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रजामंदी से बना 'अप्राकृतिक यौन संबंध' भी अपराध

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST

दिल्ली की एक अदालत ने 2014 के रेप के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि सहमति से बना अप्राकृतिक यौन संबंध भी अपराध की श्रेणी में आता है.

कोर्ट का कहना था कि इस केस को प्रथम दृष्टया देखने से पता चलता है कि आरोपी पायलट ने कथित तौर पर अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करते हुए महिला क्रू मेंबर के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाया.

जबकि मामले में आरोपी के वकील द्वारा यह दलील दी जा रही थी कि पूरा मामला आपसी सहमति से हुआ. इसलिए इस मामले को खत्म कर देना चाहिए, लेकिन इस कोर्ट को लगता है कि आरोपी का कार्य अपराध की श्रेणी में आता है.

इसलिए आरोपी पर यौन अपराध के लिए तय भारतीय दंड संहिता की सारी धाराओं के तहत केस चलेगा. 

रेप के मामले की सुनवाई करती हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुराधा शुक्ला भारद्वाज ने कहा कि आरोपी के वकील द्वारा दी गई दलील में कहा गया है कि चूंकि उनके क्लाइंट और महिला के बीच आपसी रजामंदी से अप्राकृतिक यौनसंबंध बना है, इसलिए उनके खिलाफ अप्राकृतिक दुष्कर्म का मामला नहीं बनता है.

यह तथ्य पूरी तरह से खारिज किया है और इसके आधार पर केस को खारिज नहीं किया जा सकता है. इस पूरे मामले में यह भी जान पड़ता है कि आरोपी ने अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए इस तरह की घृणित कार्य किया है. इसलिए इस मामले में उसे कदापि छोड़ा नहीं जा सकता.   

इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके पीड़िता के साथ अन्याय किया है और उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दो) (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) और 506 (आपराधिक धमकी) की दफाएं पूरी तरह से लागू होती है.

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अपनी दलील में कहा कि पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि पायलट ने उससे कहा कि अगर वह उसके साथ संबंध नहीं बनाएगी तो वह उसका कैरियर खत्म कर देगा. पीड़िता ने आरोप लगाया कि पायलट ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उसका यौन शोषण किया है. 

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ अप्राकृतिक सेक्स और बलात्कार किया. उसके बाद उसने आपत्तिजनक तस्वीरों के आधार पर धमकी भी दी. वहीं दूसरी ओर अभियोजन पक्ष की दलील के विरोध में आरोपी के वकील ने कहा कि जिस समय यह घटना हुई थी, महिला पहले से शादीशुदा थी.

उसे यह बाद अच्छी तरह से पता थी की हिंदू मैरेज एक्ट के तहत एक शादी के हुए दूसरी शादी पूरी तरह से गैरकानूनी है. उसने केवल गलत मंशा से अप्राकृतिक यौन संबंध और रेप के झूठे मामले में फंसा दिया.

गौरतलब है कि पीड़िता के द्वारा 2014 में दिल्ली के मोती नगर थाने में आरोपी के खिलाफ अप्राकृतिक यौन संबंध और रेप का मामला दर्ज कराया गया था.

First published: 7 May 2016, 10:22 IST
 
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