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दिल्ली: चिड़ियाघर में 46 हिरणों की मौत की आशंका, कठघरे में प्रशासन

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 May 2016, 13:56 IST

दिल्ली के चिड़ियाघर (नेशनल जूलोजिकल पार्क) में मरने वाले हिरणों की तादाद 46 तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. ये आंकड़ा पहले के 39 से ज्यादा है, जो सेंट्रल जू अथॉरिटी के निरीक्षण के बाद सामने आया था.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मंगलवार को केंद्रीय टीम ने चिड़ियाघर का दौरा किया था. वहीं प्रशासन का अपने पुराने दावे पर कायम है, जिसमें 16 चित्तीदार हिरणों की मौत की बात कही जा रही थी.

13 मौतों पर प्रशासन कायम


अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती टेस्ट के बाद तेरह हिरणों की मौत रेबीज से होने की बात सामने आई है. वहीं 13 हिरणों की मौत की वजह साफ नहीं हो पाई है.

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय टीम ने रिकॉर्ड की जांच-परख के बाद 46 हिरणों की मौत की आशंका जाहिर की है. छानबीन के दौरान बीट कीपर के रजिस्टर की भी जांच की गई.

जनवरी से हिरणों की मौत का मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है. अखबार के मुताबिक जिन 46 चित्तीदार हिरणों की मौत हुई है, उनमें से 33 परिपक्व हो चुके थे, जबकि बाकी 13 नवजात थे. 

रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका

केंद्रीय टीम को आशंका है कि प्रशासन ने नवजात हिरणों की मौत का रिकॉर्ड छुपाया है. जांच के दौरान टीम ने वेटेनरी अस्पताल में हिरणों की संख्या के रिकॉर्ड को लेकर भी गड़बड़ियां पाई हैं. अस्पताल में ही हिरणों के शव का पोस्टमार्टम हुआ था.

मार्च के मुकाबले अप्रैल में ज्यादा हिरणों की मौत की आशंका है. हालांकि दिल्ली चिड़ियाघर के अधिकारी कह रहे हैं कि 13 चित्तीदार हिरणों की रेबीज से मौत हुई है. वहीं स्वतंत्र लेबोरेट्री से अभी आठ और रिपोर्ट का इंतजार है.

रेबीज से मौत का दावा


दिल्ली चिड़ियाघर के मुख्य संरक्षक रियाज खान का कहना है, " हम इस बात पर अडिग हैं कि तेरह चित्तीदार हिरणों की रेबीज से मौत हुई है, वहीं तीन की मौत की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है. "

रियाज खान के मुताबिक सीजेडए (केंद्रीय जू अथॉरिटी) ने जांच का जो तरीका अपनाया है, वो अलग है. वहीं दौरे के बाद सीजेडए ने चिड़ियाघर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वो नियमित तौर पर स्वास्थ्य परामर्श कमिटी की बैठक आयोजित करें. साथ ही जानवरों की निगरानी के लिए सीसीटीवी लगाने की भी सलाह दी गई है.

इसके अलावा केंद्रीय टीम ने अपील की है कि वाइल्ड लइफ के जानकारों के पैनल और इंडियन वेटनरी इंस्टीट्यूट के अलावा नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल से भी सलाह मांगी जाए.

First published: 13 May 2016, 13:56 IST
 
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