन्ना ने कहा, "मेरा मानना है कि पार्टी (आप) में लोगों को शामिल करने से पहले सही तरीके से जांच नहीं की गई, इसी वजह से ऐसी नौबत आई है."

अन्ना हजारे ने केजरीवाल के रवैए पर निराशा जताते हुए कहा, "मुझे दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से काफी उम्मीदें थीं, उनके पास तेज दिमाग है."

सोमवार को भी साधा था निशाना

देशव्यापी जनलोकपाल आंदोलन के अगुवा रहे अन्ना हजारे ने इससे पहले भी केजरीवाल को कई बार नसीहत दी है. डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार अपने नेताओं को लेकर सवालों के घेरे में है. 

सीडी कांड के बाद अन्ना हजारे ने सोमवार को पहली बार बयान देते हुए कहा, "केजरीवाल उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं. पार्टी बनाते वक्त उन्हें कहा गया था कि ईमानदारी और साफ छवि वाले लोगों को ही लें, लेकिन पार्टी में दागदार छवि वाले लोग आ गए."

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग और आजादी की तीसरी लड़ाई बताए जा रहे अन्ना के लोकपाल आंदोलन के सहारे राजनीतिक जमीन तैयार करने वाले अरविंद केजरीवाल और उनके नजदीकी सहयोगियों को लेकर पहले भी रालेगण सिद्धि से नाराजगी के स्वर उठते रहे हैं.

पार्टी बनाने के फैसले के खिलाफ थे

अन्ना के जनलोकपाल आंदोलन में अरविंद केजरीवाल, किरन बेदी, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, जनरल वी के सिंह, मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण के अलावा ढेर सारे लोग सक्रिय थे. आंदोलन के बाद राजनीतिक पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने को लेकर भी अन्ना ने सार्वजनिक तौर पर मतभेद जाहिर किया था.

हालांकि अन्ना की नसीहत के बावजूद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बना ली और चुनाव लड़े. इसके बाद कांग्रेस के साथ मिलकर पहले दिल्ली में सरकार बनाई.

अन्ना हजारे ने इस दौरान खुद को केजरीवाल से दूर रखा. यही नहीं केजरीवाल ने अन्ना के पास जाकर उन्हें मनाने की कोशिश भी की. अब अन्ना हजारे का ताजा बयान आम आदमी पार्टी की मुश्किलों में इजाफा ही कर रहा है.

First published: 6 September 2016, 16:13 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी